मामले की पृष्ठभूमि और शिकायतकर्ता का आरोप
- सब्सक्रिप्शन की शर्तें:पेशे से वकील शिकायतकर्ता कोंढोबा राजेश ने 11 मई 2025 को ₹1,499 रुपये का भुगतान कर 1 साल के लिए अमेज़न प्राइम की वार्षिक सदस्यता खरीदी थी। सदस्यता की शर्तों के अनुसार, उन्हें एक साल तक मोबाइल, टीवी और लैपटॉप पर विज्ञापन-मुक्त (Ad-free) कंटेंट देखने की गारंटी दी गई थी।
- अचानक विज्ञापनों की शुरुआत:सदस्यता के दौरान ही 17 जून 2025 से प्राइम वीडियो पर अचानक विज्ञापन आने शुरू हो गए। जब ग्राहक ने इस पर आपत्ति जताई, तो प्लेटफॉर्म ने विज्ञापन-मुक्त सेवा जारी रखने के लिए ₹699 रुपये का अतिरिक्त शुल्क मांगा। ग्राहक सेवा से संपर्क करने और पूरा रिफंड या मूल एड-फ्री सेवा बहाल करने का अनुरोध करने पर अमेज़न ने इनकार कर दिया और केवल आनुपातिक (Proportionate) रिफंड देने की बात कही।
- उपभोक्ता आयोग का रुख:अमेज़न आयोग के समक्ष पेश नहीं हुआ और न ही उसने कोई लिखित जवाब दाखिल किया, जिसके कारण आयोग ने उसके जवाब का अधिकार समाप्त (Forfeited) कर दिया और एकतरफा सुनवाई की।
हैदराबाद: उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 (Consumer Protection Act, 2019) की धारा 2(11) (सेवा में कमी / Deficiency in Service), धारा 2(47) (अनुचित व्यापार व्यवहार / Unfair Trade Practice – पूर्व में दिए गए वादों और सुविधाओं में एकतरफा व हानिकारक बदलाव), संविदात्मक दायित्व (Contractual Obligations in Digital OTT Subscriptions), तथा सदस्यता अवधि के बीच में मनमाने ढंग से अतिरिक्त शुल्क (Extra Paywall) थोपने पर जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग-I, हैदराबाद (तेलंगाना) ने एक ऐतिहासिक उपभोक्ता हितैषी निर्णय सुनाया है।
आयोग की अध्यक्ष बी. उमा वेंकट सुब्बा लक्ष्मी तथा सदस्य सी. लक्ष्मी प्रसन्ना और बी. राजी रेड्डी की पीठ ने व्यक्तिगत रूप से उपस्थित अधिवक्ता कोंधोबा राजेश द्वारा दायर परिवाद को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए ओटीटी दिग्गज अमेज़न प्राइम वीडियो (Amazon Prime Video) को गंभीर रूप से उत्तरदायी ठहराया।
आयोग ने 1 अक्टूबर 2026 के अपने आदेश में कहा कि जब उपभोक्ता ने ₹1,499 देकर एक वर्ष के लिए निर्बाध और विज्ञापन-मुक्त (Ad-free) स्ट्रीमिंग का वार्षिक प्लान खरीदा था, तो सदस्यता के सक्रिय रहते हुए बीच में अचानक विज्ञापन थोपना और विज्ञापन हटाने के लिए अलग से ₹699 की अतिरिक्त मांग करना उपभोक्ता के साथ सीधा धोखा है। आयोग ने अमेज़न को पूरा सब्सक्रिप्शन शुल्क वापस करने, ₹5,000 मुआवजा और ₹3,000 वाद व्यय (कुल ₹9,499) 45 दिनों के भीतर चुकाने का आदेश दिया।
उपभोक्ता आयोग के मुख्य न्यायिक निष्कर्ष एवं विधिक व्यवस्था
1. ‘सक्रिय सब्सक्रिप्शन के बीच में विज्ञापन थोपना अनुचित व्यापार व्यवहार’
आयोग ने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के प्रावधानों का विश्लेषण करते हुए दो-टूक शब्दों में दर्ज किया: “भुगतान किए गए सब्सक्रिप्शन की सुनिश्चित विज्ञापन-मुक्त (Assured Ad-free) अवधि के दौरान एकतरफा विज्ञापन शुरू करना और उस विज्ञापन-मुक्त सुविधा को जारी रखने के लिए ₹699/- की अतिरिक्त राशि की मांग करना स्पष्ट रूप से ‘सेवा में कमी’ (Deficiency in Service) और ‘अनुचित व्यापार व्यवहार’ (Unfair Trade Practice) है।”
