Friday, August 14, 2026
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Bar News: संपत्ति दलालों और भ्रष्टाचार के केंद्र बन गए वकीलों के कार्यालय व कक्ष…पंजाब व हरियाणा बार काउंसिल पर बड़ी टिप्पणी

Bar News: सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब और हरियाणा के बार काउंसिल गंभीर टिप्पणी करते हुए कहा कि वे शर्मनाक कृत्यों और भ्रष्टाचार व अनियमितताओं में लिप्त हैं।

विशेष जांच टीम का गठन कर जांच कराएं…

न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति एन. कोटिस्वर सिंह की पीठ ने कहा कि यदि आवश्यक हुआ तो इन काउंसिल्स की गतिविधियों की जांच के लिए विशेष जांच टीम (SIT) गठित की जाएगी और विशेष रूप से हरियाणा में बार काउंसिल्स के बैंक खातों की जांच की जाएगी। वकीलों के कार्यालय और कक्ष (चेंबर) संपत्ति दलालों और भ्रष्टाचार के केंद्र बन गए हैं। ये लोग हर प्रकार की शर्मनाक गतिविधियों और अनियमितताओं में लिप्त हैं। हमें इसकी पूरी जानकारी है और हम इसे हल्के में नहीं लेंगे। इन्होंने वकालत के पेशे को बदनाम किया है।

करनाल बार एसोसिएशन के चुनाव को लेकर हुई सुनवाई

पीठ एक वकील द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें करनाल बार एसोसिएशन के चुनाव में उनकी अयोग्यता को चुनौती दी गई थी। अदालत ने बार काउंसिल्स को नोटिस जारी किया और वरिष्ठ अधिवक्ता आर. एस. चीमा की सहायता मांगी, जो करनाल बार एसोसिएशन के सदस्य हैं। अदालत ने उन्हें सुझाव देने को कहा कि कुछ वरिष्ठ और प्रतिष्ठित वकीलों को अस्थायी रूप से बार बॉडी के पदभार संभालने के लिए नियुक्त किया जा सकता है।

वोट डाले बिना ही उम्मीदवारों को निर्विरोध विजयी घोषित किया गया

याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता नरेंद्र हुड्डा ने अदालत को बताया कि मतदान केंद्र के बाहर बैठे निर्वाचन अधिकारी ने बिना कोई वोट डाले ही सभी उम्मीदवारों को निर्विरोध विजेता घोषित कर दिया। अधिवक्ता संदीप चौधरी, जिन्हें जिला बार बॉडी के चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित कर दिया गया था, ने अदालत में दलील दी कि इस फैसले ने उनके एक वकील के रूप में अधिकारों का हनन किया है। हुड्डा ने कहा कि उनके मुवक्किल को चुनाव लड़ने से रोका गया था, क्योंकि उन पर धन के दुरुपयोग (फंड मिसएप्रोप्रिएशन) की जांच लंबित थी।

बीसीआई में अपील दायर की गई थी…

चौधरी ने इस फैसले के खिलाफ बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) में अपील दायर की थी, जहां उनकी अयोग्यता पर रोक लगा दी गई थी। हालांकि, BCI के आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई, और 27 फरवरी को हाईकोर्ट ने चौधरी को दी गई राहत को रद्द कर दिया। इसके अगले ही दिन चुनाव आयोजित किया गया, और एक नए निर्वाचन अधिकारी ने मतदान केंद्र जाकर चार अन्य उम्मीदवारों को निर्विरोध विजेता घोषित कर दिया।

हरियाणा बार काउंसिल पर सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणी

न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि हरियाणा राज्य बार काउंसिल शर्मनाक संगठन बन गया है। जब हुड्डा ने चौधरी पर लगे आरोपों का जिक्र किया, तो न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा, “ये आरोप सही हो सकते हैं, लेकिन हमें इस बात में कोई संदेह नहीं कि इन सभी पदाधिकारियों का व्यवहार शर्मनाक है और इन्होंने वकालत के पेशे को बदनाम किया है। मैंने कई जिला बार एसोसिएशन देखी हैं, वे सभी भ्रष्टाचार और अनियमितताओं में लिप्त हैं। हरियाणा सरकार ने इन्हें बढ़ावा दिया है। ये अधिवक्ताओं के चेंबर अब संपत्ति दलालों के अड्डे बन गए हैं। वहां कोई भी गंभीर पेशेवर वकील नहीं बैठता।

बार बॉडी की जिम्मेदारी अस्थायी रूप से वरिष्ठ वकीलों को सौंपने का सुझाव

पीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता आर. एस. चीमा से अगली सुनवाई में समय देने का अनुरोध किया और उन्हें कुछ वरिष्ठ वकीलों के नाम सुझाने को कहा, जो अस्थायी रूप से बार बॉडी के पदों का प्रभार संभाल सकें। अदालत ने उन्हें ऑनलाइन (वर्चुअल रूप से) सुनवाई में शामिल होने की अनुमति भी दी।

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