FOLLOW US FOR MORE LEGAL UPDATES ON WhatsApp
मामले की पृष्ठभूमि और याचिकाकर्ता के तर्क
- पंजीकरण स्थान के आधार पर भेदभाव का आरोप:याचिकाकर्ता एडवोकेट गुरमुख दास कोहली के पास हरियाणा में पंजीकृत BS-IV पेट्रोल (Volkswagen Polo) कार है। उन्होंने तर्क दिया कि यह अधिसूचना वास्तविक उत्सर्जन (Actual Emission) के स्थान पर वाहन के पंजीकरण स्थान (Place of Registration) के आधार पर अनुचित भेदभाव करती है। दिल्ली में पंजीकृत समान BS-IV वाहनों को शहर के भीतर चलाने की छूट है, जबकि एनसीआर (NCR) के अन्य राज्यों के वाहनों पर रोक लगा दी गई है।
- GRAP और AQI के सिद्धांतों के विपरीत:याचिका में तर्क दिया गया कि दैनिक वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) की परवाह किए बिना तीन महीने की पूर्ण अवधि के लिए लगाया गया यह प्रतिबंध अत्यधिक कठोर है। यह वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) के संशोधित ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के सिद्धांतों के असंगत है, जो प्रदूषण के स्तर के आधार पर चरणबद्ध प्रतिबंधों का प्रावधान करता है।
- संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन:याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि दिल्ली सरकार का यह मनमाना आदेश संविधान के अनुच्छेद 14 (समता का अधिकार), अनुच्छेद 19(1)(d) (अबाध आवागमन का अधिकार) और अनुच्छेद 19(1)(g) (व्यापार या आजीविका का अधिकार) का सीधा उल्लंघन करता है। इससे एनसीआर में रहने वाले वकीलों, मुकदमों के पक्षकारों और आम नागरिकों की दैनिक आवाजाही प्रभावित हो रही है।
मुख्य विधिक व प्रशासनिक पहलू
1. पर्यावरण बनाम आवागमन का अधिकार:
दिल्ली सरकार ने सर्दियों में वायु गुणवत्ता (AQI) के अत्यधिक बिगड़ने की रोकथाम के लिए यह नीतिगत फैसला लिया है। हालांकि, एनसीआर (हरियाणा, यूपी) से आने-जाने वाले नागरिकों के लिए इसे मनमाना कदम बताते हुए चुनौती दी गई है।
2. अंतरिम स्थिति:
हाईकोर्ट द्वारा रोक लगाने से इनकार किए जाने के कारण 1 नवंबर से लागू प्रतिबंध फिलहाल प्रभावी रहेंगे और गैर-दिल्ली पंजीकृत BS-VI से नीचे के वाहनों को दिल्ली सीमा में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी।
नई दिल्ली: भारत का संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार—पंजीकरण के भौगोलिक स्थान बनाम वास्तविक उत्सर्जन के आधार पर वर्गीकरण), अनुच्छेद 19(1)(d) व 19(1)(g) (भारत के राज्यक्षेत्र में सर्वत्र अबाध संचरण व व्यापार/आजीविका का अधिकार), पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 (Environment Protection Act, 1986) के तहत जारी कार्यकारी अधिसूचनाओं की वैधानिक सीमाएं, तथा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र एवं समीपवर्ती क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) द्वारा अधिसूचित ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के साथ राज्य सरकार के आदेशों के टकराव पर दिल्ली हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण सुनवाई की है।
दिल्ली हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश (Acting Chief Justice) नितिन वासुदेव साम्ब्रे (Justice Nitin Wasudeo Sambre) और न्यायमूर्ति संजय शर्मा (Justice Sanjay Sharma) की खंडपीठ ने दिल्ली सरकार के पर्यावरण एवं वन विभाग द्वारा 23 जून 2026 को जारी अधिसूचना के तहत गैर-दिल्ली और BS-VI से नीचे के वाहनों के दिल्ली में प्रवेश पर लगाए गए तीन महीने के शीतकालीन प्रतिबंध पर अंतरिम रोक (Interim Stay) लगाने से साफ इनकार कर दिया।