2. संविदा के नियमों में एकतरफा बदलाव की विधिक अस्वीकार्यता:
- आयोग ने रेखांकित किया कि जब उपभोक्ता ने 11 मई 2025 को ₹1,499 का भुगतान किया था, तब अनुबंध का मुख्य आधार यही था कि उसे टीवी, मोबाइल और लैपटॉप पर 1 वर्ष तक बिना किसी विज्ञापन के सामग्री देखने को मिलेगी।
- कंपनी ने यह नीतिगत बदलाव 17 जून 2025 को किया—यानी जब वार्षिक सदस्यता सक्रिय थी। यह कोई नवीनीकरण (Renewal) का समय नहीं था।
- अमेज़न आयोग के समक्ष यह सिद्ध करने में पूरी तरह विफल रहा कि खरीदारी के समय उपभोक्ता को यह स्पष्ट रूप से सूचित किया गया था कि वैध सदस्यता अवधि के दौरान ऐड-फ्री सुविधा कभी भी वापस ली जा सकती है या इसके लिए अलग से शुल्क मांगा जाएगा।
3. नोटिस के बावजूद अमेज़न की अनुपस्थिति और एकतरफा निर्णय:
- अमेज़न ने आयोग के नोटिस के बावजूद न तो कोई लिखित उत्तर (Written Version) प्रस्तुत किया और न ही कोई प्रतिनिधि उपस्थित किया, जिसके कारण कंपनी का लिखित उत्तर दाखिल करने का विधिक अधिकार जब्त (Forfeited) कर लिया गया।
- उपभोक्ता द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य हलफनामा, इनवॉइस, ईमेल संवाद और स्क्रीनशॉट्स असंदिग्ध व अकाट्य साबित हुए, जिनके आधार पर आयोग ने निर्णय पारित किया।
मामले की तथ्यात्मक पृष्ठभूमि एवं प्रक्रियात्मक कालक्रम
| विवरण / चरण | तथ्यात्मक स्थिति एवं उपभोक्ता की दलीलें |
| परिवादी (उपभोक्ता) | कोंधोबा राजेश (अधिवक्ता, जिन्होंने व्यक्तिगत रूप से स्वयं पैरवी की)। |
| प्राइम खरीद (11 मई 2025) | परिवादी ने ₹1,499 का वार्षिक भुगतान कर एक वर्ष की अमेज़न प्राइम सदस्यता ली, जिसके तहत प्राइम वीडियो पर बिना विज्ञापन स्ट्रीमिंग का स्पष्ट आश्वासन था। |
| एकतरफा फेरबदल (17 जून 2025) | खरीद के मात्र एक माह बाद, अमेज़न ने भारत में प्राइम वीडियो पर विज्ञापन दिखाना शुरू कर दिया और ऐड-मुक्त स्ट्रीमिंग के लिए ₹699 प्रति वर्ष का अतिरिक्त ‘ऐड-ऑन’ शुल्क मांगना शुरू कर दिया। |
| शिकायत व अमेज़न का रुख | परिवादी ने अमेज़न सपोर्ट से संपर्क कर मूल स्थिति बहाल करने या पूरा ₹1,499 लौटाने की मांग की। अमेज़न ने दोनों मांगें ठुकरा दीं और केवल कुछ महीनों का आनुपातिक (Pro-rata) रिफंड देने की बात कही। |
| अदालत का निर्णय (01.10.2026) | हैदराबाद जिला उपभोक्ता आयोग-I ने परिवाद को आंशिक रूप से स्वीकार किया और अमेज़न को 45 दिनों में भुगतान का आदेश दिया। |
उपभोक्ता आयोग द्वारा निर्धारित कुल राहत (Total Payout Breakdown)
आयोग ने परिवादी के पक्ष में कुल ₹9,499 का भुगतान करने का आदेश पारित किया है:
| क्रमांक | राहत की मद (Head of Relief) | आयोग द्वारा स्वीकृत राशि |
| 1. | मूल वार्षिक सब्सक्रिप्शन राशि की पूर्ण वापसी (Full Subscription Refund) | ₹1,499/- |
| 2. | मानसिक प्रताड़ना, असुविधा और उत्पीड़न हेतु मुआवजा (Compensation) | ₹5,000/- |
| 3. | अदालती व वाद व्यय (Litigation Costs) | ₹3,000/- |
| कुल देय राशि | (45 दिनों के भीतर अनिवार्य रूप से देय) | ₹9,499/- |
यदि अमेज़न 45 दिनों के भीतर इस राशि का भुगतान करने में विफल रहता है, तो उपभोक्ता उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की धारा 71 और 72 के तहत निष्पादन कार्यवाही (Execution Proceedings) और दंडात्मक प्रावधानों का सहारा ले सकता है।
विधिक एवं डिजिटल उपभोक्ता न्यायशास्त्र: क्या कहता है कानून?
