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मामले की पृष्ठभूमि और कानूनी व व्यावहारिक तर्क
- ‘Stilt + 4 Floors’ नीति पर पूर्व स्थगन:गुरुग्राम में ‘स्टिल्ट प्लस 4 फ्लोर’ नीति के क्रियान्वयन पर हाईकोर्ट ने 2 अप्रैल 2026 को ही रोक लगा दी थी। सुनवाई के दौरान अदालत ने संकेत दिया कि जिन इमारतों में इस नीति के तहत पहले ही 4 मंजिलें बनाई जा चुकी हैं, उनके अलग-अलग फ्लैटों/इकाइयों की बिक्री (Separate Sale of Units) पर भी प्रतिबंध लगाया जा सकता है।
- पार्किंग संकट, रोड रेज और शहरी ढाँचे का पतन:पीठ ने चिंता व्यक्त की कि अनियोजित निर्माण और अतिरिक्त मंजिलों के कारण प्रति आवासीय इकाई 3-4 गाड़ियां हो गई हैं, जिससे सड़कें अवरुद्ध हो रही हैं और शहरी कॉलोनियां स्लम जैसी स्थिति में तब्दील हो रही हैं। इसके कारण पड़ोसियों के बीच लगातार झगड़े और रोड रेज जैसी घटनाएं बढ़ रही हैं।
- राज्य सरकार को चेतावनी और निर्देश:अदालत ने हरियाणा के महाधिवक्ता (Advocate General) पवन कुमार मुटनेजा को निर्देश दिया कि सरकार राष्ट्रीय राजधानी (NCR) के निकट स्थित गुरुग्राम जैसे शहरों को एक मॉडल और नवीन टाउनशिप के रूप में विकसित करने के लिए एक उचित व विचारशील नीति लेकर आए।
मुख्य विधिक व प्रशासनिक निष्कर्ष
1. शहरी नियोजन और जनहित (Urban Planning & Public Nuisance):
पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय का यह रुख स्पष्ट करता है कि राजस्व (Revenue) कमाने के लिए नगर निगमों या राज्य सरकारों द्वारा अतिरिक्त FAR बेचना आम नागरिकों के शांतिपूर्ण जीवन (Article 21) और शहरी बुनियादी ढांचे के अधिकार के विपरीत है।
2. रियल एस्टेट और बाय-लॉ का कड़ाई से प्रवर्तन:
यदि हाईकोर्ट दिवाली अवकाश के बाद इस नीति को पूरी तरह रद्द करता है, तो एनसीआर (NCR) के रियल एस्टेट मार्केट, बिल्डरों और फ्लोर-वाइज रजिस्ट्री कराने वाले खरीदारों पर इसका व्यापक विधिक व वित्तीय प्रभाव पड़ेगा।
चंडीगढ़: भारत का संविधान के अनुच्छेद 21 (गरिमापूर्ण जीवन, स्वच्छ व सुव्यवस्थित पर्यावरण और रहने योग्य शहरी परिवेश का मौलिक अधिकार), हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण अधिनियम, 1977 (HSVP Act, 1977), हरियाणा भवन संहिता, 2017 (Haryana Building Code, 2017), नगर योजना व पर्यावरण न्यायशास्त्र में सार्वजनिक ट्रस्ट सिद्धांत (Public Trust Doctrine), तथा आवासीय सेक्टरों में बुनियादी ढांचे (सड़क, पार्किंग, सीवरेज, जल आपूर्ति) की धारण क्षमता (Carrying Capacity) पर पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने हरियाणा सरकार की शहरी नियोजन नीतियों पर अत्यंत तीखा और कड़ा रुख अपनाया है।
पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice) अश्वनी कुमार मिश्रा (Chief Justice Ashwani Kumar Mishra) और न्यायमूर्ति रोहित कपूर (Justice Rohit Kapoor) की खंडपीठ ने आवासीय भूखंडों पर स्टिल्ट + 4 फ्लोर (Stilt + 4 Floor Policy) और पर्चेसेबल फ्लोर एरिया रेशियो (Purchasable FAR) से जुड़ी याचिकाओं के विशाल समूह की सुनवाई करते हुए हरियाणा में पर्चेसेबल एफएआर के क्रियान्वयन पर पूर्ण न्यायिक रोक (Stay) लगाने का स्पष्ट प्रस्ताव/संकेत (Mooted a stay) दिया है।
