Friday, October 16, 2026
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Google Data Centre: गूगल-अडानी के विशाखापट्टनम डेटा सेंटर की पर्यावरण मंजूरी को चुनौती देने वाली याचिका; NGT ने केंद्र से मांगा जवाब

परियोजना की पृष्ठभूमि और निवेश (Project Background)

यह प्रस्तावित 512 मेगावाट (MW) क्षमता वाला डेटा सेंटर विशाखापट्टनम के अडाविवरम और मुदसर्लोवा गांवों में फैला हुआ है। यह प्रोजेक्ट विशाखापट्टनम में गूगल द्वारा अडानीकनेक्ट्स (AdaniConneX) और एयरटेल के सहयोग से विकसित किए जा रहे भारत के $15 बिलियन डॉलर के विशाल AI हब का हिस्सा है।

आंध्र प्रदेश सरकार ने फरवरी 2026 में डेटा सेंटर पहल के लिए तीन स्थानों पर कुल 601.4 एकड़ भूमि आवंटित की थी, जिसमें से 160 एकड़ भूमि इस मुदसर्लोवा प्रोजेक्ट के लिए निर्धारित की गई थी।

याचिका में उठाए गए मुख्य पर्यावरणीय मुद्दे

  1. गलत वर्गीकरण और मूल्यांकन की अनदेखी (Category B2 Misclassification):याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ताओं ने तर्क दिया कि यह प्रोजेक्ट कंबलाकोंडा वन्यजीव अभयारण्य (Kambalakonda Wildlife Sanctuary) से केवल 750 मीटर और इसके अधिसूचित इको-सेंसिटिव जोन (ESZ) से मात्र 470 मीटर की दूरी पर स्थित है। इतने संवेदनशील स्थान पर होने के कारण इसे श्रेणी B2 (Category B2) निर्माण परियोजना के रूप में गलत तरीके से वर्गीकृत किया गया और राज्य स्तर की एजेंसी (SEIAA) द्वारा एक ही बैठक (12 मई) में बिना गहन समीक्षा के क्लीयरेंस दे दिया गया, जबकि इसका अधिक कड़ा मूल्यांकन केंद्र सरकार (MoEFCC) द्वारा किया जाना चाहिए था।
  2. विशाखापट्टनम के पेयजल जलाशय को खतरा:प्रस्तावित प्रोजेक्ट स्थल मुदसर्लोवा जलाशय से ठीक चढ़ाई वाले क्षेत्र में स्थित है। यह जलाशय विशाखापट्टनम शहर के लिए पीने के पानी का एक प्रमुख स्रोत है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि खुदाई और निर्माण गतिविधियों से जलाशय को पानी पहुँचाने वाली 7 प्राकृतिक जलधाराएँ (Natural Streams) अवरुद्ध हो जाएँगी, जिसके लिए कोई स्वतंत्र हाइड्रोलॉजिकल (जल-विज्ञान) अध्ययन नहीं कराया गया।
  3. वन कानूनों का उल्लंघन और संसाधनों की खपत:याचिका में 8 मई को डिवीजनल फॉरेस्ट ऑफिसर (DFO) द्वारा जलाशय से सटी 160 एकड़ जमीन पर पेड़ों की कटाई और झाड़ियों की सफाई के लिए जारी अनुमति पर सवाल उठाया गया है। आरोप है कि वन संरक्षण कानूनों (Forest Conservation Act) के तहत अनिवार्य स्वीकृतियां प्राप्त नहीं की गई थीं। इसके अतिरिक्त, 512 MW के विशाल डेटा सेंटर के लिए आवश्यक विद्युत, पानी की अत्यधिक खपत और ध्वनि प्रदूषण का भी समुचित पर्यावरणीय आकलन नहीं किया गया।
  4. मांग:याचिकाकर्ता ने 10 जून 2026 को जारी पर्यावरण क्लीयरेंस को रद्द करने तथा सुनवाई पूरी होने तक स्थल पर पेड़ काटने, खुदाई करने व निर्माण गतिविधियों पर तुरंत अंतरिम रोक (Interim Stay) लगाने की गुहार लगाई है।