- ‘बैट एंड स्विच’ (Bait-and-Switch) रणनीति पर रोक:
- डिजिटल प्लेटफॉर्म अक्सर उपभोक्ताओं को कुछ प्रीमियम फीचर्स (जैसे ऐड-फ्री, 4K/डॉल्बी विजन आदि) का लालच देकर वार्षिक अग्रिम शुल्क ले लेते हैं। बाद में उसी फीचर को अलग से सशुल्क बनाकर सामान्य ग्राहकों पर विज्ञापन थोपना ‘बैट एंड स्विच’ रणनीति है, जिसे उपभोक्ता संरक्षण कानून में कड़ाई से प्रतिबंधित किया गया है।
- नवीनीकरण बनाम चालू संविदा में अंतर:
- यदि कोई कंपनी सदस्यता समाप्त होने के बाद, यानी अगले वर्ष के नवीनीकरण पर नई दरें या विज्ञापनों की शर्त लगाती है, तो उपभोक्ता के पास यह विकल्प होता है कि वह सेवा ले या न ले।
- किंतु पहले से लिए जा चुके वार्षिक पैसे के बीच में संविदा की प्रकृति को ग्राहक की सहमति के बिना एकतरफा रूप से बदल देना संविदा अधिनियम, 1872 और उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 दोनों के तहत गैर-कानूनी है।
- डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की मनमानी पर संदेश:
- यह फैसला भारत भर के उन लाखों ओटीटी और टेक उपभोक्ताओं के लिए एक नजीर है जो नेटफ्लिक्स, अमेज़न, यूट्यूब या हॉटस्टार जैसे मंचों द्वारा अपनी नीतियों में किए जाने वाले एकतरफा बदलावों के शिकार होते हैं।
विधिक विवरण
- केस संदर्भ: कोंधोबा राजेश बनाम अमेज़न सेलर सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड [उपभोक्ता परिवाद – जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग-I, हैदराबाद, तेलंगाना]
- पीठ: बी. उमा वेंकट सुब्बा लक्ष्मी (अध्यक्ष), सी. लक्ष्मी प्रसन्ना (महिला सदस्य) एवं बी. राजी रेड्डी (सदस्य)
- आदेश की तिथि: 1 अक्टूबर 2026
- अनुपालन समय-सीमा: 45 दिन
पक्षकारों की विधिक स्थिति:
- परिवादी: कोंधोबा राजेश (अधिवक्ता, व्यक्तिगत रूप से उपस्थित / In-Person)
- विपरीत पक्षकार (OP): अमेज़न सेलर सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड (प्राइम वीडियो डिवीजन)
- प्रासंगिक कानून एवं सांविधिक प्रावधान:
- उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 — धारा 2(11) (सेवा में कमी), धारा 2(47) (अनुचित व्यापार व्यवहार), धारा 35 (परिवाद) एवं धारा 39 (आयोग के आदेश)
- भारतीय संविदा अधिनियम, 1872 — धारा 37 (संविदा का निष्पादन) एवं धारा 73 (संविदा भंग के लिए हर्जाना)
- संबद्ध न्यायिक सिद्धांत:
- डिजिटल संविदाओं में एकतरफा परिवर्तन का निषेध: ‘ओटीटी प्लेटफॉर्म वार्षिक सदस्यता शुल्क लेने के बाद सक्रिय अवधि के दौरान उपभोक्ता की सहमति के बिना ऐड-फ्री स्ट्रीमिंग को बंद करके विज्ञापन नहीं थोप सकते और न ही मूल सेवा बहाल रखने हेतु अतिरिक्त राशि मांग सकते हैं; ऐसा आचरण उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार का स्पष्ट उदाहरण है।’
- अंतिम परिणाम: परिवाद आंशिक रूप से स्वीकार; अमेज़न को पूरा सब्सक्रिप्शन शुल्क ₹1,499 वापस करने, ₹5,000 मानसिक मुआवजा देने और ₹3,000 कानूनी खर्च वहन करने (कुल ₹9,499) का आदेश जारी।
Amazon Prime Video: मामले का संक्षिप्त विवरण (At A Glance)
| विवरण | जानकारी |
| संबंधित आयोग | जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग-I, हैदराबाद (तेलंगाना) |
| शिकायतकर्ता | कोंढोबा राजेश (Kondhoba Rajesh), अधिवक्ता |
| प्रतिवादी संस्था | अमेज़न सेलर सर्विसेज / अमेज़न प्राइम वीडियो |
| संबंधित विवाद | ₹1,499 में 1 साल की प्राइम मेंबरशिप लेने के बावजूद बीच में ही विज्ञापन शुरू करना और विज्ञापन बंद करने के लिए ₹699 अतिरिक्त मांगना। |
| कानूनी निष्कर्ष | ग्राहकों से पूरा भुगतान लेने के बाद प्लान की शर्तों में एकतरफा बदलाव करना ‘सेवा में कमी’ और ‘अनुचित व्यापार प्रथा’ है। |
| कुल देय राशि | ₹9,499 रुपये (45 दिनों के भीतर भुगतान करने का आदेश)। |