अदालत ने फरीदाबाद के एक अधिवक्ता द्वारा दायर रिट याचिका पर तत्काल राहत देने से मना करते हुए मामले की अगली विस्तृत सुनवाई 27 नवंबर 2026 को तय की है, जिस दिन इसी विषय पर लंबित एक अन्य समान याचिका भी खंडपीठ के समक्ष सूचीबद्ध है।
उच्च न्यायालय के मुख्य कानूनी बिंदु एवं प्रक्रियात्मक रुख
1. अंतरिम रोक लगाने से इनकार; अगली सुनवाई 27 नवंबर को:
- कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नितिन वासुदेव साम्ब्रे और न्यायमूर्ति संजय शर्मा की खंडपीठ ने दिल्ली सरकार की अधिसूचना के पैरा 4 पर तुरंत कोई स्थगन आदेश देने से परहेज किया।
- खंडपीठ ने रेखांकित किया कि सर्दियों के दौरान दिल्ली में वायु प्रदूषण एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट बन जाता है, और चूंकि 27 नवंबर को इसी तरह का एक अन्य मामला पहले से सुनवाई के लिए आ रहा है, इसलिए दोनों मामलों को एक साथ विस्तार से सुनकर ही कोई अंतरिम या अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
2. याचिकाकर्ता के मुख्य संवैधानिक व विधिक आक्षेप:
- पंजीकरण के स्थान पर मनमाना भेदभाव (अनुच्छेद 14):
- याचिकाकर्ता गुरमुख दास कोहली (जो हरियाणा में पंजीकृत BS-IV पेट्रोल वोक्सवैगन पोलो कार के स्वामी हैं) ने दलील दी कि आक्षेपित अधिसूचना वाहनों के वास्तविक प्रदूषण स्तर या उत्सर्जन क्षमता के बजाय केवल उनके ‘पंजीकरण के स्थान’ (Place of Registration) के आधार पर मनमाना भेदभाव करती है।
- दलील दी गई कि यदि कोई BS-IV पेट्रोल वाहन दिल्ली में पंजीकृत है, तो वह सड़कों पर चल सकता है; किंतु वही समान उत्सर्जन वाला BS-IV वाहन यदि हरियाणा, उत्तर प्रदेश या अन्य राज्य में पंजीकृत है, तो उसके दिल्ली में प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध है। यह वर्गीकरण कृत्रिम और अतार्किक है।
- CAQM के GRAP प्रावधानों से असंगति:
- याचिका में यह गंभीर विधिक बिंदु उठाया गया है कि वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) द्वारा अधिसूचित ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) एक वैज्ञानिक तंत्र है, जिसमें प्रदूषण के दैनिक स्तर (AQI) के अनुसार चरणबद्ध (Staged Restrictions – Stage I to IV) पाबंदियां लगाई जाती हैं।
- इसके विपरीत, दिल्ली सरकार ने 1 नवंबर से 31 जनवरी तक (पूरे तीन महीने) एकमुश्त और व्यापक (Blanket Three-Month Restriction) प्रतिबंध लगा दिया है, जो दैनिक वायु गुणवत्ता की स्थिति की पूरी तरह अनदेखी करता है और CAQM के केंद्रीय नियमों से टकराता है।
- मौलिक अधिकारों का हनन (अनुच्छेद 19):
- याचिकाकर्ता ने कहा कि वह फरीदाबाद में रहते हैं और दिल्ली उच्च न्यायालय व अन्य अदालतों में वकालत करते हैं। वाहनों पर इस प्रकार के प्रतिबंध से उनके आने-जाने की स्वतंत्रता (अनुच्छेद 19(1)(d)) और विधि व्यवसाय करने के अधिकार (अनुच्छेद 19(1)(g)) पर अनुचित और असंगत प्रतिबंध लगता है।
मामले की तथ्यात्मक पृष्ठभूमि एवं प्रक्रियात्मक कालक्रम (2026)
| संदर्भ / विवरण | तथ्यात्मक स्थिति एवं पक्षों के दावे |
| याचिकाकर्ता | गुरमुख दास कोहली (Gurmukh Dass Kohli) — फरीदाबाद (हरियाणा) स्थित अधिवक्ता। |
| प्रतिवादी पक्ष | राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार (GNCTD) एवं अन्य। |
| आक्षेपित अधिसूचना | दिल्ली सरकार के पर्यावरण एवं वन विभाग द्वारा 23 जून 2026 को पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम के तहत जारी आधिकारिक अधिसूचना का पैरा 4। |
| विवादित नियम का प्रावधान | प्रत्येक वर्ष 1 नवंबर से 31 जनवरी तक राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली के बाहर पंजीकृत और भारत स्टेज-VI (BS-VI) मानकों से नीचे के सभी प्रकार के वाहनों के दिल्ली में प्रवेश और संचालन पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। |