चेन्नई / नई दिल्ली: पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) अधिसूचना, 2006 के तहत कैटेगरी B2 (निर्माण परियोजनाएं) बनाम कैटेगरी A (सख्त केंद्रीय मूल्यांकन) का विधिक वर्गीकरण, वन्यजीव अभयारण्य और उसके अधिसूचित पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्र (Eco-Sensitive Zone – ESZ) के समीपी क्षेत्रों में निर्माण की वैधानिक सीमाएं, वन संरक्षण अधिनियम के तहत वैधानिक पूर्व-अनुमति (Forest Clearances), तथा पेयजल जलाशयों के प्राकृतिक जलग्रहण क्षेत्रों (Catchment & Hydrological Impact) के संरक्षण पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) की दक्षिणी क्षेत्रीय पीठ ने केंद्र सरकार से औपचारिक जवाब तलब किया है।

न्यायिक सदस्य न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) पुष्पा सत्यनारायण और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. प्रशांत गर्गव की पीठ ने पूर्व ग्रेटर विशाखापट्टनम नगर निगम (GVMC) पार्षद बोड्डू गंगा राव द्वारा दायर पर्यावरण अपील पर सुनवाई करते हुए केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEF&CC) और अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। मामले की अगली विस्तृत सुनवाई 26 अक्टूबर 2026 को निर्धारित की गई है।

यह याचिका अदानी इंफ्रा (इंडिया) लिमिटेड के विशेष प्रयोजन वाहन (SPV) विशाखापट्टनम हाइपरस्केल डेटा सेंटर पार्क लिमिटेड को 10 जून 2026 को राज्य पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण (SEIAA) द्वारा प्रदान की गई पर्यावरण मंजूरी (Environmental Clearance) को रद्द करने की मांग करती है। यह 512 मेगावाट की परियोजना विशाखापट्टनम में गूगल द्वारा अदानी-कनेक्स और एयरटेल के सहयोग से विकसित किए जा रहे $15 बिलियन (₹17,700 करोड़ लागत घटक) के वृहद आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) हब का केंद्रीय हिस्सा है।

अपीलकर्ता द्वारा उठाए गए मुख्य विधिक व पर्यावरणीय आक्षेप

1. गलत वर्गीकरण (Misclassification): कैटेगरी A के बजाय कैटेगरी B2 में मंजूरी

  • अभयारण्य और ESZ से निकटता: याचिका में आरोप लगाया गया है कि प्रस्तावित परियोजना स्थल कमलाकोंडा वन्यजीव अभयारण्य (Kambalakonda Wildlife Sanctuary) से मात्र 750 मीटर और इसके अधिसूचित पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्र (ESZ) से केवल 470 मीटर की दूरी पर स्थित है।
  • सामान्य शर्तों (General Conditions) का उल्लंघन: EIA अधिसूचना के अनुसार, किसी संरक्षित क्षेत्र या ESZ के 5 से 10 किमी के दायरे में आने वाली परियोजनाओं का मूल्यांकन राज्य प्राधिकरण (SEIAA) द्वारा नहीं, बल्कि केंद्र सरकार (MoEF&CC की विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति – EAC) द्वारा कैटेगरी ‘A’ के कड़े मानकों के तहत किया जाना अनिवार्य है। SEIAA द्वारा इसे सामान्य ‘कैटेगरी B2’ (सामान्य वाणिज्यिक निर्माण) मानकर मंजूरी देना अधिकारिता-विहीन और प्रक्रियात्मक रूप से अवैध है।

2. मुदासरलोवा जलाशय (Mudasarlova Reservoir) और 7 प्राकृतिक जलधाराओं पर संकट:

  • मुदासरलोवा जलाशय विशाखापट्टनम महानगर के लिए पीने के पानी का एक ऐतिहासिक और प्राथमिक स्रोत है।
  • परियोजना स्थल (अडवीवरम और मुदासरलोवा गांव) सीधे इस जलाशय के ठीक ऊपर (Uphill) ढलान पर स्थित है।
  • अपीलकर्ता का दावा है कि बड़े पैमाने पर होने वाली खुदाई, पहाड़ी कटाई और निर्माण कार्य जलाशय में गिरने वाली 7 प्राकृतिक जलधाराओं (Feeder Streams) के बहाव को पूरी तरह अवरुद्ध या प्रदूषित कर देंगे।
  • बावजूद इसके, पर्यावरण मंजूरी जारी करने से पूर्व कोई भी स्वतंत्र जलवैज्ञानिक (Hydrological) या जलग्रहण क्षेत्र अध्ययन नहीं कराया गया।

3. 160 एकड़ में वन कटाई और वन कानूनों की अवहेलना:

  • याचिका में 8 मई 2026 को प्रभागीय वन अधिकारी (DFO) द्वारा जलाशय से सटी 160 एकड़ भूमि पर वनस्पति और पेड़ों की कटाई हेतु जारी की गई अनुमति को चुनौती दी गई है।
  • आरोप है कि वन (संरक्षण एवं संवर्धन) अधिनियम के तहत आवश्यक वैधानिक अनापत्तियां और केंद्र सरकार की स्वीकृति प्राप्त किए बिना ही वन भूमि के स्वरूप को बदला जा रहा है।

4. एक ही बैठक में जल्दबाजी में मंजूरी (Single Sitting Clearance):

  • अपील में रेखांकित किया गया है कि राज्य स्तरीय विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति (SEAC) ने 12 मई 2026 को हुई केवल एक ही बैठक में इतने विशाल 512 मेगावाट के हाइपरस्केल डेटा सेंटर के प्रस्ताव का सतही परीक्षण किया और तुरंत पर्यावरण मंजूरी की संस्तुति कर दी।
  • परियोजना की अत्यधिक जल खपत (शीतलन प्रणाली हेतु), बिजली ग्रिड पर भारी दबाव और आवासीय क्षेत्रों पर पड़ने वाले ध्वनि प्रदूषण का कोई वस्तुनिष्ठ अध्ययन रिकॉर्ड पर नहीं रखा गया।

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परियोजना की पृष्ठभूमि और विधिक संरचना

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│ विशाखापट्टनम AI हाइपरस्केल डेटा सेंटर: विधिक ढांचा │
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【वृहद AI इंफ्रास्ट्रक्चर पहल】 【परियोजना का सटीक स्थान】 【आंध्र प्रदेश सरकार का आवंटन】
• गूगल, अदानी-कनेक्स और एयरटेल • अडवीवरम और मुदासरलोवा गांव • फरवरी 2026 में 3 स्थानों पर
की $15 बिलियन की AI हब साझेदारी। (विशाखापट्टनम, आंध्र प्रदेश)। कुल 601.4 एकड़ भूमि स्वीकृत;
• 512 MW क्षमता का हाइपरस्केल डेटा • कमलाकोंडा अभयारण्य से 750 मीटर जिसमें से 160 एकड़ मुदासरलोवा
सेंटर; अनुमानित लागत ₹17,700 करोड़। और मुदासरलोवा जलाशय के ऊपर ढलान। साइट के लिए निर्धारित।

विधिक एवं पर्यावरणीय विश्लेषण: क्या कहता है कानून?

  • EIA अधिसूचना, 2006 का सामान्य शर्त खंड (General Condition):
    • यदि कोई ‘कैटेगरी B’ परियोजना किसी राष्ट्रीय उद्यान या वन्यजीव अभयारण्य की बाहरी सीमा के निर्दिष्ट दायरे में स्थित है, तो उसे स्वतः कैटेगरी ‘A’ माना जाता है।
    • ऐसी परियोजनाओं के लिए व्यापक पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA रिपोर्ट), सार्वजनिक सुनवाई (Public Hearing), और केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय (MoEF&CC) की विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति (EAC) द्वारा जांच अनिवार्य होती है। राज्य प्राधिकरण द्वारा इसे महज कुछ दिनों में स्थानीय स्तर पर क्लीयर करना विधिक रूप से संदिग्ध है।
  • एहतियाती सिद्धांत और जल सुरक्षा (Precautionary Principle & Article 21):
    • सर्वोच्च न्यायालय ने वेल्लोर सिटिजन्स वेलफेयर फोरम (1996) और एम.सी. मेहता के मामलों में स्पष्ट किया है कि आर्थिक विकास और तकनीकी निवेश कितना भी बड़ा क्यों न हो, वह लाखों नागरिकों के पीने के पानी के स्रोत की कीमत पर नहीं हो सकता।
    • मुदासरलोवा जलाशय विशाखापट्टनम की जल सुरक्षा का संवेदनशील अंग है; स्वतंत्र हाइड्रोलॉजिकल मॉडलिंग के बिना निर्माण की अनुमति देना ‘एहतियाती सिद्धांत’ का उल्लंघन है।
  • आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय बनाम NGT क्षेत्राधिकार:
    • आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय में भी इस भूमि आवंटन और जनहित के मुद्दों पर समानांतर कार्यवाही विचाराधीन रही है, जहां महाधिवक्ता ने तर्क दिया था कि डेटा सेंटर निर्माण राज्य क्लीयरेंस के अधीन है।
    • हालांकि, पर्यावरण मंजूरी (EC) की वैधानिकता और पर्यावरणीय कानूनों के उल्लंघन की विशेष जांच राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010 की धारा 14 एवं 16 के तहत केवल NGT के विशेष अपीलीय क्षेत्राधिकार में आती है।

