सुनवाई के दौरान हुई मुख्य बहस और तल्ख टिप्पणियां
- “क्या वे आपको गंभीरता से नहीं ले रहे?” (Court’s Remark):सुनवाई शुरू होते ही जब पीठ ने देखा कि प्रतिवादी संख्या 1 (केंद्र सरकार) को नोटिस दिए जाने के बावजूद उनका कोई वकील कोर्ट में नहीं है, तो जस्टिस विक्रम नाथ ने टिप्पणी की:“प्रतिवादी संख्या 1 (यूनियन ऑफ इंडिया) को नोटिस तामील हो चुका है। केंद्र की ओर से कोई उपस्थित नहीं है। यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण मुद्दा है। क्या वे आपको/इस मुद्दे को गंभीरता से नहीं लेते?”याचिकाकर्ता के वकील ने जवाब दिया, “वे इस मामले को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं।”
- विभिन्न राज्यों में अलग-अलग कानूनी उम्र (Varying Legal Drinking Ages):CADD के वकील ने तर्क दिया कि भारत के विभिन्न राज्यों में शराब खरीदने की न्यूनतम कानूनी उम्र अलग-अलग है—कुछ राज्यों (जैसे दिल्ली/हरियाणा) में 25 वर्ष, तो कहीं 21 या 18 वर्ष। चूंकि कोई एकीकृत सत्यापन व्यवस्था (Aadhaar/Identity Check Protocol) नहीं है, इसलिए नाबालिग आसानी से शराब खरीद लेते हैं, जिससे नाबालिगों द्वारा शराब पीकर गाड़ी चलाने (Underage Drunk Driving) और दुर्घटनाओं के मामले बढ़ रहे हैं।
- “मिर्च मैंगो वोदका” और भ्रामक टैट्रा पैक्स पर चिंता:अदालत ने शराब की टैट्रा पैक (Tetra Pack) और पाउच में बिक्री से जुड़ी एक अन्य याचिका पर भी सुनवाई की। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि फल के जूस जैसे पैक में “चिल्ली मैंगो वोदका” जैसी कॉकटेल ड्रिंक्स बेची जा रही हैं, जो बच्चों और युवाओं को भ्रमित करती हैं:“वे फलों के आकार वाले पैक में वोदका बेच रहे हैं। इस पर कोई वैधानिक चेतावनी भी सही से नहीं होती। यह अविश्वसनीय है कि इसकी बिक्री की अनुमति कैसे दी जा रही है।”
- टैट्रा पैक निर्माताओं का पक्ष:टैट्रा पैक मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद दातार ने बताया कि वर्तमान में भारत के 10 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में टैट्रा पैक में शराब की बिक्री की अनुमति है। कोर्ट ने उन्हें मामले में पक्षकार बनने की अनुमति दी।
नई दिल्ली: शराब की बिक्री के पहले बिंदु (Point of Sale) पर अनिवार्य और एकसमान आयु सत्यापन प्रणाली (Uniform Age-Verification Mechanism), नाबालिगों द्वारा शराब के सेवन (Underage Drinking) और शराब पीकर गाड़ी चलाने (Drunk Driving) की रोकथाम, राज्यों में शराब खरीद की न्यूनतम विधिक आयु में भिन्नता (18 वर्ष बनाम 25 वर्ष), तथा फलों के रस की तरह भ्रामक व कपटपूर्ण पैकेजिंग—विशेषकर टेट्रा पैक और पाउच—में मादक पेय पदार्थों की बिक्री पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार के ढुलमुल रवैये पर गहरी नाराजगी व्यक्त की है।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति आर. महादेवन और न्यायमूर्ति अपारेश कुमार सिंह की तीन-न्यायाधीशों वाली पीठ ने गैर-सरकारी संगठन ‘कम्युनिटी अगेंस्ट ड्रंकन ड्राइविंग’ (CADD) द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की। अदालत ने पाया कि केंद्र सरकार को पूर्व में औपचारिक नोटिस तामील कराए जाने के बावजूद उसकी ओर से कोई भी विधि अधिकारी या वकील पेश नहीं हुआ। पीठ ने इसे एक गंभीर लोक-स्वास्थ्य और सुरक्षा का मुद्दा मानते हुए भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से मामले में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का अनुरोध किया और केंद्र सरकार को अपना विस्तृत जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया।
सर्वोच्च न्यायालय के प्रमुख न्यायिक निष्कर्ष एवं मौखिक टिप्पणियां
1. ‘नोटिस तामील होने के बाद भी केंद्र से कोई नहीं; क्या वे इसे गंभीरता से नहीं लेते?’