| याचिकाकर्ता का वाहन | हरियाणा में पंजीकृत BS-IV पेट्रोल वोक्सवैगन पोलो (Volkswagen Polo) कार। |
| याचिकाकर्ता के मुख्य विधिक तर्क | 1. भौगोलिक भेदभाव: समान उत्सर्जन मानक (BS-IV पेट्रोल) होने के बावजूद दिल्ली की गाड़ियों को अनुमति और एनसीआर/बाहरी गाड़ियों पर रोक अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है। 2. GRAP का उल्लंघन: CAQM का संशोधित GRAP ढांचा वायु गुणवत्ता के आधार पर गतिशील प्रतिबंध लगाता है, जबकि दिल्ली सरकार का नियम बिना AQI देखे 90 दिनों का अंधाधुंध प्रतिबंध लगाता है। 3. संचरण की स्वतंत्रता: एनसीआर के लाखों नागरिकों और वकीलों के दिल्ली में आवागमन और आजीविका के अधिकार पर आघात। |
| दिल्ली सरकार का प्रतिनिधित्व | दिल्ली सरकार की ओर से स्टैंडिंग काउंसिल समीर वशिष्ठ (Sameer Vashisht) पेश हुए। |
| अदालत का अंतरिम आदेश | अधिसूचना पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार; मामले को 27 नवंबर 2026 के लिए समान याचिकाओं के साथ सूचीबद्ध किया गया। |
विधिक एवं प्रशासनिक विश्लेषण: ‘पर्यावरण बनाम अंतर-राज्यीय आवागमन’
- अनुच्छेद 21 बनाम अनुच्छेद 19 का संतुलन:
- सर्वोच्च न्यायालय ने एम.सी. मेहता और सुभाष कुमार के ऐतिहासिक मामलों में बार-बार स्पष्ट किया है कि नागरिकों के स्वच्छ पर्यावरण और प्रदूषण-मुक्त हवा में सांस लेने का अधिकार (अनुच्छेद 21) किसी व्यक्ति की निजी वाहन चलाने की सुविधा पर वरीयता रखता है।
- दिल्ली में सर्दियों के दौरान तापमान में गिरावट और पराली/स्थानीय कारकों से ‘विंटर स्मॉग’ (Winter Smog) की विकट स्थिति बनती है, जिसे नियंत्रित करने के लिए आपातकालीन प्रशासनिक उपाय किए जाते हैं। यही कारण है कि उच्च न्यायालय ने प्रथम दृष्टया प्रतिबंध पर रोक लगाकर कोई पर्यावरणीय जोखिम लेने से संकोच किया।
- पंजीकरण के आधार पर वर्गीकरण की विधिक वैधता (The Legal Conundrum):
- यद्यपि पर्यावरण संरक्षण सर्वोपरि है, किंतु याचिकाकर्ता द्वारा उठाया गया कानूनी बिंदु संवैधानिक दृष्टि से अत्यधिक विचारणीय है।
- यदि उत्सर्जन का स्रोत वाहन का इंजन और उसका BS मानक (BS-IV) है, तो प्रदूषण का प्रभाव वैज्ञानिक रूप से वही रहेगा, चाहे नंबर प्लेट पर ‘DL’ लिखा हो या ‘HR’। संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत किसी भी वर्गीकरण का उस उद्देश्य (प्रदूषण नियंत्रण) से सीधा और सुसंगत संबंध (Rational Nexus) होना चाहिए। क्या दिल्ली की BS-IV गाड़ियों को छूट देकर बाहरी BS-IV गाड़ियों को रोकना वैध वर्गीकरण माना जा सकता है, इस पर उच्च न्यायालय 27 नवंबर को सरकार से जवाब तलब करेगा।
- CAQM अधिनियम, 2021 की सर्वोच्चता:
- संसद ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और समीपवर्ती क्षेत्रों के लिए विशेष रूप से CAQM का गठन किया है ताकि प्रदूषण नियंत्रण में अंतर-राज्यीय समन्वय बना रहे।
- GRAP के नियमों के तहत BS-III पेट्रोल और BS-IV डीजल वाहनों पर पाबंदियां केवल तब लगती हैं जब वायु गुणवत्ता ‘गंभीर’ (Severe / Stage III-IV) श्रेणी में पहुंचती है। दिल्ली सरकार द्वारा GRAP के ट्रिगर स्तरों की प्रतीक्षा किए बिना 1 नवंबर से स्वतः 3 महीने का प्रतिबंध लगाना आयोग की शक्तियों के साथ कानूनी रूप से कितना सुसंगत है, यह अदालत की समीक्षा का मुख्य केंद्र होगा।
विधिक विवरण एवं संदर्भ
- न्यायालय: दिल्ली उच्च न्यायालय, नई दिल्ली (संवैधानिक रिट क्षेत्राधिकार)
- केस संदर्भ: गुरमुख दास कोहली बनाम राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार व अन्य [W.P.(C) … / 2026]
