Tuesday, November 3, 2026
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Noise Pollution Rules: ध्वनि प्रदूषण नियमों के तहत अनुमति देते समय पुलिस शराब पर रोक नहीं लगा सकती; 2000 के नियमों में ऐसा कोई वैधानिक अधिकार नहीं

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मामले की पृष्ठभूमि और पक्षकारों के तर्क

  1. पुलिस की शर्त को चुनौती:30 सितंबर 2026 को लखनऊ के अपर पुलिस आयुक्त (कानून एवं व्यवस्था) ने 10 अक्टूबर 2026 को होने वाले ‘कसा बकार्डी’ लाइव म्यूजिक कंसर्ट के लिए 18 शर्तों के साथ अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) जारी किया था। इसमें शर्त संख्या 18 के तहत कार्यक्रम के दौरान शराब या किसी अन्य नशीले पदार्थ को परोसने व सेवन करने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया था।
  2. याचिकाकर्ता के तर्क:आयोजकों (अटलानी ब्रदर्स) ने हाईकोर्ट का रुख करते हुए दलील दी कि यह कार्यक्रम एक लिकर ब्रांड द्वारा प्रायोजित है और ध्वनि प्रदूषण नियमों के तहत दी जाने वाली अनुमति में पुलिस को शराब पर प्रतिबंध लगाने का कोई कानूनी अधिकार प्राप्त नहीं है।
  3. भेदभाव का आरोप (Article 14):याचिकाकर्ताओं ने अदालत के समक्ष यह तथ्य भी रखा कि जुलाई 2026 में लखनऊ में ही आयोजित ‘पापोन लाइव’ (Papon Live) संगीत कार्यक्रम के लिए जब पुलिस ने ध्वनि प्रदूषण की अनुमति दी थी, तब ऐसी कोई रोक नहीं लगाई गई थी। अतः याचिकाकर्ता के साथ किया गया यह रवैया भेदभावपूर्ण और असंवैधानिक है।

हाईकोर्ट के मुख्य विधिक निष्कर्ष

1. पुलिस ने अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन किया:

हाईकोर्ट ने पाया कि ध्वनि प्रदूषण नियम 2000 का उद्देश्य केवल ध्वनि के स्तर (Decibel Levels) और समय-सीमा को नियंत्रित करना है। आबकारी (Excise) या मादक पदार्थों की बिक्री का नियमन करना आबकारी अधिनियम और संबंधित लाइसेंसिंग प्राधिकरण के अधीन आता है, न कि ध्वनि NOC देने वाले पुलिस अधिकारी के अधिकार क्षेत्र में।

2. भेदभावपूर्ण कार्रवाई:

अदालत ने राज्य सरकार द्वारा अन्य समान संगीत आयोजनों में शराब की अनुमति देने और इस मामले में प्रतिबंध लगाने को संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन माना। इसके बाद उच्च न्यायालय ने पुलिस द्वारा लगाई गई शराब निषेध की शर्त को पूरी तरह से रद्द कर दिया।

प्रयागराज/लखनऊ: ध्वनि प्रदूषण (विनियमन एवं नियंत्रण) नियम, 2000 (Noise Pollution Rules, 2000) के नियम 5 (ध्वनि विस्तारक यंत्रों एवं संगीत समारोहों हेतु पूर्व अनुमति की शर्तें व विधिक परिधि), संयुक्त प्रांत आबकारी अधिनियम, 1910 (UP Excise Act, 1910) के तहत आबकारी विभाग के अनन्य विनियामक अधिकार, भारत का संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार—समान श्रेणी के आयोजनों के बीच मनमाना भेदभाव) एवं अनुच्छेद 19(1)(g) (व्यापार व व्यवसाय की स्वतंत्रता), तथा प्रशासनिक कानून में ‘क्षेत्राधिकार का अतिक्रमण’ (Ultra Vires / Exceeding Statutory Powers) के सिद्धांतों पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने एक अत्यंत स्पष्ट और नज़ीरी फैसला सुनाया है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ के न्यायमूर्ति आलोक माथुर (Justice Alok Mathur) और न्यायमूर्ति अवधेश कुमार चौधरी (Justice Abdhesh Kumar Chaudhary) की खंडपीठ ने लखनऊ के गोमती नगर में आयोजित ‘कासा बकार्डी’ (Casa Bacardi) प्रायोजित लाइव म्यूजिक कॉन्सर्ट में लखनऊ पुलिस आयुक्तालय द्वारा लगाई गई शराब परोसने व उपभोग करने संबंधी प्रतिबंधात्मक शर्त को निरस्त (Struck Down) कर दिया।