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने केंद्र सरकार की गैर-मौजूदगी पर नाराजगी जताते हुए दर्ज किया: “प्रतिवादी संख्या 1 (भारत संघ) को नोटिस तामील हो चुका है। केंद्र सरकार की ओर से कोई भी उपस्थित नहीं हो रहा है। यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण मुद्दा (Important Issue) है। क्या वे इसे गंभीरता से नहीं लेते? (They don’t take this seriously?)“
याचिकाकर्ता के वकील द्वारा यह कहे जाने पर कि “सरकार इस मामले को गंभीरता से नहीं ले रही है”, पीठ ने निर्देश दिया कि आदेश की प्रति सीधे सॉलिसिटर जनरल के कार्यालय को भेजी जाए ताकि वे अगली तारीख पर अदालत की सहायता कर सकें।
2. पूरे देश में उम्र सत्यापन का एकसमान प्रोटोकॉल क्यों जरूरी?
याचिकाकर्ता CADD की ओर से पेश वकील ने दलील दी कि भारत में राज्यों के आबकारी नियमों में भारी विसंगतियां हैं:
- आठ से अधिक राज्यों में शराब खरीदने की न्यूनतम कानूनी उम्र 25 वर्ष है (जैसे दिल्ली, पंजाब, हरियाणा), जबकि अन्य राज्यों में यह 21 वर्ष या 18 वर्ष तय है।
- समस्या यह है कि शराब के ठेकों, पब, बार और रेस्तरां में खरीदार की वास्तविक उम्र की जांच के लिए कोई मानकीकृत तकनीकी या दस्तावेजी प्रोटोकॉल मौजूद नहीं है।
- पहचान पत्र की अनिवार्य जांच न होने से कम उम्र के किशोर आसानी से शराब खरीद लेते हैं, जिसके कारण कम उम्र में शराब पीकर घातक सड़क दुर्घटनाओं (Underage Drunk Driving Accidents) में अप्रत्याशित वृद्धि हो रही है।
3. टेट्रा पैक में ‘चिली मैंगो वोडका’: भ्रामक और खतरनाक पैकेजिंग पर सवाल:
- अदालत ने मामले के साथ जुड़ी एक अन्य याचिका की भी सुनवाई की, जिसमें साधारण फलों के रस (Fruit Juices) से मिलते-जुलते टेट्रा पैक (Tetra Packs) और सैशे में शराब बेचे जाने पर प्रतिबंध की मांग की गई है।
- याचिकाकर्ता के वकील ने बाजार की स्थिति पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा:“वे फलों के आकार वाले पैकेटों में शराब बेच रहे हैं और इसे ‘चिली मैंगो वोडका’ (Chilli Mango Vodka) का नाम दे रहे हैं। पैकेट पर वोडका शब्द को बहुत छोटा लिखा जाता है और इस पर कोई स्पष्ट वैधानिक चेतावनी भी नहीं होती। यह अविश्वसनीय है कि इस तरह की भ्रामक पैकेजिंग में खुलेआम शराब बेचने की अनुमति कैसे दी जा रही है!“
- टेट्रा पैक एसोसिएशन का पक्ष: टेट्रा पैक मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद दातार ने मामले में पक्षकार बनने की अर्जी दी, जिसे पीठ ने स्वीकार कर लिया। दातार ने पीठ को अवगत कराया कि वर्तमान में देश के 10 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में टेट्रा पैक में शराब की बिक्री की वैधानिक अनुमति है।
मामले की तथ्यात्मक पृष्ठभूमि एवं पूर्व न्यायिक टिप्पणियां
| विवरण | घटनाक्रम एवं न्यायिक कार्यवाही |
| मूल याचिकाकर्ता | कम्युनिटी अगेंस्ट ड्रंकन ड्राइविंग (CADD) — सड़क सुरक्षा व नशा मुक्ति हेतु कार्यरत गैर-सरकारी संगठन। |
| मुख्य विधिक मांगें | 1. सभी शराब दुकानों, बार, पब और रेस्तरां में पहले बिक्री बिंदु (POS) पर अनिवार्य उम्र सत्यापन प्रणाली लागू हो। 2. फलों के जूस जैसी भ्रामक पैकेजिंग (टेट्रा पैक, पाउच) में शराब की बिक्री पर राष्ट्रव्यापी रोक लगे। |
| मई 2026 (SC की पूर्व टिप्पणी) | भारत के प्रधान न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाला बागची की पीठ ने टेट्रा पैक में शराब की बिक्री को “अत्यधिक कपटपूर्ण व भ्रामक” (Very Deceptive) करार दिया था और केंद्र व राज्यों के आबकारी विभागों से जवाब मांगा था। |
| 14 अक्टूबर 2026 की सुनवाई | केंद्र की अनुपस्थिति पर पीठ सख्त; सॉलिसिटर जनरल को उपस्थित होने का अनुरोध; जवाब हेतु 4 सप्ताह की अंतिम मोहलत। |
| अगली सुनवाई | 6 सप्ताह बाद निर्धारित। |
विधिक एवं संवैधानिक विश्लेषण: क्या कहता है कानून?