- पीठ: कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नितिन वासुदेव साम्ब्रे एवं न्यायमूर्ति संजय शर्मा (खंडपीठ)
- आदेश की तिथि: 2 नवंबर 2026
- कार्यवाही का स्वरूप: अंतरिम स्थगन से इनकार; अगली सुनवाई 27 नवंबर 2026।
विधिक प्रतिनिधित्व:
- याचिकाकर्ता की ओर से: अधिवक्ता अनुराग सक्सेना (Advocate Anurag Saxena), अधिवक्ता सोनिका घोष (Advocate Sonica Ghosh) एवं अधिवक्ता दीपक अत्रे (Advocate Deepak Atrey)।
- दिल्ली सरकार (GNCTD) की ओर से: स्टैंडिंग काउंसिल समीर वशिष्ठ (Standing Counsel Sameer Vashisht)।
- प्रासंगिक कानून एवं विधिक प्रावधान:
- भारत का संविधान — अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार), अनुच्छेद 19(1)(d) (अबाध संचरण), अनुच्छेद 19(1)(g) (आजीविका/व्यापार) एवं अनुच्छेद 21 (जीवन व स्वास्थ्य का अधिकार)
- पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 (Environment Protection Act, 1986) — धारा 3 व 5 के तहत जारी दिल्ली सरकार की अधिसूचना दिनांक 23.06.2026 (पैरा 4)
- राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र एवं समीपवर्ती क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग अधिनियम, 2021 (CAQM Act, 2021) — ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के प्रावधान
- संबद्ध न्यायिक सिद्धांत:
- शीतकालीन वाहन प्रतिबंध और विधिक समीक्षा का मानक: ‘सार्वजनिक स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कार्यकारी निर्णयों पर प्रथम दृष्टया रोक लगाने से अदालतें न्यायिक आत्मसंयम बरतती हैं; तथापि, जब किसी प्रतिबंध में वास्तविक उत्सर्जन के बजाय केवल पंजीकरण के भौगोलिक स्थान (Place of Registration) के आधार पर भेदभाव का आरोप हो और वह केंद्रीय वैधानिक संस्था (CAQM) के नियमों से टकराता हो, तो वह न्यायिक समीक्षा का एक गंभीर संवैधानिक प्रश्न खड़ा करता है; गुण-दोष के अंतिम परीक्षण तक अधिसूचना की वैधता प्रभावी रहेगी।’
- वर्तमान स्थिति व तात्कालिक प्रभाव: चूंकि दिल्ली उच्च न्यायालय ने रोक लगाने से इनकार कर दिया है, इसलिए दिल्ली सरकार की अधिसूचना के अनुसार 1 नवंबर 2026 से दिल्ली की सीमाओं पर गैर-दिल्ली और BS-VI से नीचे के वाहनों के प्रवेश पर लगी पाबंदी पूरी तरह लागू रहेगी; उल्लंघन करने वाले वाहनों पर मोटर वाहन अधिनियम और पर्यावरण कानूनों के तहत ₹20,000 तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा; मामले का अंतिम विधिक भविष्य 27 नवंबर 2026 की सुनवाई पर निर्भर करेगा।
Vehicle Entry:मामले का संक्षिप्त विवरण (At A Glance)
| विवरण | जानकारी |
| संबंधित अदालत | दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court), नई दिल्ली |
| पीठ | कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नितिन वासुदेव सांबरे एवं न्यायमूर्ति संजय शर्मा |
| मामला/साइटेशन | गुरमुख दास कोहली बनाम राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार व अन्य (Gurmukh Dass Kohli v. GNCTD & Ors.) |
| याचिकाकर्ता | गुरमुख दास कोहली (फरीदाबाद के वकील) | प्रतिनिधित्व: अधिवक्ता अनुराग सक्सेना, सोनिका घोष एवं दीपक अत्रे |
| प्रतिवादी पक्ष | दिल्ली सरकार (पर्यावरण एवं वन विभाग) | प्रतिनिधित्व: स्टैंडिंग काउंसिल समीर वशिष्ठ |
| चुनौतीपूर्ण अधिसूचना | पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम के तहत दिल्ली सरकार की 23 जून 2026 की अधिसूचना का पैरा 4, जो हर साल 1 नवंबर से 31 जनवरी तक दिल्ली के बाहर के BS-VI से नीचे के वाहनों पर प्रतिबंध लगाता है। |
| अदालत का अंतरिम निर्णय | कोई अंतरिम राहत नहीं: अधिसूचना पर रोक लगाने से इनकार; मामले की विस्तृत सुनवाई 27 नवंबर 2026 को होगी। |