अदालत ने स्पष्ट व्यवस्था दी कि ध्वनि प्रदूषण नियम, 2000 के तहत संगीत कार्यक्रमों या लाउडस्पीकर के उपयोग की अनुमति देते समय पुलिस प्राधिकारियों के पास केवल ध्वनि के डेसिबल स्तर, समय और ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण से संबंधित शर्तें लगाने की विधिक शक्ति है। इन नियमों के तहत पुलिस को शराब या किसी अन्य मादक पदार्थ की बिक्री या सेवन पर रोक लगाने या अनुमति देने का कोई विधायी क्षेत्राधिकार (No Statutory Power or Scope) प्राप्त नहीं है। इसके अतिरिक्त, खंडपीठ ने पाया कि उसी वर्ष जुलाई में आयोजित एक अन्य लाइव कॉन्सर्ट में ऐसी कोई शर्त नहीं लगाई गई थी, जिससे याचिकाकर्ता के साथ स्पष्ट रूप से मनमाना और गैर-समानतावादी व्यवहार हुआ।

उच्च न्यायालय के मुख्य कानूनी निष्कर्ष एवं विधिक टिप्पणियां

1. ‘ध्वनि प्रदूषण नियम, 2000 में शराब के नियमन का कोई प्रावधान या दायरा नहीं’:

न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति अवधेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने ध्वनि प्रदूषण नियमों के विधायी ढांचे का विश्लेषण करते हुए अपने निर्णय में स्पष्ट रूप से दर्ज किया: “हम पाते हैं कि ध्वनि प्रदूषण (विनियमन एवं नियंत्रण) नियम, 2000 में शराब सहित नशीले/मादक उत्पादों (Intoxicating Products) को परोसने की अनुमति देने या उससे इनकार करने की शक्ति अथवा विधिक दायरे के संबंध में कोई प्रावधान नहीं है। पुलिस प्राधिकारी केवल ध्वनि स्तर (Sound Levels) और ध्वनि प्रदूषण के नियंत्रण से संबंधित विधिक शर्तें लगाने के लिए अधिकृत हैं। आबकारी पदार्थों या शराब के सेवन और बिक्री को विनियमित करने का अधिकार पुलिस को इन नियमों के तहत कदापि नहीं दिया गया है।”

2. ‘समान आयोजनों के बीच मनमाना और असंगत भेदभाव (अनुच्छेद 14)’:

  • खंडपीठ ने रेखांकित किया कि लखनऊ पुलिस ने जुलाई 2026 में आयोजित गायक पापोन के लाइव कॉन्सर्ट (Papon Live Concert) के लिए बिना शराब पर ऐसी कोई पाबंदी लगाए अनुमति प्रदान की थी:“रिकॉर्ड से यह स्पष्ट है कि याचिकाकर्ता के साथ भेदभाव किया गया है, क्योंकि उसी शहर में आयोजित अन्य संगीत समारोहों पर ऐसी कोई पाबंदी नहीं लगाई गई थी। एक ही प्रकार के आयोजनों के लिए अलग-अलग और मनमाने मानदंड अपनाना कानूनन टिकने योग्य नहीं है।”

