क्यों पड़ा नीति में बदलाव की जरूरत? (न्यायिक आदेश)
- बंबई हाईकोर्ट का कड़ा रुख:पिछले वर्ष बंबई उच्च न्यायालय ने SRA से सवाल किया था कि केवल इसलिए कि किसी आस-पास की जमीन को झुग्गी घोषित किया गया है, किसी निजी संपत्ति को बिना मालिक को सुने स्लम अधिनियम के तहत स्लम कैसे घोषित किया जा सकता है?
- सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक निर्णय:सर्वोच्च न्यायालय ने भी बंबई हाईकोर्ट के फैसलों को सही ठहराते हुए व्यवस्था दी थी कि महाराष्ट्र स्लम अधिनियम के तहत निजी भूमि के मकान मालिक/भू-स्वामी को अपनी जमीन पर स्लम क्षेत्र के पुनर्विकास का पहला और प्राथमिकता अधिकार (Preferential Right) प्राप्त है।
नई प्रक्रिया और भू-स्वामियों के अधिकार
- पारदर्शिता और प्राकृतिक न्याय:SRA CEO महेंद्र कल्याणकर ने बताया कि प्राकृतिक न्याय (Natural Justice) और निष्पक्षता के सिद्धांतों के तहत यह अनिवार्य किया गया है कि धारा 3C के तहत घोषणा से पहले सार्वजनिक नोटिस के साथ-साथ व्यक्तिगत रूप से भू-स्वामियों को सूचित किया जाए।
- ‘डीम्ड’ (Deemed) प्रावधान खत्म:2022 की अधिसूचना के तहत 1 जनवरी 2011 तक के झोपड़ों वाली जमीनों को स्वतः ‘डीम्ड स्लम पुनर्वास क्षेत्र’ मान लिया जाता था। इस ऑटोमैटिक प्रावधान को अब पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है।
झोपड़पट्टीवासियों (Slumdwellers) के पुनर्वास के नियम
SRA ने इस अधिसूचना के साथ झोपड़पट्टीवासियों की पात्रता और शर्तों को भी पुनः स्पष्ट किया है:
- 1 जनवरी 2000 से पहले के निवासी: जिन निवासियों के पास 1 जनवरी 2000 से पहले की संरचनाएं/फ़ोटो पास हैं, वे मुफ्त पुनर्वास घर (Free Rehabilitation) के पात्र होंगे।
- 2000 से 1 जनवरी 2011 के बीच के निवासी: 1 जनवरी 2000 के बाद और 1 जनवरी 2011 तक बसे निवासियों को निर्धारित प्रीमियम (Premium Payment) का भुगतान करने के बाद पुनर्वास योजना में शामिल किया जाएगा।
मुंबई: महाराष्ट्र झोपड़पट्टी क्षेत्र (सुधार, समाशोधन और पुनर्विकास) अधिनियम, 1971 (Maharashtra Slum Areas Act, 1971) की धारा 3C (स्लम पुनर्वास क्षेत्र घोषित करने की शक्ति), धारा 4 (स्लम क्षेत्र की सामान्य घोषणा), प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत (Principles of Natural Justice – Audi Alteram Partem), तथा भारत के सर्वोच्च न्यायालय और बॉम्बे उच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित ‘भूस्वामी के वरीयता अधिकार’ (Preferential Right of Landowner to Redevelop) पर झोपड़पट्टी पुनर्वास प्राधिकरण (SRA, मुंबई) ने एक बड़ा नीतिगत और प्रक्रियात्मक बदलाव लागू किया है।
