याचिका में बैंक ऑफ बड़ौदा और पूर्व अधिकारियों पर लगाए गए गंभीर आरोप
- शेल कंपनियों के जरिए फंड की हेराफेरी (Round-Tripping & Sham Entities):याचिका के अनुसार, 2012 से 2017 के दौरान जब डॉ. शेट्टी परोपकारी कार्यों में व्यस्त थे, तब मंगत बंधुओं (प्रशांत और प्रमोद मंगत) ने कंपनी के वित्तीय नियंत्रण पर कब्जा कर लिया। बैंक ऑफ बड़ौदा के अधिकारियों ने फर्जी सप्लायर संस्थाएं बनाकर पैसे को घुमाने (Round-Tripping) में मदद की ताकि कंपनी कागजों पर लाभदायक दिखे।
- फर्जी दस्तखत और रिश्वतखोरी के आरोप:डॉ. शेट्टी का दावा है कि उनके इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर का उपयोग बिना उनकी सहमति के ऋण गारंटी (Loan Guarantees) पर किया गया। आरोप है कि बैंक अधिकारियों ने रोलेक्स घड़ी और लग्जरी इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे उपहार स्वीकार करके वैधानिक ऑडिटरों (Ernst & Young – EY) से AED 980 मिलियन ($250 मिलियन) का कॉर्पोरेट कर्ज छुपाया।
- लुक आउट सर्कुलर (LOC) और बलि का बकरा बनाना:2019 के अंत में जब धोखाधड़ी उजागर हुई, तो बैंक ने आरबीआई (RBI) को गलत रिटर्न सौंपकर डॉ. शेट्टी को ‘डिफॉल्टर’ घोषित कर दिया। उनके खिलाफ लुक आउट सर्कुलर (LOC) जारी करवाया गया, जिससे वे 3 साल से अधिक समय तक भारत में फंसे रहे, जिसे बाद में कर्नाटक हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया था।
- अबू धाबी सेटलमेंट:मुकदमे में उल्लेख किया गया है कि जहां बैंक ऑफ बड़ौदा ने अबू धाबी में NMC के प्रशासकों द्वारा लाए गए दावों को निपटाने के लिए ~$600 मिलियन (लगभग ₹5,700 करोड़) का भुगतान किया, वहीं वह उसी गारंटी के आधार पर डॉ. शेट्टी को निशाना बनाना जारी रखे हुए है।
हर्जाने का तीन-स्तरीय विभाजन ($15 Billion Breakdown)
| हर्जाने का प्रकार | दावों की राशि ($) | विवरण / कारण |
| प्रत्यक्ष नुकसान (Direct Damages) | $5 बिलियन | शेयरधारिता के नुकसान और जबरन लादे गए दायित्वों के लिए। |
| परिणामी नुकसान (Consequential Damages) | $5 बिलियन | व्यावसायिक अवसरों और भावी आय के नुकसान के लिए। |
| प्रतिष्ठा का नुकसान (Reputational Loss) | $5 बिलियन | बैंक ऑफ बड़ौदा द्वारा व्यापारिक साख पूरी तरह नष्ट करने के खिलाफ। |
| कुल हर्जाना (Total Claim) | $15 बिलियन (~₹1.43 लाख करोड़) | बॉम्बे हाईकोर्ट में मांगा गया कुल हर्जाना |
मुंबई: कॉर्पोरेट धोखाधड़ी और बैंकिंग मिलीभगत (Corporate Fraud & Bank Collusion), एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग (AML) नियमों की घोर विफलता, बैंकों द्वारा वैधानिक लेखा परीक्षकों (Statutory Auditors) से ऋण छिपाने के लिए बैलेंस सर्टिफिकेट्स का विभाजन (Splitting Balance Confirmation Certificates), फर्जी शेल संस्थाओं के जरिए राउंड-ट्रिपिंग लेन-देन (Round-Tripping Transactions), तथा दुर्भावनापूर्ण लुकआउट सर्कुलर (LOC) जारी कराकर व्यक्तिगत व व्यावसायिक प्रतिष्ठा को नष्ट करने के आरोपों पर बॉम्बे हाईकोर्ट में भारत के कॉर्पोरेट इतिहास का सबसे बड़ा क्षतिपूर्ति मुकदमा दायर किया गया है।