पीठ ने दो-टूक टिप्पणी की कि सरकार को अतिरिक्त शुल्क देकर अतिरिक्त निर्माण क्षेत्र खरीदने (Purchasable FAR) की यह पूरी अवधारणा “बिल्डिंग कोड को विकृत और नष्ट करने का माध्यम और शुद्ध भ्रष्टाचार (Absolute Corruption)” है। अदालत ने रेखांकित किया कि इस अंधाधुंध नीति के कारण गुरुग्राम और नोएडा जैसे आधुनिक शहर बर्बाद हो रहे हैं, आवासीय टाउनशिप झुग्गी-झोपड़ी बस्तियों (Slums) में तब्दील हो रही हैं और अनियंत्रित पार्किंग से सड़कों पर आए दिन रोड रेज (Road Rage) और पड़ोसियों के बीच अविश्वास व झगड़े बढ़ रहे हैं। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि स्टिल्ट + 4 नीति के तहत पहले से बन चुकी इमारतों में प्रत्येक तल/यूनिट की अलग-अलग बिक्री (Restrain separate sale of units) पर भी पाबंदी लगाई जा सकती है।
उच्च न्यायालय के मुख्य कानूनी निष्कर्ष एवं न्यायिक टिप्पणियां
1. ‘पर्चेसेबल FAR बिल्डिंग कोड को विकृत व तबाह करने का जरिया; यह केवल भ्रष्टाचार है’:
मुख्य न्यायाधीश अश्वनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति रोहित कपूर की खंडपीठ ने सरकारी नीतियों के नाम पर बिल्डिंग नियमों की धज्जियां उड़ाने पर सख्त नाराजगी जताते हुए कहा: “हमारी इस ‘पर्चेसेबल’ (खरीद योग्य) अवधारणा के साथ अत्यंत गंभीर आपत्तियां (Very strong reservations) हैं। यह पूरी पर्चेसेबल एफएआर अवधारणा कुछ और नहीं, बल्कि संपूर्ण बिल्डिंग कोड को विकृत और नष्ट करने (Distorting and destroying entire building code) का एक माध्यम मात्र है। जो निर्माण सामान्य भवन उपनियमों (Building Bye-laws) के तहत अन्यथा वर्जित है, उसे किसी न किसी नीति के आवरण में अनुमत किया जा रहा है। जैसे ही आप पर्चेसेबल एफएआर के नाम पर मूल सीमा से ऊपर जाते हैं, यह पूर्णतः भ्रष्टाचार (Absolute corruption) है और कुछ नहीं। हम केवल मूल भवन मानकों के अनुसार ही निर्माण की अनुमति देंगे। अदालत इस नीति पर रोक लगाने पर गंभीरता से विचार कर रही है।”
2. ‘चंडीगढ़ इसलिए रहने योग्य बचा क्योंकि वहाँ पर्चेसेबल FAR नहीं; गुरुग्राम-नोएडा बर्बाद हो गए’:
- पीठ ने चंडीगढ़ की तुलना राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के शहरों से करते हुए कहा:*”चंडीगढ़ आज केवल इसलिए एक रहने योग्य शहर (Liveable city) बना हुआ है क्योंकि वहाँ पर्चेसेबल एफएआर की यह अवधारणा मौजूद नहीं है। जबकि इसके विपरीत, गुरुग्राम और नोएडा जैसे शहर इस पर्चेसेबल एफएआर के कारण पूरी तरह तबाह हो रहे हैं। इस तरह हर शहर को बर्बाद किया जा रहा है।आज स्थिति यह है कि एक ही आवासीय इकाई/मकान में 3 से 4 गाड़ियां हैं। सड़कें पूरी तरह अवरुद्ध हो चुकी हैं और आपकी सुव्यवस्थित शहरी टाउनशिप्स झुग्गियों (Slums) में बदली जा रही हैं। अव्यवस्थित निर्माण के कारण रोड रेज और पार्किंग विवाद पैदा हो रहे हैं। हम नहीं चाहते कि शहर ऐसे बनें जिससे पड़ोसियों में अविश्वास और अंतहीन संघर्ष पैदा हो और पूरा शहरी ढांचा ही ढह जाए।”*
3. निर्मित इमारतों में अलग-अलग तल/फ्लैट की बिक्री रोकने की चेतावनी:
- अदालत ने यह गंभीर चेतावनी दी कि जो बिल्डर या मकान मालिक स्टिल्ट + 4 नीति का लाभ उठाकर पहले ही निर्माण कर चुके हैं, उनके द्वारा चारों तलों को अलग-अलग स्वतंत्र खरीदारों को बेचने (Restrain the separate sale of units) पर रोक लगाई जा सकती है, ताकि आवासीय कॉलोनियों का घनत्व अनियंत्रित न हो।