विधिक विवरण

  • केस संदर्भ: बोड्डू रेड्डी / बोड्डू गंगा राव बनाम भारत संघ व अन्य [अपील – राष्ट्रीय हरित अधिकरण (दक्षिणी क्षेत्र पीठ)]
  • पीठ: न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) पुष्पा सत्यनारायण (न्यायिक सदस्य) एवं डॉ. प्रशांत गर्गव (विशेषज्ञ सदस्य)
  • आदेश / नोटिस की तिथि: 16 अक्टूबर 2026
  • अगली सुनवाई की तिथि: 26 अक्टूबर 2026
  • विवादित मंजूरी: आंध्र प्रदेश SEIAA द्वारा 10 जून 2026 को जारी पर्यावरण मंजूरी
  • परियोजना प्रवर्तक: विशाखापट्टनम हाइपरस्केल डेटा सेंटर पार्क लिमिटेड (अदानी इंफ्रा SPV / गूगल पार्टनरशिप)

विधिक प्रतिनिधित्व:

  • अपीलकर्ता की ओर से: अधिवक्ता के.एम. मीनल, कुमार अभिषेक, एम. हर्षिनी, जी. सुष्मिता और संतोष कुमार यादव।
  • प्रतिवादी: भारत संघ (MoEF&CC), आंध्र प्रदेश SEIAA, राज्य सरकार एवं डेटा सेंटर कंपनी।
  • प्रासंगिक कानून एवं पर्यावरणीय प्रावधान:
    • पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 सहपठित EIA अधिसूचना, 2006 (कैटेगरी A बनाम B2 वर्गीकरण)
    • राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010 (NGT Act) — धारा 16(h) (पर्यावरण मंजूरी के विरुद्ध अपील) एवं धारा 20 (सतत विकास व एहतियाती सिद्धांत)
    • वन (संरक्षण एवं संवर्धन) अधिनियम, 1980/2023 — गैर-वानिकी उपयोग हेतु पूर्व केंद्र अनुमति
    • वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 — पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्र (ESZ) दिशानिर्देश
  • याचिकाकर्ता द्वारा मांगी गई राहत: 10 जून 2026 की पर्यावरण मंजूरी को निरस्त करना तथा लंबित कार्यवाही के दौरान निर्माण, उत्खनन, वृक्ष कटाई और साइट की तैयारी पर तत्काल अंतरिम रोक।
  • वर्तमान स्थिति: NGT ने केंद्र सरकार (MoEF&CC) और राज्य से जवाब तलब किया है; मामले को 26 अक्टूबर 2026 को अंतरिम राहत और मुख्य आधारों पर सुनवाई हेतु सूचीबद्ध किया गया है।

Google Data Centre:मामले का संक्षिप्त विवरण (At A Glance)

विवरणजानकारी
संबंधित अदालत/फोरमराष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT)
पीठन्यायमूर्ति पुष्पा सत्यनारायण एवं विशेषज्ञ सदस्य प्रशांत गर्गव
याचिकाकर्ताबोड्डू गंगा राव (पूर्व कॉरपोरेटर, ग्रेटर विशाखापट्टनम नगर निगम)
परियोजना डेवलपरविजाग हाइपरस्केल डेटा सेंटर पार्क लिमिटेड (अडानी इंफ्रा का SPV)
मुख्य विवाद512 MW क्षमता वाले डेटा सेंटर के लिए 10 जून 2026 को जारी पर्यावरण क्लीयरेंस की वैधता को चुनौती।
मुख्य कानूनी आधार1. कंबलाकोंडा वन्यजीव अभयारण्य और इको-सेंसिटिव जोन की निकटता।
2. मुदसर्लोवा पेयजल जलाशय (Mudasarlova Reservoir) और प्राकृतिक धाराओं को खतरा।
3. श्रेणी B2 (Category B2) के रूप में गलत वर्गीकरण।
अगली सुनवाई तिथि26 अक्टूबर 2026
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