संयुक्त अरब अमीरात (UAE) स्थित प्रमुख स्वास्थ्य सेवा समूह एनएमसी हेल्थकेयर (NMC Healthcare) और यूएई एक्सचेंज (UAE Exchange) के संस्थापक डॉ. बावगुथु रघुराम (बी.आर.) शेट्टी ने सार्वजनिक क्षेत्र के प्रमुख बैंक बैंक ऑफ बड़ौदा (Bank of Baroda – BoB), उसके अधिकारियों और एनएमसी के पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट में एक वाणिज्यिक मुकदमा (Commercial Suit) दायर किया है। वादी ने प्रत्यक्ष नुकसान, व्यावसायिक अवसरों की हानि और प्रतिष्ठा के विनाश के एवज में कुल $15 बिलियन (लगभग ₹1,43,000 करोड़) की क्षतिपूर्ति की मांग की है।
मुकदमे के मुख्य विधिक आधार एवं बैंक पर लगाए गए गंभीर आरोप
1. बैंक धोखाधड़ी का मूकदर्शक नहीं, बल्कि उसे अंजाम देने का मुख्य औजार था
वादी डॉ. बी.आर. शेट्टी (अपने पावर ऑफ अटॉर्नी धारक डॉ. शिशिर शेट्टी के माध्यम से) ने स्पष्ट किया है कि यह मुकदमा मुख्य रूप से बैंक ऑफ बड़ौदा के खिलाफ केंद्रित है:“प्रतिवादी बैंक केवल वादी के साथ की गई धोखाधड़ी का मूकदर्शक (Bystander) नहीं था, बल्कि वह स्वयं वह माध्यम और औजार (Instrument) था जिसके जरिए इस पूरी जालसाजी को धरातल पर उतारा और संचालित किया गया।”
2. मंगत बंधुओं द्वारा नियंत्रण और इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षरों का दुरुपयोग:
- वादपत्र के अनुसार, डॉ. शेट्टी 2012 से 2017 के बीच परोपकारी कार्यों (Philanthropy) में संलग्न होने के कारण कंपनी के दैनिक परिचालन से हट गए थे।
- इस दौरान कंपनी का वित्तीय नियंत्रण पूर्व कार्यकारी प्रशांत मंगत और प्रोमोथ मंगत के हाथों में आ गया।
- आरोप है कि मंगत बंधुओं ने फर्जी आपूर्तिकर्ता संस्थाओं (Sham Supplier Entities) के जरिए भारी धनराशि की हेराफेरी की और ऋण गारंटी दस्तावेजों पर बिना सहमति के डॉ. शेट्टी के हस्ताक्षरों को इलेक्ट्रॉनिक टेम्पलेट से कॉपी कर इस्तेमाल किया।
3. 100 से अधिक AML चेतावनियों की अनदेखी और विलासिता पूर्ण रिश्वत:
- राउंड-ट्रिपिंग: बैंक अधिकारियों ने शेल कंपनियों के खाते खोलकर गोल-गोल पैसे घुमाए (Round-tripping) ताकि कंपनी को कृत्रिम रूप से लाभदायक दिखाया जा सके।
- रिश्वत और उपहार: बैंक अधिकारियों ने कंपनी के वास्तविक कर्जों को छिपाने के लिए अवैध अनुग्रह (Illegal Gratification), महंगे इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद और रोलेक्स घड़ी (Rolex watch) जैसी विलासितापूर्ण वस्तुएं स्वीकार कीं।
- आंतरिक चेतावनियां दबाईं: बैंक की आंतरिक प्रणालियों द्वारा उत्पन्न 100 से अधिक एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग (AML) चेतावनियों को अधिकारियों ने जानबूझकर नजरअंदाज किया।
