Friday, November 6, 2026
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Class XII Board: 12वीं बोर्ड परीक्षाओं में बेसिक कैलकुलेटर के उपयोग की जनहित याचिका; अपनी ही करिकुलम कमेटी की सिफारिश 2 साल से क्यों दबाए बैठा है CBSE?’

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मामले की पृष्ठभूमि और याचिकाकर्ता की मुख्य दलीलें

  1. सीबीएसई की अपनी समिति की 2024 की सिफारिश पर अमलीजामा न पहनाना:अधिवक्ता नितिन मंगला के माध्यम से दायर याचिका में उजागर किया गया कि 25 और 26 नवंबर 2024 को आयोजित अपनी 70वीं बैठक में सीबीएसई की पाठ्यचर्या समिति (Curriculum Committee) ने 12वीं की अकाउंटेंसी परीक्षा में बुनियादी कैलकुलेटर (Basic Calculators) के इस्तेमाल को मंजूरी दी थी। इस प्रस्ताव को दिसंबर 2024 में सीबीएसई की गवर्निंग बॉडी के समक्ष भी रखा गया था, लेकिन लगभग दो साल बीत जाने के बाद भी बोर्ड ने इसे लागू या अधिसूचित नहीं किया।
  2. अन्य शिक्षा बोर्डों का उदाहरण:याचिका में तर्क दिया गया कि CISCE (ICSE/ISC), Cambridge IGCSE और International Baccalaureate (IB) जैसे अन्य राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय परीक्षा बोर्ड पहले से ही विनियमित शर्तों के तहत छात्रों को परीक्षाओं में कैलकुलेटर का उपयोग करने की अनुमति देते हैं।
  3. अनुच्छेद 14 का उल्लंघन:अभिभावकों ने तर्क दिया कि जब सीबीएसई की अपनी विशेषज्ञ समिति ने इस संबंध में लिखित सिफारिश की है, तब बोर्ड द्वारा इस निर्णय को ठंडे बस्ते में डालना संविधान के अनुच्छेद 14 (Article 14 – Right to Equality) के तहत मनमाना और अनुचित कृत्य है।

नई दिल्ली: भारत का संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार एवं राज्य की प्रशासनिक निष्क्रियता में ‘मनमानापन’ / Arbitrariness के विरुद्ध संरक्षण), अनुच्छेद 21 (सार्थक व आधुनिक शिक्षा का अधिकार), केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड परीक्षा उपनियमों (CBSE Examination Bye-Laws), तथा अंतरराष्ट्रीय व राष्ट्रीय शिक्षा बोर्डों ( यथा CISCE, कैम्ब्रिज IGCSE और इंटरनेशनल बैकलॉरिएट—IB) द्वारा परीक्षा कक्ष में डिजिटल/वैज्ञानिक उपकरणों के नियमन के विधिक मानकों के तहत दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण जनहित याचिका पर संज्ञान लिया है।

दिल्ली उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश (Acting Chief Justice) नितिन वासुदेव सांब्रे (Acting CJ Nitin Wasudeo Sambre) और न्यायमूर्ति संजय शर्मा (Justice Sanjay Sharma) की खंडपीठ ने कक्षा 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं में छात्रों को बेसिक कैलकुलेटर (Basic Calculators) का उपयोग करने की अनुमति देने की मांग वाली जनहित याचिका (PIL) पर केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE), राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) और केंद्र सरकार (शिक्षा मंत्रालय) को औपचारिक नोटिस जारी किया है।

खंडपीठ ने सभी प्रतिवादी अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे छह सप्ताह के भीतर अपना विस्तृत जवाबी हलफनामा (Counter Affidavit) दाखिल कर स्थिति स्पष्ट करें। याचिका में यह गंभीर तथ्य उजागर किया गया है कि सीबीएसई की स्वयं की पाठ्यचर्या समिति (Curriculum Committee) ने नवंबर 2024 में ही कक्षा 12वीं की लेखाशास्त्र (Accountancy) परीक्षा में बेसिक कैलकुलेटर के उपयोग को लिखित रूप में मंजूरी दे दी थी, किंतु बोर्ड की गवर्निंग बॉडी द्वारा दो वर्ष बीत जाने के बाद भी इस पर कोई अंतिम अधिसूचना जारी नहीं की गई, जो छात्रों के प्रति घोर मनमाना और अनुचित रवैया है।

जनहित याचिका के मुख्य कानूनी आधार एवं न्यायिक निर्देश

1. ‘मैन्युअल गणना में समय नष्ट होता है, वैचारिक समझ की परीक्षा नहीं हो पाती’:

याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश अधिवक्ता नितिन मंगला (Advocate Nitin Mangla) ने दलील दी:

  • गणित (Mathematics), लेखाशास्त्र (Accountancy), भौतिकी (Physics) और अनुप्रयुक्त गणित जैसे विषयों में छात्रों को लंबी, जटिल और समय खपाने वाली अंकगणितीय गणनाएं हाथ से करने के लिए विवश किया जाता है।
  • परीक्षा के सीमित तीन घंटों में भारी समय केवल जोड़-घटाव और गुणा-भाग में व्यर्थ चला जाता है, जिससे छात्रों के पास प्रश्नों की मूल विषयगत और वैचारिक समझ (Conceptual Understanding) को प्रदर्शित करने और तार्किक विश्लेषण प्रस्तुत करने के लिए अत्यंत कम समय बचता है।

2. ‘CBSE की अपनी करिकुलम कमेटी ने 2024 में दी थी मंजूरी; 2 साल से लागू न करना मनमाना’:

याचिका में सीबीएसई के अपने आंतरिक आधिकारिक रिकॉर्ड का हवाला देते हुए प्रशासनिक जड़ता पर सवाल उठाए गए: “याचिकाकर्ता ने यह पता लगाने का हर संभव प्रयास किया कि क्या यह प्रस्ताव अंतिम रूप से अधिसूचित या लागू किया गया है, किंतु सार्वजनिक डोमेन में ऐसी कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है। सीधा सच यह है कि सीबीएसई की अपनी पाठ्यचर्या समिति (Curriculum Committee) ने 25 और 26 नवंबर 2024 को आयोजित अपनी 70वीं बैठक में कक्षा 12वीं लेखाशास्त्र परीक्षा में बेसिक कैलकुलेटर के उपयोग को लिखित रूप में पहले ही अनुमोदित कर दिया था। यह रिकॉर्ड दिसंबर 2024 में सीबीएसई की गवर्निंग बॉडी के समक्ष भी रखा गया था, किंतु सीबीएसई ने लगभग दो वर्षों से अपनी ही समिति द्वारा लिए गए निर्णय को अधिसूचित या लागू करने की कोई परवाह नहीं की है। संस्थागत स्तर पर यह निष्क्रियता संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत पूरी तरह से मनमानी और असंवैधानिक (Arbitrary Action) है।”

3. अन्य राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय बोर्डों से तुलना (अनुच्छेद 14 का उल्लंघन):

  • याचिका में कहा गया कि काउंसिल फॉर द इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एग्जामिनेशंस (CISCE – ISC 12वीं), कैम्ब्रिज इंटरनेशनल (IGCSE) और इंटरनेशनल बैकलॉरिएट (IB) जैसे अन्य प्रमुख शिक्षा बोर्ड छात्रों को विनियमित शर्तों के तहत कैलकुलेटर का उपयोग करने की अनुमति देते हैं।
  • उच्च शिक्षा और प्रतियोगी प्रवेश परीक्षाओं (यथा कॉलेज/यूनिवर्सिटी स्तर के अकाउंट्स व फाइनेंस) में व्यावहारिक रूप से तकनीकी उपकरणों का उपयोग सामान्य है। ऐसे में सीबीएसई के छात्रों को इस सुविधा से वंचित रखना उनके साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार है।

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मामले की तथ्यात्मक पृष्ठभूमि एवं प्रक्रियात्मक कालक्रम (2024–2026)