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मामले की तथ्यात्मक पृष्ठभूमि एवं प्रक्रियात्मक कालक्रम (2026)

संदर्भ / विवरणतथ्यात्मक स्थिति एवं पक्षों के दावे
याचिकाकर्ता पक्षअतलानी ब्रदर्स लाइव (Atlani Brothers Live) — ममता अतलानी द्वारा प्रतिनिधित्व की जाने वाली प्रोपराइटरशिप फर्म (कॉन्सर्ट आयोजक)।
प्रतिवादी पक्षउत्तर प्रदेश राज्य एवं लखनऊ पुलिस आयुक्तालय (अतिरिक्त पुलिस आयुक्त, कानून-व्यवस्था)।
कार्यक्रम का विवरण10 अक्टूबर 2026 को दयाल गेटवे, गोमती नगर, लखनऊ में आयोजित होने वाला लाइव म्यूजिक कॉन्सर्ट।
कॉन्सर्ट का प्रायोजककासा बकार्डी (Casa Bacardi) — जो आधिकारिक तौर पर शराब और पेय पदार्थों के व्यवसाय से जुड़ी एक प्रमुख वैश्विक ब्रांड है। कार्यक्रम के दौरान परिसर में वैध आबकारी नियमों के तहत शराब की बिक्री प्रस्तावित थी।
आक्षेपित पुलिस आदेश (30 सितंबर 2026)लखनऊ के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (कानून एवं व्यवस्था) ने ध्वनि प्रदूषण नियमों के तहत कॉन्सर्ट के आयोजन की अनुमति तो प्रदान की, किंतु उसमें 18 शर्तें (18 Conditions) थोप दीं। इसमें से एक शर्त के तहत कॉन्सर्ट के दौरान शराब एवं किसी भी मादक पदार्थ के परोसने और उपभोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया।
याचिकाकर्ता के मुख्य विधिक तर्क1. क्षेत्राधिकार का अभाव: पुलिस ने ध्वनि प्रदूषण (विनियमन एवं नियंत्रण) नियम, 2000 के तहत अपनी शक्तियों का अतिक्रमण किया है; ये नियम केवल ध्वनि विस्तारक यंत्रों और डेसिबल स्तरों के नियमन तक सीमित हैं।
2. आबकारी विभाग का अनन्य क्षेत्र: किसी सार्वजनिक या निजी परिसर में शराब परोसने का अधिकार आबकारी विभाग (आबकारी अधिनियम) द्वारा लाइसेंस जारी करने से नियंत्रित होता है, न कि ध्वनि अनुमति से।
3. अनुच्छेद 14 का उल्लंघन: जुलाई 2026 में लखनऊ में ही आयोजित ‘पापोन लाइव’ (Papon Live) संगीत कार्यक्रम में पुलिस ने ऐसी कोई शर्त नहीं लगाई थी।
राज्य सरकार का रुखसरकारी वकील याचिका का विरोध करते हुए भी यह स्वीकार करने को बाध्य हुए कि ध्वनि प्रदूषण नियमों में शराब या मादक पदार्थों को प्रतिबंधित करने का कोई विशिष्ट प्रावधान नहीं है।
हाईकोर्ट का अंतिम निर्णयरिट याचिका स्वीकार (Allowed); शराब परोसने पर रोक लगाने वाली पुलिस की शर्त को अधिकार-विहीन (Ultra Vires) और अवैध घोषित कर निरस्त किया गया।

विधिक एवं प्रशासनिक विश्लेषण: ‘शक्तियों का पृथक्करण और विनियामक सीमाएं’