- ऑडिटरों से ऋण छिपाना: वैधानिक ऑडिटर अर्न्स्ट एंड यंग (EY) से समूह के लगभग 980 मिलियन यूएई दिरहम ($250 मिलियन / ~₹2,300 करोड़) के कॉर्पोरेट कर्ज को छिपाने के लिए बैंक ऑफ बड़ौदा ने बैलेंस पुष्टिकरण प्रमाणपत्रों को विभाजित (Split Balance Confirmation Certificates) किया।
4. बलि का बकरा बनाना और दुर्भावनापूर्ण लुकआउट सर्कुलर (LOC):
- 2019 के अंत में जब अनियमितताएं सार्वजनिक हुईं, तो बैंक ने कथित तौर पर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को गलत रिटर्न दाखिल कर डॉ. शेट्टी को मुख्य साजिशकर्ता के रूप में पेश किया।
- बैंक ने दुर्भावनापूर्वक एक लुकआउट सर्कुलर (LOC) जारी कराया, जिसके कारण डॉ. शेट्टी को तीन वर्षों से अधिक समय तक भारत में नजरबंद/सीमित रहना पड़ा (जिसे बाद में कर्नाटक उच्च न्यायालय ने रद्द किया)।
- वादपत्र में कहा गया है: “जैसे ही धोखाधड़ी सामने आई, प्रतिवादी बैंक ने वादी को एक बकाएदार, देनदारियों से भागने वाले भगोड़े और उसी धोखाधड़ी के रचयिता के रूप में पुनः चित्रित कर दिया, जिसके वे स्वयं पीड़ित थे।”
$15 बिलियन (~₹1.43 लाख करोड़) के हर्जाने का मद-वार विभाजन
वादी ने निम्नलिखित तीन स्वतंत्र शीर्षों के तहत क्षतिपूर्ति का दावा किया है:
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दावा की गई कुल क्षतिपूर्ति: $15 बिलियन (~₹1.43 लाख करोड़)
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【मद 1: प्रत्यक्ष नुकसान ($5 Billion)】 【मद 2: पारिणामिक नुकसान ($5 Billion)】 【मद 3: प्रतिष्ठा की हानि ($5 Billion)】
• छीनी गई शेयरधारिता और थोपी गई • व्यावसायिक अवसरों, अनुबंधों और वैश्विक • अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दशकों में बनाई
अवैध व्यक्तिगत देनदारियां। व्यापार आय का स्थायी नुकसान। गई व्यावसायिक साख और प्रतिष्ठा को नष्ट
• कंपनियों के पतन का प्रत्यक्ष आर्थिक घाटा। करने के लिए केवल बैंक ऑफ बड़ौदा के विरुद्ध।
अबू धाबी समझौता बनाम व्यक्तिगत देनदारी का विरोधाभास
वादपत्र में एक महत्वपूर्ण कानूनी विसंगति को भी उजागर किया गया है:
- बैंक ऑफ बड़ौदा ने अबू धाबी में एनएमसी के प्रशासकों द्वारा दायर दावों को निपटाने के लिए लगभग $600 मिलियन (लगभग ₹5,700 करोड़) का समझौता भुगतान स्वीकार/निष्पादित किया है।
- एक ओर बैंक संस्थागत स्तर पर समझौता कर रहा है, वहीं दूसरी ओर वह उन्हीं अंतर्निहित जाली गारंटियों के आधार पर डॉ. बी.आर. शेट्टी के खिलाफ व्यक्तिगत रूप से कानूनी कार्रवाई जारी रखे हुए है।
विधिक एवं कॉर्पोरेट विश्लेषण
- बैंक की विकेरियस और फिड्यूशरी देयता (Fiduciary & Vicarious Liability):
- बैंकिंग न्यायशास्त्र के तहत, यदि किसी बैंक के वरिष्ठ अधिकारी अपने पद का दुरुपयोग कर धोखाधड़ी को छिपाने के लिए फर्जी प्रमाण पत्र जारी करते हैं और नियामक चेतावनियों को दबाते हैं, तो बैंक अपने कर्मचारियों के कपटपूर्ण कृत्यों के लिए उत्तरदायी होता है।