- राज्य सरकार को फटकार लगाते हुए पीठ ने कहा:“राष्ट्रीय राजधानी के इतने समीप स्थित गुरुग्राम जैसे शहर को इस अंधाधुंध तरीके से विकसित होने देना राज्य के हित में नहीं है। इसे एक मॉडल और अभिनव टाउनशिप के रूप में विकसित होना चाहिए, जो नागरिकों की वास्तविक आवश्यकताओं का ध्यान रखे। प्राधिकारियों को पार्किंग और नागरिक सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु अपने विवेक का सजग प्रयोग करना चाहिए। राज्य सरकार अगली तारीख से पहले एक व्यापक और उचित नीति लेकर आए।”
मामले की तथ्यात्मक पृष्ठभूमि एवं प्रक्रियात्मक कालक्रम (2024–2026)
| संदर्भ / विवरण | तथ्यात्मक स्थिति एवं पक्षों के दावे |
| फोरम / न्यायालय | पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय, चंडीगढ़ (संवैधानिक रिट क्षेत्राधिकार — अनुच्छेद 226) |
| पीठ | मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice) अश्वनी कुमार मिश्रा (Justice Ashwani Kumar Mishra) एवं न्यायमूर्ति रोहित कपूर (Justice Rohit Kapoor) |
| सुनवाई की तिथि | 4 नवंबर 2026 |
| अगली सुनवाई | दिवाली अवकाश के तुरंत बाद (Immediately after Diwali Vacations) |
| केस संदर्भ | हरियाणा स्टिल्ट + 4 फ्लोर नीति एवं पर्चेसेबल एफएआर रिट याचिका समूह [Civil Writ Petition Group Matters / 2026] |
| विवादित नीतियां | 1. पर्चेसेबल फ्लोर एरिया रेशियो (Purchasable Floor Area Ratio – FAR): इसके तहत हरियाणा सरकार बिल्डरों या भूखंड स्वामियों को निर्धारित सरकारी शुल्क का भुगतान करके मानक सीमा से अतिरिक्त निर्माण क्षेत्र (Extra Built-up Area) खरीदने और बनाने की अनुमति देती है। 2. स्टिल्ट + 4 फ्लोर नीति (Stilt + 4 Policy): रिहायशी सेक्टरों में एकल आवासीय भूखंडों पर भूतल पर पार्किंग (Stilt) और उसके ऊपर चार स्वतंत्र तल बनाने तथा उन्हें अलग-अलग बेचने की छूट। |
| याचिकाकर्ताओं (RWAs व नागरिकों) के मुख्य आक्षेप | • नागरिक सुविधाओं का पतन: हुडा (HSVP) के मूल सेक्टर केवल 2.5 मंजिलों और सीमित परिवारों के घनत्व हेतु डिज़ाइन किए गए थे। 4 स्वतंत्र मंजिलों से पानी की मांग, बिजली का लोड और सीवरेज ओवरफ्लो तीन गुना बढ़ गया है। • पार्किंग का भीषण संकट: स्टिल्ट पार्किंग अपर्याप्त साबित हो रही है; प्रत्येक मंजिल पर 2 से 3 कारें होने से वाहन संकरी सड़कों पर पार्क किए जा रहे हैं, जिससे आपातकालीन वाहनों (एम्बुलेंस, फायर ब्रिगेड) का निकलना असंभव हो गया है। • पड़ोसियों की निजता व संरचनात्मक सुरक्षा: साथ वाले पुराने एक-मंजिला मकानों की दीवारों में दरारें आ रही हैं और रोशनी व हवा पूरी तरह बाधित हो गई है। |
| उच्च न्यायालय का पूर्व हस्तक्षेप (2 अप्रैल 2026) | पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने 2 अप्रैल 2026 को ही एक अंतरिम आदेश पारित कर गुरुग्राम में नई स्टिल्ट + 4 मंजिलों की स्वीकृतियों पर रोक लगा दी थी। |