प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) महेंद्र कल्याणकर द्वारा जारी नई अधिसूचना के अनुसार, अब मुंबई में किसी भी निजी भूस्वामी की जमीन को धारा 3C के तहत ‘स्लम’ या ‘स्लम पुनर्वास क्षेत्र’ अधिसूचित करने से पूर्व संबंधित भूस्वामी को औपचारिक लिखित नोटिस और सार्वजनिक नोटिस जारी करना अनिवार्य होगा।
भूस्वामियों को अपनी आपत्तियां और सुझाव दर्ज कराने के लिए 30 दिनों की समय-सीमा दी जाएगी और इस अवधि के दौरान उन्हें SRA के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के समक्ष व्यक्तिगत सुनवाई (Personal Hearing) का विधिक अवसर प्रदान किया जाएगा। इसके साथ ही, वर्ष 2022 में लागू की गई उस विवादित व्यवस्था को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है जिसके तहत 1 जनवरी 2011 तक बसी झुग्गियों वाली निजी भूमि को स्वतः ‘डीम्ड स्लम रिहैबिलिटेशन एरिया’ मान लिया जाता था।
SRA की नई अधिसूचना के मुख्य नीतिगत एवं विधिक बिंदु
1. ‘निजी भूस्वामियों को 30 दिन का अग्रिम नोटिस व व्यक्तिगत सुनवाई’
प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) महेंद्र कल्याणकर ने अधिसूचना में प्रशासनिक पारदर्शिता और निष्पक्षता पर जोर देते हुए दर्ज किया: “मुंबई में कई झुग्गियां निजी भूमि के साथ-साथ सार्वजनिक प्राधिकरणों की भूमि पर स्थित हैं। SRA ने अधिनियम की धारा 4 के तहत ऐसी कई झुग्गियों को स्लम क्षेत्र घोषित किया है। भूमि स्वामित्व वाले प्राधिकारियों और SRA ने झुग्गी संरचनाओं की जनगणना की है और संरक्षित संरचनाओं को फोटो पास जारी किए हैं। प्राकृतिक न्याय (Natural Justice), निष्पक्षता और पारदर्शिता के हित में यह अत्यंत आवश्यक माना गया है कि धारा 3C के तहत कोई भी घोषणा जारी करने से पहले निजी भूस्वामियों को विधिवत सूचित किया जाए और उनकी बात सुनी जाए।”
2. वर्ष 2022 के ‘डीम्ड स्लम’ (Deemed Slum) प्रावधान का अंत:
- वर्ष 2022 में SRA ने एक अधिसूचना जारी कर यह नियम बना दिया था कि 1 जनवरी 2011 तक अस्तित्व में आई झुग्गियों से घिरी किसी भी निजी जमीन को पुनर्वास योजनाओं के क्रियान्वयन हेतु धारा 3C के तहत स्वतः ‘डीम्ड स्लम रिहैबिलिटेशन एरिया’ माना जाएगा।
- इस नियम के कारण निजी भूस्वामियों को अपनी ही जमीन पर प्रस्तावित योजनाओं की जानकारी तक नहीं होती थी और बिल्डर/सोसायटियां एकतरफा योजनाएं बना लेती थीं।
- नई अधिसूचना ने इस ‘डीम्ड प्रावधान’ को पूरी तरह समाप्त कर दिया है। अब बिना कारण बताओ नोटिस और सुनवाई के किसी भी निजी जमीन पर स्लम का ठप्पा (Slum Tag) नहीं लगाया जा सकेगा।
3. बॉम्बे हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के न्यायिक आदेशों का अनुपालन:
- बॉम्बे हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी: पिछले वर्ष उच्च न्यायालय ने SRA से जवाब तलब किया था कि केवल इसलिए कि किसी निजी भूखंड के बगल वाली जमीन स्लम घोषित हो चुकी है, पूरी निजी जमीन को यांत्रिक रूप से स्लम पुनर्वास क्षेत्र कैसे घोषित किया जा सकता है?