- दुर्भावनापूर्ण अभियोजन और LOC का दुरुपयोग (Tort of Malicious Prosecution):
- बिना पुख्ता आपराधिक संलिप्तता के किसी अंतरराष्ट्रीय उद्योगपति के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर जारी करवाकर उसके मौलिक आवागमन (अनुच्छेद 21) को बाधित करना टॉर्ट कानून के तहत भारी हर्जाने (Damages for Loss of Liberty & Reputation) का विधिक आधार बनता है।
- कमर्शियल कोर्ट्स एक्ट, 2015 का अधिकार क्षेत्र:
- बॉम्बे हाईकोर्ट की वाणिज्यिक शाखा (Commercial Division) के पास निर्दिष्ट मूल्य वाले उच्च-मूल्य वाणिज्यिक विवादों, बैंकिंग अनुबंधों और कॉर्पोरेट धोखाधड़ी से उत्पन्न नुकसान के दावों की सुनवाई करने का मूल सिविल क्षेत्राधिकार है।
विधिक विवरण
- केस संदर्भ: डॉ. बी.आर. शेट्टी (पावर ऑफ अटॉर्नी धारक डॉ. शिशिर शेट्टी के माध्यम से) बनाम बैंक ऑफ बड़ौदा व अन्य [वाणिज्यिक वाद / Commercial Suit – बॉम्बे उच्च न्यायालय]
- वादी: डॉ. बावगुथु रघुराम (बी.आर.) शेट्टी (संस्थापक, एनएमसी हेल्थकेयर व यूएई एक्सचेंज)
- प्रमुख प्रतिवादी:
- बैंक ऑफ बड़ौदा (BoB) एवं संबंधित बैंक अधिकारी
- प्रशांत मंगत (पूर्व सीईओ / कार्यकारी, एनएमसी)
- प्रोमोथ मंगत (पूर्व कार्यकारी, एनएमसी)
- मांगी गई कुल क्षतिपूर्ति राशि: $15 बिलियन (लगभग ₹1.43 लाख करोड़)
- वादी का विधिक प्रतिनिधित्व: MZM लीगल एलएलपी की ओर से अधिवक्ता जुल्फिकार मेमन, वसीम पनगरकर, अभिषेक गुप्ता और चिन्मय बंबरकर
- प्रासंगिक कानून एवं विधिक प्रावधान:
- वाणिज्यिक न्यायालय अधिनियम, 2015 (Commercial Courts Act, 2015)
- भारतीय संविदा अधिनियम, 1872 — धारा 17 (धोखाधड़ी), धारा 73 (क्षतिपूर्ति) एवं गारंटी अनुबंध नियम
- टॉर्ट विधि (Law of Torts) — दुर्भावनापूर्ण अभियोजन, षड्यंत्र (Tort of Conspiracy) और प्रतिष्ठा की क्षति (Defamation/Reputational Injury)
- बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 एवं RBI एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग (AML) दिशानिर्देश
- वर्तमान स्थिति: बॉम्बे हाईकोर्ट के समक्ष मुकदमा दायर; प्रतिवादियों को समन जारी करने और प्रारंभिक सुनवाई की प्रक्रिया लंबित।
मामले का संक्षिप्त विवरण (At A Glance)
| विवरण | जानकारी |
| संबंधित अदालत | बॉम्बे उच्च न्यायालय (Bombay High Court) |
| याचिकाकर्ता | डॉ. बी.आर. शेट्टी (संस्थापक, NMC हेल्थकेयर व यूएई एक्सचेंज) |
| प्रतिवादी | बैंक ऑफ बड़ौदा (BoB), बैंक अधिकारी और पूर्व NMC कार्यकारी (प्रशांत मंगत व प्रमोद मंगत) |
| दावा की गई राशि | $15 बिलियन (लगभग ₹1.43 लाख करोड़) |
| प्रतिनिधित्व | एमजेडएम लीगल एलएलपी (MZM Legal LLP) के अधिवक्ता ज़ुल्फ़िकार मेमन, वसीम पंगारकर व अन्य |