  • अधिकार-विहीन कृत्य का सिद्धांत (Doctrine of Ultra Vires):
    • प्रशासनिक विधि का यह स्वर्णिम सिद्धांत है कि किसी वैधानिक प्राधिकारी (जैसे पुलिस कमिश्नर) के पास केवल उतनी ही शक्ति होती है जितनी कानून द्वारा उसे स्पष्ट रूप से सौंपी गई है।
    • जब पुलिस ध्वनि प्रदूषण नियम, 2000 के तहत किसी संगीत कार्यक्रम के लिए ‘अनापत्ति’ या ‘अनुमति’ जारी करती है, तो उसकी जांच का दायरा केवल इस बात तक सीमित हो सकता है कि क्या लाउडस्पीकर से पर्यावरण या पड़ोसियों को ध्वनि का नुकसान होगा।
    • ध्वनि नियंत्रण के कानून की आड़ में शराब की बिक्री को प्रतिबंधित करना सीधे तौर पर ‘अधिकार-विहीन’ (Ultra Vires) कृत्य है।
  • आबकारी विभाग बनाम पुलिस प्रशासन:
    • संगीत कार्यक्रमों या वाणिज्यिक कार्यक्रमों में शराब परोसने का नियमन उत्तर प्रदेश आबकारी अधिनियम, 1910 और उसके तहत जारी होने वाले सामयिक लाइसेंसों (Occasional / Bar Licences) द्वारा शासित होता है।
    • यदि आयोजक आबकारी विभाग से वैध अस्थायी बार लाइसेंस प्राप्त करते हैं और राज्य को निर्धारित आबकारी शुल्क का भुगतान करते हैं, तो पुलिस विभाग ध्वनि नियमों के बहाने उस पर समानांतर या सुपर-सेंसरशिप लागू नहीं कर सकता।
  • मनमाने वर्गीकरण पर प्रहार (Article 14 Jurisprudence):
    • उच्च न्यायालय ने सही पाया कि जब पुलिस ‘पापोन लाइव’ कॉन्सर्ट में शराब परोसने पर कोई आपत्ति नहीं करती, लेकिन ‘कासा बकार्डी’ कॉन्सर्ट में अचानक शराब बैन की शर्त जोड़ देती है, तो यह कानून के समक्ष समानता के मौलिक अधिकार का सीधा हनन है।
    • राज्य प्रशासन को एक ही शहर और एक ही प्रकार के सांस्कृतिक आयोजनों के लिए अलग-अलग नियम बनाने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

विधिक विवरण एवं उपस्थित अधिवक्ता

  • न्यायालय: इलाहाबाद उच्च न्यायालय, लखनऊ खंडपीठ (संवैधानिक रिट क्षेत्राधिकार)
  • केस संदर्भ: अतलानी ब्रदर्स लाइव बनाम उत्तर प्रदेश राज्य व अन्य [Writ Petition (Civil) / 2026]
  • पीठ: न्यायमूर्ति आलोक माथुर एवं न्यायमूर्ति अवधेश कुमार चौधरी (खंडपीठ)
  • कार्यवाही का परिणाम: रिट याचिका स्वीकृत; पुलिस आदेश की विवादित शर्त निरस्त।

विधिक प्रतिनिधित्व:

  • याचिकाकर्ता (अतलानी ब्रदर्स लाइव) की ओर से:
    • अधिवक्ता सूर्यांश नरूला (Advocate Suryansh Narula)
    • अधिवक्ता अंकित वर्मा (Advocate Ankit Verma)
    • अधिवक्ता पाली अनुराग (Advocate Pali Anurag)
  • प्रतिवादी (उत्तर प्रदेश राज्य व पुलिस प्रशासन) की ओर से: राज्य के संबंधित शासकीय अधिवक्ता।
  • प्रासंगिक कानून एवं विधिक प्रावधान:
    • पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 सहपठित ध्वनि प्रदूषण (विनियमन एवं नियंत्रण) नियम, 2000 — नियम 5 (लाउडस्पीकर व ध्वनि उत्पादक उपकरणों के प्रयोग पर प्रतिबंध एवं शर्तें)
    • संयुक्त प्रांत आबकारी अधिनियम, 1910 (UP Excise Act, 1910) — विशेष आयोजनों में शराब की बिक्री व परोसने का वैधानिक नियमन
    • भारत का संविधान — अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार), अनुच्छेद 19(1)(g) (व्यापार/व्यवसाय की स्वतंत्रता) एवं अनुच्छेद 226 (उच्च न्यायालय का रिट क्षेत्राधिकार)
  • संबद्ध न्यायिक सिद्धांत:
    • पर्यावरणीय अनुमतियों में पुलिस शक्तियों की सीमा का विधिक मानक: ‘ध्वनि प्रदूषण (विनियमन एवं नियंत्रण) नियम, 2000 के तहत संगीत कार्यक्रमों या आयोजनों को अनुमति देते समय पुलिस प्राधिकारी केवल ध्वनि स्तरों और ध्वनि नियंत्रण से जुड़ी शर्तें लगाने के ही वैधानिक अधिकारी हैं; इन नियमों के तहत पुलिस को शराब या किसी अन्य मादक पदार्थ के परोसने अथवा उपभोग पर प्रतिबंध लगाने का कोई विधायी अधिकार या क्षेत्राधिकार प्राप्त नहीं है; पुलिस द्वारा ध्वनि नियमों की आड़ में आबकारी संबंधी शर्तें थोपना अधिकार-विहीन (Ultra Vires) है; इसके अतिरिक्त, एक ही प्रकार के लाइव कॉन्सर्ट्स के बीच मनमाना भेदभाव करना संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है।’
  • वर्तमान स्थिति व विधिक प्रभाव: इलाहाबाद हाईकोर्ट के इस निर्णय के पश्चात लखनऊ सहित पूरे उत्तर प्रदेश में पुलिस प्रशासन के लिए यह स्पष्ट विधिक सीमा तय हो गई है कि वह ध्वनि प्रदूषण की अनापत्ति देते समय उसमें शराब परोसने संबंधी अवैध शर्तें नहीं जोड़ सकता; यदि आयोजकों के पास आबकारी विभाग का वैध परमिट मौजूद है, तो वे कानूनी रूप से संगीत कार्यक्रमों में शराब परोसने के हकदार हैं।

Noise Pollution Rules: मामले का संक्षिप्त विवरण (At A Glance)

विवरणजानकारी
संबंधित अदालतइलाहाबाद उच्च न्यायालय (Allahabad High Court), लखनऊ पीठ
पीठन्यायमूर्ति आलोक माथुर एवं न्यायमूर्ति अवधेश कुमार चौधरी
मामला/साइटेशनअटलानी ब्रदर्स बनाम उत्तर प्रदेश राज्य (Atlani Brothers v. State of UP)
याचिकाकर्ताअटलानी ब्रदर्स लाइव (प्रोपराइटर ममता अटलानी) | प्रतिनिधित्व: अधिवक्ता सूर्यांश नरूला, अंकित वर्मा एवं पाली अनुराग
प्रतिवादी पक्षउत्तर प्रदेश राज्य एवं लखनऊ पुलिस प्रशासन
मूल विवाद10 अक्टूबर 2026 को गोमती नगर, लखनऊ (Dayal Gateway) में आयोजित बकार्डी प्रायोजित लाइव म्यूजिक कंसर्ट में पुलिस द्वारा शराब बिक्री/सेवन पर शर्त संख्या 18 के तहत प्रतिबंध लगाना।
संबंधित कानूनध्वनि प्रदूषण (नियमन एवं नियंत्रण) नियम, 2000 (Noise Pollution Rules, 2000)
अदालत का अंतिम निर्णययाचिका स्वीकार: ध्वनि प्रदूषण अनुमति से शराब प्रतिबंध की शर्त रद्द; पुलिस को ध्वनि नियमों के दायरे से बाहर जाकर मनमानी शर्तें लगाने का अधिकार नहीं।
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