- सुप्रीम कोर्ट की नजीर (भूस्वामी का पहला अधिकार): सर्वोच्च न्यायालय ने बॉम्बे हाईकोर्ट के उस सिद्धांत की पुष्टि की थी कि महाराष्ट्र स्लम अधिनियम के तहत यदि किसी भूमि को स्लम घोषित किया जाता है, तो कानून के तहत उस भूमि का पुनर्विकास (Redevelopment) करने का पहला और वरीयता अधिकार (Preferential Right) मूल भूस्वामी का होता है। यदि भूस्वामी विफल रहता है या इनकार करता है, केवल तभी झुग्गीवासियों की सहकारी समिति या SRA किसी तीसरे पक्ष (बिल्डर) को नियुक्त कर सकता है।
स्लम निवासियों के पुनर्वास की पात्रता श्रेणियां (Cut-off Dates)
अधिसूचना के साथ अधिकारियों ने झुग्गीवासियों के पुनर्वास की सांविधिक पात्रता शर्तों को भी पुनः स्पष्ट किया है:
| झुग्गी निर्माण की कट-ऑफ तिथि | विधिक पात्रता स्थिति | पुनर्वास का वित्तीय नियम |
| 1 जनवरी 2000 से पूर्व | संरक्षित संरचना (Protected / Eligible Structure) | योजना के तहत पूर्णतः निःशुल्क पुनर्वास (Free Rehabilitation) का कानूनी अधिकार; पक्का मकान बिना किसी निर्माण शुल्क के प्रदान किया जाएगा। |
| 1 जनवरी 2000 से 1 जनवरी 2011 के बीच | सशर्त पात्र संरचना (Eligible with Premium) | सरकार द्वारा निर्धारित प्रीमियम / विकास शुल्क (Payment of Premium) का भुगतान करने पर पुनर्वास हेतु पक्के फ्लैट के पात्र। |
| 1 जनवरी 2011 के बाद | अपात्र संरचना (Ineligible) | SRA योजना के तहत सामान्यतः पुनर्वास के लिए पात्र नहीं; अतिक्रमण हटाने के पात्र। |
प्रक्रियात्मक कालक्रम: पुरानी व्यवस्था बनाम नई एसआरए व्यवस्था
| चरण / मानक | पुरानी कार्यप्रणाली | नई अधिसूचित कार्यप्रणाली (2026) |
| सूचना का अधिकार | भूस्वामी को कोई व्यक्तिगत पूर्व सूचना नहीं दी जाती थी; केवल गजट में ‘डीम्ड’ घोषणा प्रकाशित होती थी। | भूस्वामी को लिखित नोटिस तामील किया जाएगा; साथ ही क्षेत्र में सार्वजनिक नोटिस (Public Notice) जारी होगा। |
| आपत्ति का समय | कोई औपचारिक आपत्ति दर्ज कराने की व्यवस्था नहीं थी। | आपत्तियां और सुझाव दाखिल करने हेतु 30 दिनों की अनिवार्य समय-सीमा। |
| सुनवाई का मंच | कोई व्यक्तिगत सुनवाई उपलब्ध नहीं थी। | SRA के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के समक्ष व्यक्तिगत सुनवाई का अनिवार्य अवसर। |
| पुनर्विकास का विकल्प | भूस्वामी को योजना की जानकारी न होने से वह विकास के अधिकार से वंचित हो जाता था। | भूस्वामी को यह तय करने का अवसर मिलेगा कि क्या वह स्वयं स्लम का पुनर्विकास करना चाहता है। |
विधिक एवं सांविधिक विश्लेषण: क्या कहता है कानून?