- संविधान का अनुच्छेद 47 (राज्य के नीति निदेशक तत्व – DPSP):
- अनुच्छेद 47 के तहत राज्य का यह प्राथमिक कर्तव्य है कि वह अपने लोगों के पोषण स्तर और जीवन स्तर को ऊंचा उठाए तथा लोक-स्वास्थ्य में सुधार करे। राज्य औषधीय प्रयोजनों को छोड़कर मादक पेय पदार्थों और स्वास्थ्य के लिए हानिकर नशीले द्रव्यों के उपभोग का प्रतिषेध करने का प्रयास करेगा।
- अनुच्छेद 21 (जीवन और सड़क सुरक्षा का अधिकार):
- शराब पीकर वाहन चलाने से निर्दोष राहगीरों और यात्रियों की जान जाने का सीधा संबंध अनुच्छेद 21 के तहत जीवन की सुरक्षा के मौलिक अधिकार से है। नाबालिगों तक शराब की आसान पहुंच पर नियंत्रण लगाना राज्य का सकारात्मक वैधानिक दायित्व है।
- भ्रामक पैकेजिंग और उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019:
- जब शराब को ऐसे टेट्रा पैक में पैक किया जाता है जो पहली नजर में फ्रूट जूस या मिल्क शेक जैसा दिखता है, तो यह ‘कपटपूर्ण विज्ञापन/पैकेजिंग’ (Deceptive Packaging) का रूप ले लेता है। इससे नाबालिगों द्वारा अनजाने में या आसानी से इसे छिपाकर ले जाने और उपभोग करने का गंभीर खतरा पैदा होता है।
विधिक विवरण
- केस संदर्भ: कम्युनिटी अगेंस्ट ड्रंकन ड्राइविंग (CADD) बनाम भारत संघ व अन्य [रिट याचिका (सिविल) – सर्वोच्च न्यायालय]
- पीठ: न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति आर. महादेवन और न्यायमूर्ति अपारेश कुमार सिंह (तीन-न्यायाधीशों की पीठ)
- आदेश की तिथि: 14 अक्टूबर 2026
- अगली सुनवाई की तिथि: 6 सप्ताह बाद
- शामिल वरिष्ठ अधिवक्ता:
- याचिकाकर्ता (CADD) की ओर से: उपस्थित अधिवक्ता
- टेट्रा पैक मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन की ओर से: वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद दातार
- प्रासंगिक कानून एवं विधिक प्रावधान:
- भारत का संविधान — अनुच्छेद 21 (जीवन की सुरक्षा), अनुच्छेद 47 (लोक स्वास्थ्य व नशाबंदी) एवं अनुच्छेद 32
- मोटर वाहन अधिनियम, 1988 — धारा 185 (शराब पीकर वाहन चलाने पर दंड)
- विभिन्न राज्यों के राज्य आबकारी अधिनियम (State Excise Acts)
- उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 (भ्रामक पैकेजिंग पर रोक)
- अंतिम परिणाम: केंद्र सरकार को 4 सप्ताह में जवाब दाखिल करने का निर्देश; सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से व्यक्तिगत उपस्थिति का अनुरोध; आदेश की प्रति एसजी कार्यालय को तामील कराने का निर्देश।
Point of Sale: मामले का संक्षिप्त विवरण (At A Glance)
| विवरण | जानकारी |
| संबंधित अदालत | भारत का उच्चतम न्यायालय (Supreme Court of India) |
| पीठ | न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति आर. महादेवन एवं न्यायमूर्ति अपारेश कुमार सिंह |
| याचिकाकर्ता | कम्युनिटी अगेंस्ट ड्रंकन ड्राइविंग (CADD – गैर-सरकारी संगठन) |
| मुख्य मांगें | 1. पूरे भारत में शराब खरीदने हेतु अनिवार्य और एकसमान आयु सत्यापन SOP/प्रोटोकॉल। 2. जूस या साधारण पेय पदार्थों जैसे भ्रामक टैट्रा पैक्स (Tetra Packs/Sachets) में शराब बिक्री पर रोक। |
| कोर्ट की टिप्पणी | नोटिस के बावजूद केंद्र सरकार का उपस्थित न होना चिंताजनक; सॉलिसिटर जनरल को कोर्ट में उपस्थित रहने का अनुरोध। |
| अगली सुनवाई | 6 सप्ताह बाद |