संदर्भ / विवरणतथ्यात्मक स्थिति एवं पक्षों के दावे
फोरम / न्यायालयदिल्ली उच्च न्यायालय, नई दिल्ली (संवैधानिक जनहित याचिका क्षेत्राधिकार — अनुच्छेद 226)
पीठकार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश (Acting CJ) नितिन वासुदेव सांब्रे (Justice Nitin Wasudeo Sambre) एवं न्यायमूर्ति संजय शर्मा (Justice Sanjay Sharma)
आदेश की तिथि4 नवंबर 2026
जवाबी हलफनामे की समय-सीमाछह सप्ताह (Six Weeks)
केस संदर्भविशाल दुआ व अन्य बनाम केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) व अन्य [W.P.(C) PIL No. … / 2026]
याचिकाकर्ता पक्षविशाल दुआ (Vishal Dua) (पीतमपुरा, दिल्ली निवासी) एवं 10 अन्य अभिभावक।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ताअधिवक्ता नितिन मंगला (Advocate Nitin Mangla)।
प्रतिवादी पक्ष1. केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE)
2. राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT)
3. भारत संघ (शिक्षा मंत्रालय, स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग)
मुख्य प्रार्थना (Reliefs Sought)• सीबीएसई को निर्देश दिया जाए कि वह आगामी कक्षा 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं (विशेषकर गणित, अकाउंटेंसी आदि) में छात्रों को बेसिक, नॉन-प्रोग्रामेबल कैलकुलेटर (Basic Non-programmable Calculators) के उपयोग की अनुमति प्रदान करे।
• सीबीएसई को अपनी पाठ्यचर्या समिति द्वारा 25-26 नवंबर 2024 को लिए गए निर्णय को तत्काल अधिसूचित और क्रियान्वित करने का परमादेश (Mandamus) जारी किया जाए।
अन्य बोर्डों में प्रचलित स्थिति• CISCE (ISC Class XII): वर्ष 2020 से ही विज्ञान, वाणिज्य और गणित विषयों में नॉन-प्रोग्रामेबल कैलकुलेटर की अनुमति देता है।
• IB व कैम्ब्रिज IGCSE: विश्व भर में परीक्षाओं में ग्राफिक/साधारण कैलकुलेटर के उपयोग की सुस्पष्ट नीति लागू रखते हैं।
सीबीएसई का पूर्व नियमवर्तमान परीक्षा उपनियमों के तहत परीक्षा हॉल में किसी भी प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक उपकरण (कैलकुलेटर सहित) को ‘अनुचित साधन’ (Unfair Means) माना जाता है, सिवाय दिव्यांग (CWSN) श्रेणी के कुछ विशेष छात्रों के।
हाईकोर्ट का अंतरिम आदेशयाचिका पर संज्ञान लेते हुए सीबीएसई, एनसीईआरटी और केंद्र सरकार को नोटिस जारी; 6 सप्ताह में जवाब तलब।

विधिक एवं शैक्षणिक विश्लेषण: ‘अनुच्छेद 14, शैक्षणिक सुधार और प्रशासनिक जड़ता’

  • प्रशासनिक विधि और ‘मनमानापन’ (Doctrine of Arbitrariness):
    • भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने ई.पी. रोयप्पा बनाम तमिलनाडु राज्य और शायरा बानो बनाम भारत संघ [(2017) 9 SCC 1] में यह सिद्धांत स्थापित किया है कि राज्य या उसके उपक्रमों (जैसे सीबीएसई) द्वारा बिना किसी तार्किक कारण के किसी नीतिगत निर्णय को रोके रखना या मनमाने ढंग से लागू न करना अनुच्छेद 14 का सीधा उल्लंघन है।
    • जब सीबीएसई की सर्वोच्च शैक्षणिक विशेषज्ञ समिति (Curriculum Committee) ने विचार-विमर्श के बाद यह मान लिया कि 12वीं के स्तर पर छात्रों को कैलकुलेटर मिलना चाहिए, तो गवर्निंग बॉडी का दो साल तक बिना किसी कारण इसे ठंडे बस्ते में डालना प्रशासनिक जवाबदेही के अभाव को दर्शाता है।
  • राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 (NEP 2020) और मूल्यांकन सुधार:
    • NEP 2020 का मूल दर्शन यह है कि बोर्ड परीक्षाओं को “रटंत प्रणाली” (Rote Learning) और क्लर्क स्तर की लंबी यांत्रिक गणनाओं से मुक्त कर “उच्च-स्तरीय चिंतन कौशल” (Higher-Order Thinking Skills – HOTS) के मूल्यांकन पर केंद्रित किया जाए।
    • पेशेवर दुनिया (जैसे CA, CS, डेटा एनालिटिक्स, इंजीनियरिंग) में कोई भी पेशेवर जटिल गणना हाथ से नहीं करता। परीक्षा का उद्देश्य यह जांचना होना चाहिए कि क्या छात्र को अकाउंटिंग के सिद्धांत, डेबिट-क्रेडिट के नियम और गणितीय सूत्र समझ में आए हैं, न कि यह कि वह 8 अंकों का गुणा-भाग बिना गलती किए कितनी तेजी से कर सकता है।
  • विधिक समानता (Article 14 – Inter-Board Parity):
    • कॉलेज प्रवेश (जैसे CUET या अन्य विश्वविद्यालय कट-ऑफ) में सीबीएसई और आईएससी (CISCE) दोनों के छात्र समान सीटों के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं।
    • जब आईएससी के छात्र परीक्षा में कैलकुलेटर का उपयोग करके समय बचाते हैं और पेपर को सटीकता से हल करते हैं, तो सीबीएसई के छात्रों को इस सुविधा से वंचित रखना उन्हें एक प्रत्यक्ष और नुकसानदेह स्थिति (Disadvantaged Position) में खड़ा करता है।