| 4 नवंबर 2026 का अदालती निर्देश | पीठ ने मामले को अंतिम आदेश पारित करने से पूर्व प्रासंगिक तकनीकी सामग्रियों और नगर योजना डेटा का विश्लेषण करने हेतु स्थगित किया। हरियाणा के महाधिवक्ता (Advocate General) पवन कुमार मुटनेजा (Pawan Kumar Mutneja) को दिवाली अवकाश के तुरंत बाद एक स्पष्ट और संतुलित नीति के साथ पेश होने का निर्देश दिया गया। |
विधिक एवं नगर नियोजन विश्लेषण: ‘पर्चेसेबल FAR, वहन क्षमता और सार्वजनिक ट्रस्ट’
- बिल्डिंग कोड के उद्देश्य की विफलता और पर्चेसेबल FAR की विकृति:
- किसी भी नगर योजना में भवन निर्माण उपनियम (Building Bye-laws) और एफएआर (FAR) का निर्धारण जमीन के क्षेत्रफल, सड़क की चौड़ाई और भूमिगत नागरिक उपयोगिताओं (पाइपलाइन, ड्रेनेज) के वैज्ञानिक अनुपात के आधार पर किया जाता है।
- जब सरकार केवल राजस्व (Revenue Generation) प्राप्त करने के लिए “पैसे दो और अतिरिक्त एफएआर लो” (Pay to build more) की नीति लागू करती है, तो यह योजनाबद्ध विकास (Planned Development) की मूल भावना को ही नष्ट कर देती है। अदालत ने पूर्व सुनवाई में भी अत्यंत तीखी टिप्पणी की थी कि यह नीति कुछ और नहीं बल्कि “भुगतान करो और अपराध करो (Pay and commit offence)” जैसी व्यवस्था है।
- राज्य का ‘सार्वजनिक ट्रस्ट’ (Public Trust Doctrine) के तहत कर्तव्य:
- सर्वोच्च न्यायालय ने एम.सी. मेहता बनाम भारत संघ और सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन बनाम बीबीडी बाग में यह सुस्थापित किया है कि राज्य सार्वजनिक उपयोगिताओं और शहरी बुनियादी ढांचे का संरक्षक (Trustee) है।
- राज्य सरकार बिल्डरों और भूखंड स्वामियों से ‘इंफ्रास्ट्रक्चर ऑग्मेंटेशन चार्ज’ या पर्चेसेबल एफएआर फीस वसूल कर अपनी तिजोरी भर सकती है, किंतु जब तक वह जमीन पर सड़कों को चौड़ा नहीं करती, पार्किंग स्पेस नहीं बनाती और सीवर लाइनों की क्षमता नहीं बढ़ाती, तब तक ऐसा अतिरिक्त निर्माण नागरिकों के जीवन के अधिकार पर सीधा हमला है।
- फ्लोर-वार स्वतंत्र रजिस्ट्री पर रोक की कानूनी संभावना:
- हरियाणा में स्टिल्ट + 4 नीति का सबसे बड़ा आकर्षण यह था कि बिल्डर एक आवासीय प्लॉट खरीदकर उस पर 4 अलग-अलग अपार्टमेंट बनाकर स्वतंत्र रजिस्ट्री (Separate Floor Registration) के जरिए भारी मुनाफा कमा रहे थे।
- यदि उच्च न्यायालय इन स्वतंत्र इकाइयों की अलग-अलग बिक्री और उप-विभाजन (Fragmentation of Residential Plots) पर रोक लगा देता है, तो रिहायशी सेक्टरों में कमर्शियल बिल्डरों की अवैध घुसपैठ पर स्वतः विराम लग जाएगा।
विधिक विवरण एवं उपस्थित पक्षकार
- न्यायालय: पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय, चंडीगढ़ (संवैधानिक रिट क्षेत्राधिकार)
- केस संदर्भ: हरियाणा स्टिल्ट + 4 फ्लोर नीति एवं पर्चेसेबल एफएआर रिट याचिकाएं [Civil Writ Petition Group Matters / 2026]
- पीठ: मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice) अश्वनी कुमार मिश्रा (Justice Ashwani Kumar Mishra) एवं न्यायमूर्ति रोहित कपूर (Justice Rohit Kapoor)
- सुनवाई की तिथि: 4 नवंबर 2026
- अगली सुनवाई: दिवाली अवकाश के तुरंत बाद (Post-Diwali Vacations)
विधिक प्रतिनिधित्व:
- हरियाणा राज्य की ओर से: महाधिवक्ता (Advocate General) पवन कुमार मुटनेजा (Pawan Kumar Mutneja)।
- याचिकाकर्ताओं (आरडब्ल्यूए व नागरिकों) की ओर से: वरिष्ठ अधिवक्तागण एवं नागरिक अधिकार विशेषज्ञ।
- प्रासंगिक कानून एवं विधिक उपबंध:
- भारत का संविधान — अनुच्छेद 21 (स्वस्थ पर्यावरण व सुगम जीवन का अधिकार) एवं अनुच्छेद 226 (उच्च न्यायालय की रिट शक्तियां)
- हरियाणा भवन संहिता, 2017 (Haryana Building Code, 2017) — एफएआर (FAR), ग्राउंड कवरेज एवं ऊंचाई संबंधी मानक
- हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण अधिनियम, 1977 (HSVP Act, 1977) एवं हरियाणा विकास और शहरी क्षेत्र विनियमन अधिनियम, 1975
- चंडीगढ़ भवन नियम (शहरी नियोजन मॉडल) — पर्चेसेबल एफएआर के बिना सुव्यवस्थित शहरी विकास का संदर्भ
- संबद्ध न्यायिक सिद्धांत:
- शहरी विकास, पर्चेसेबल एफएआर और वहन क्षमता का विधिक मानक: ‘अतिरिक्त शुल्क लेकर मानक भवन सीमाओं से अधिक निर्माण करने की ‘पर्चेसेबल एफएआर’ (Purchasable FAR) नीति योजनाबद्ध नगर विकास के बिल्डिंग कोड को विकृत और नष्ट करती है; राज्य सरकार केवल अतिरिक्त राजस्व अर्जित करने के लिए आवासीय सेक्टरों के बुनियादी ढांचे और पर्यावरण को खतरे में नहीं डाल सकती; आवासीय भूखंडों पर अनियंत्रित बहुमंजिला निर्माण (Stilt + 4) सड़कों को अवरुद्ध करता है, पार्किंग विवाद व रोड रेज को जन्म देता है और सुनियोजित टाउनशिप्स को झुग्गियों (Slums) में बदल देता है; तथा न्यायालय नागरिकों के जीवन के अधिकार (अनुच्छेद 21) के संरक्षण हेतु पर्चेसेबल एफएआर पर रोक लगाने और आवासीय इकाइयों के स्वतंत्र विखंडन व बिक्री को प्रतिबंधित करने का पूर्ण अधिकार क्षेत्र रखता है।’
- वर्तमान स्थिति व भावी परिणाम: पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा दिए गए इस कड़े संकेत के बाद हरियाणा के नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग (DTCP) और हुडा (HSVP) में हड़कंप मच गया है; दिवाली अवकाश के बाद होने वाली सुनवाई में यदि उच्च न्यायालय पर्चेसेबल एफएआर पर औपचारिक रोक का आदेश पारित करता है, तो गुरुग्राम, फरीदाबाद, पंचकूला और सोनीपत सहित पूरे हरियाणा में चल रहे हजारों निर्माणाधीन बहुमंजिला प्रोजेक्ट्स का काम तत्काल ठप हो जाएगा और बिल्डरों द्वारा स्वतंत्र फ्लैट्स की बिक्री पर कानूनी ताला लग जाएगा।
Public Nuisance: मामले का संक्षिप्त विवरण (At A Glance)
| विवरण | जानकारी |
| संबंधित अदालत | पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय (Punjab and Haryana High Court) |
| पीठ | मुख्य न्यायाधीश अश्वनी कुमार मिश्रा एवं न्यायमूर्ति रोहित कपूर |
| मूल विवाद/विषय | हरियाणा में आवासीय प्लॉट्स पर ‘Stilt + 4 Floors’ नीति और अतिरिक्त Purchasable FAR की संवैधानिक व नागरिक वैधता। |
| प्रतिनिधित्व | राज्य सरकार: महाधिवक्ता (Advocate General) पवन कुमार मुटनेजा |
| अदालत की सख्त टिप्पणियाँ | 1. चंडीगढ़ बनाम गुरुग्राम/नोएडा: चंडीगढ़ इसलिए रहने योग्य शहर है क्योंकि वहां Purchasable FAR नहीं है; गुरुग्राम-नोएडा इसके कारण स्लम में बदल रहे हैं। 2. बिल्डिंग कोड का उल्लंघन: अतिरिक्त FAR बेचना भ्रष्टाचार है और इससे ट्रैफिक/पार्किंग संकट व पड़ोसियों में विवाद बढ़ रहे हैं। |
| अदालत का अंतरिम निर्देश | मामले को दिवाली अवकाश (Diwali Vacations) के ठीक बाद की सुनवाई के लिए स्थगित किया गया; राज्य सरकार से एक व्यापक शहरी नीति पेश करने को कहा गया। |