- संविधान का अनुच्छेद 300A (संपत्ति का संवैधानिक अधिकार):
- यद्यपि संपत्ति का अधिकार अब मौलिक अधिकार नहीं है, किंतु यह एक महत्वपूर्ण संवैधानिक एवं मानवाधिकार (Human and Constitutional Right) है।
- किसी भी नागरिक को “कानून के प्राधिकार” (Authority of Law) और निष्पक्ष प्रक्रिया के बिना उसकी संपत्ति के उपयोग या विकास के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता। निजी जमीन को उसकी जानकारी के बिना स्लम अधिसूचित करना अनुच्छेद 300A और अनुच्छेद 14 का उल्लंघन था।
- प्राकृतिक न्याय का सिद्धांत (Audi Alteram Partem):
- प्रशासनिक कानून का यह सुस्थापित नियम है कि जब भी किसी प्रशासनिक आदेश से किसी व्यक्ति के नागरिक या संपत्ति अधिकार प्रतिकूल रूप से प्रभावित होते हैं, तो उसे सुने जाने का युक्तियुक्त अवसर (Reasonable Opportunity of being heard) मिलना ही चाहिए।
- भूस्वामी का वरीयता अधिकार (Doctrine of First Refusal):
- स्लम कानून का प्राथमिक उद्देश्य झुग्गीवासियों को पक्के मकान देना है, न कि निजी भूस्वामियों की जमीनें जबरन निजी बिल्डरों को सौंपना।
- जब तक मूल भूस्वामी को यह मौका न दिया जाए कि वह कानून के दायरे में रहकर स्लम निवासियों का पुनर्वास स्वयं कराने को तैयार है या नहीं, तब तक तीसरे पक्ष को जमीन का पुनर्विकास सौंपना कानूनन त्रुटिपूर्ण माना गया है।
विधिक विवरण
- नियामक प्राधिकारी: झोपड़पट्टी पुनर्वास प्राधिकरण (Slum Rehabilitation Authority – SRA, मुंबई)
- अधिसूचना जारीकर्ता: महेंद्र कल्याणकर (मुख्य कार्यकारी अधिकारी, SRA)
- अधिसूचना की तिथि: अक्टूबर 2026
- संबद्ध अधिकार क्षेत्र: बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) एवं मुंबई उपनगरीय क्षेत्र
- प्रासंगिक कानून एवं विधिक प्रावधान:
- महाराष्ट्र झोपड़पट्टी क्षेत्र (सुधार, समाशोधन और पुनर्विकास) अधिनियम, 1971 — धारा 3C (स्लम पुनर्वास क्षेत्र की घोषणा), धारा 4 (स्लम क्षेत्र की घोषणा) एवं धारा 13 (पुनर्विकास में भूस्वामी का अधिकार)
- भारत का संविधान — अनुच्छेद 14 (कानून के समक्ष समानता व निष्पक्षता), अनुच्छेद 21 (आवास व गरिमापूर्ण जीवन का अधिकार) एवं अनुच्छेद 300A (संपत्ति से वंचित न किए जाने का अधिकार)
- संबद्ध न्यायिक नजीरें:
- बॉम्बे उच्च न्यायालय रिट निर्णय (2025) — ‘आसपास के भूखंडों के आधार पर निजी भूमि को यांत्रिक रूप से स्लम घोषित नहीं किया जा सकता; भूस्वामी को सुनवाई का अवसर अनिवार्य है।’
- सर्वोच्च न्यायालय की सुस्थापित व्यवस्था — ‘महाराष्ट्र स्लम अधिनियम के तहत स्लम क्षेत्र के पुनर्विकास में भूमि के मूल स्वामी को पहला और वरीयता अधिकार प्राप्त है।’
- अंतिम परिणाम: SRA ने ‘डीम्ड स्लम’ का एकतरफा नियम समाप्त किया; अब किसी भी निजी भूमि को स्लम पुनर्वास क्षेत्र घोषित करने से पहले 30 दिन का सार्वजनिक व लिखित नोटिस देना, आपत्तियां आमंत्रित करना और SRA CEO के समक्ष व्यक्तिगत सुनवाई देना अनिवार्य कर दिया गया है।
Mumbai Slum: मामले का संक्षिप्त विवरण (At A Glance)
| विवरण | जानकारी |
| संबंधित संस्था | झोपड़पट्टी पुनर्वसन प्राधिकरण (SRA), मुंबई |
| संबंधित कानून | महाराष्ट्र स्लम एरिया (सुधार, समाशोधन और पुनर्विकास) अधिनियम की धारा 3C एवं धारा 4 |
| मुख्य बदलाव | निजी भूमि को स्लम घोषित करने से पहले मालिक को 30 दिन का नोटिस और SRA CEO के सामने व्यक्तिगत सुनवाई। |
| न्यायिक पृष्ठभूमि | बंबई हाईकोर्ट एवं सुप्रीम कोर्ट के फैसले, जिनमें भू-स्वामियों को पुनर्विकास में प्राथमिकता अधिकार (Preferential Right) देने पर जोर दिया गया था। |
| पुनर्वास की पात्रता | 1 जनवरी 2000 तक के झोपड़े: मुफ्त पुनर्विकास। 1 जनवरी 2000 से 1 जनवरी 2011: प्रीमियम भुगतान पर पुनर्विकास। |