विधिक विवरण एवं संदर्भ

  • न्यायालय: दिल्ली उच्च न्यायालय, नई दिल्ली (संवैधानिक जनहित याचिका क्षेत्राधिकार — अनुच्छेद 226)
  • केस संदर्भ: विशाल दुआ व अन्य बनाम केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) व अन्य [W.P.(C) PIL No. … / 2026]
  • पीठ: कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश (Acting CJ) नितिन वासुदेव सांब्रे (Justice Nitin Wasudeo Sambre) एवं न्यायमूर्ति संजय शर्मा (Justice Sanjay Sharma)
  • आदेश की तिथि: 4 नवंबर 2026
  • जवाब दाखिल करने का समय: छह सप्ताह (Six Weeks)

विधिक प्रतिनिधित्व:

  • याचिकाकर्ताओं की ओर से: अधिवक्ता नितिन मंगला (Advocate Nitin Mangla)।
  • सीबीएसई (CBSE) की ओर से: सीबीएसई के स्थायी विधिक परामर्शदाता।
  • केंद्र सरकार व एनसीईआरटी की ओर से: केंद्र सरकार के स्थायी वकील (CGSC)।
  • प्रासंगिक कानून एवं विधिक प्रावधान:
    • भारत का संविधान — अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार), अनुच्छेद 21 (गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का अधिकार) एवं अनुच्छेद 226 (उच्च न्यायालय का रिट क्षेत्राधिकार)
    • सीबीएसई परीक्षा उपनियम (CBSE Examination Bye-Laws) — परीक्षा कक्ष में अनुमत व प्रतिबंधित सामग्रियों के नियम
    • राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 (National Education Policy – NEP 2020) — मूल्यांकन प्रणाली में सुधार संबंधी अनुशंसाएं
  • संबद्ध न्यायिक सिद्धांत:
    • शैक्षणिक नीतियों में संस्थागत जवाबदेही और छात्र कल्याण का विधिक मानक: ‘शिक्षा बोर्डों का प्राथमिक दायित्व छात्रों के मूल्यांकन को आधुनिक, व्यावहारिक और तनाव-मुक्त बनाना है; जब बोर्ड की अपनी विशेषज्ञ पाठ्यचर्या समिति (Curriculum Committee) आधिकारिक रूप से यह संस्तुति कर चुकी हो कि जटिल वाणिज्यिक व गणितीय गणनाओं हेतु बेसिक कैलकुलेटर की अनुमति दी जानी चाहिए, तो बिना किसी विधिक औचित्य के ऐसी सिफारिश को वर्षों तक लंबित रखना प्रशासनिक शिथिलता और मनमानापन (Arbitrariness) है; अन्य समरूप राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय बोर्डों में उपलब्ध आधुनिक सुविधाओं के संदर्भ में छात्रों के मूल्यांकन मानकों का परीक्षण अनुच्छेद 14 की कसौटी पर किया जा सकता है; तथा तकनीकी प्रगति के दौर में यांत्रिक गणना के बजाय छात्रों की वैचारिक और विश्लेषणात्मक दक्षता (Conceptual Understanding) की जांच को प्राथमिकता दिया जाना गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के अधिकार का अनिवार्य अंग है।’
  • वर्तमान स्थिति व आगामी प्रक्रिया: दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा जारी नोटिस के अनुपालन में सीबीएसई, एनसीईआरटी और केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय को अगले 6 सप्ताह के भीतर अपने विस्तृत हलफनामे में यह स्पष्ट करना होगा कि नवंबर 2024 की समिति के निर्णय को अब तक लागू क्यों नहीं किया गया, और क्या आगामी 2027 की 12वीं बोर्ड परीक्षाओं में छात्रों को कैलकुलेटर की अनुमति देने पर बोर्ड कोई नीतिगत अधिसूचना जारी करने जा रहा है।

Class XII Board: मामले का संक्षिप्त विवरण (At A Glance)

विवरणजानकारी
संबंधित अदालतदिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court)
पीठकार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नितिन वासुदेव सांम्ब्रे एवं न्यायमूर्ति संजय शर्मा
याचिकाकर्ताविशाल दुआ (पीतमपुरा निवासी) व 10 अन्य अभिभावक | प्रतिनिधित्व: अधिवक्ता नितिन मंगला
प्रतिवादी पक्षकेंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE), NCERT एवं भारत सरकार
मूल मांग12वीं की बोर्ड परीक्षाओं (विशेषकर गणित और अकाउंटेंसी) में कैलकुलेटर के उपयोग की अनुमति देना।
अदालत का अंतरिम आदेशनोटिस जारी: सीबीएसई, एनसीईआरटी और केंद्र को 6 सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश।
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