At A Glance | एक नजर में
- कमेटी का गठन: 3 सदस्यीय पैनल में जस्टिस अनु शिवरामन, जस्टिस एस.जी. पंडित और जस्टिस मोहम्मद नवाज शामिल हैं।
- प्रस्तावित क्षेत्र: मंगलुरु, उडुपी, शिवमोगा, चिकमगलूर, कोडागु-मडिकेरी, हसन, दावणगेरे और उत्तर कन्नड़।
- वर्तमान स्थिति: कर्नाटक हाईकोर्ट की मुख्य पीठ बेंगलुरु में है, जबकि धारवाड़ और कलबुर्गी में दो स्थायी पीठें पहले से कार्यरत हैं।
- कमेटी का कार्य: सभी हितधारकों (Stakeholders) से परामर्श करना, केस पेंडेंसी व इंफ्रास्ट्रक्चर की समीक्षा करना और रिपोर्ट सौंपना।
बेंगलुरु: कर्नाटक के दूरदराज, तटीय और मलनाड जिलों के नागरिकों के लिए ‘न्याय तक सुगम पहुंच’ (Access to Justice) सुनिश्चित करने, मुकदमों के विकेंद्रीकरण और नई सर्किट या स्थायी पीठों (Circuit/Permanent Benches) की स्थापना की दशकों पुरानी मांग पर कर्नाटक हाईकोर्ट ने एक बड़ा और नीतिगत प्रशासनिक कदम उठाया है।
रजिस्ट्रार जनरल एम. चंद्रशेखर रेड्डी द्वारा 29 सितंबर 2026 को जारी आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, यह समिति तत्काल प्रभाव से कार्य करेगी और कानूनी बिरादरी, विभिन्न बार एसोसिएशनों तथा राज्य सरकार सहित सभी संबंधित हितधारकों (Stakeholders) से व्यापक विचार-विमर्श करने के बाद अपनी विस्तृत रिपोर्ट मुख्य न्यायाधीश को सौंपेगी। कर्नाटक उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति विभु बाखरू ने राज्य के 8 प्रमुख जिलों—मंगलुरु, उडुपी, शिवमोगा, चिकमगलूर, कोडगु-मडिकेरी, हासन, दावणगेरे और उत्तर कन्नड़ (कारवार)—में हाईकोर्ट की नई बेंचों की स्थापना की व्यवहार्यता (Feasibility) का व्यापक अध्ययन करने के लिए 3 वरिष्ठ न्यायाधीशों की एक उच्चस्तरीय समिति गठित की है।
तीन सदस्यीय न्यायिक समिति की संरचना
मुख्य न्यायाधीश द्वारा गठित उच्चस्तरीय समिति में उच्च न्यायालय के निम्नलिखित वरिष्ठ न्यायाधीश शामिल हैं:
- न्यायमूर्ति अनु शिवरामन (अध्यक्ष/वरिष्ठ सदस्य)
- न्यायमूर्ति एस.जी. पंडित (सदस्य)
- न्यायमूर्ति मोहम्मद नवाज (सदस्य)
समिति के विचारार्थ विषय (Terms of Reference) एवं अधिदेश
अधिसूचना के अनुसार, समिति को निम्नलिखित प्रमुख विधिक और प्रशासनिक पहलुओं की पड़ताल का दायित्व सौंपा गया है:
- पहचान किए गए क्षेत्रों का व्यवहार्यता अध्ययन: चिन्हित 8 जिलों (विशेषकर तटीय कर्नाटक और पश्चिमी घाट क्षेत्र) में क्या एक स्वतंत्र सर्किट बेंच या स्थायी बेंच स्थापित करना व्यावहारिक, आर्थिक और न्यायिक दृष्टि से उचित है।
- हितधारकों से अनिवार्य परामर्श: बेंगलुरु स्थित मूल पीठ के वकीलों, चिन्हित जिलों के स्थानीय बार एसोसिएशनों (मंगलुरु, मडिकेरी, हासन, चिकमगलूर, शिवमोगा, कारवार), न्यायिक अधिकारियों और नागरिक संगठनों से प्रत्यक्ष संवाद और आपत्तियां/सुझाव आमंत्रित करना।
- व्यापक रिपोर्ट प्रस्तुत करना: केस पेंडेंसी, मुकदमों के भौगोलिक वितरण और आवश्यक बुनियादी ढांचे का विश्लेषण कर मुख्य न्यायाधीश को अंतिम संस्तुति देना।
कर्नाटक में हाईकोर्ट बेंचों की वर्तमान स्थिति
वर्तमान में कर्नाटक उच्च न्यायालय तीन स्थानों से संचालित होता है:
- मुख्य पीठ (Principal Seat): बेंगलुरु (अट्टारा कचेरी)।
- धारवाड़ पीठ (Dharwad Bench): उत्तर कर्नाटक के उत्तरी जिलों के लिए (वर्ष 2008 में सर्किट बेंच के रूप में शुरू, बाद में 2013 में स्थायी बेंच बनी)।
- कलबुर्गी पीठ (Kalaburagi Bench): हैदराबाद-कर्नाटक/कल्याण कर्नाटक क्षेत्र के लिए (वर्ष 2008 में सर्किट बेंच, 2013 में स्थायी बेंच)।
तटीय कर्नाटक (दक्षिण कन्नड़, उडुपी) और मलनाड क्षेत्र के वादकारियों और वकीलों का लंबे समय से तर्क रहा है कि उन्हें अपने उच्च न्यायालय के मामलों की पैरवी के लिए 350 से 400 किलोमीटर दूर बेंगलुरु की यात्रा करनी पड़ती है, जिससे समय और धन दोनों का भारी अपव्यय होता है।
विवाद की पृष्ठभूमि: सरकार का प्रस्ताव बनाम बेंगलुरु बार (AAB) का कड़ा विरोध
1. राज्य सरकार का रुख और बुनियादी ढांचे की पेशकश
- 13 मई 2026 को तत्कालीन मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति विभु बाखरू को एक औपचारिक पत्र लिखकर मंगलुरु में एक नई सर्किट बेंच स्थापित करने के प्रस्ताव पर विचार करने का आग्रह किया था।
- राज्य सरकार ने इस प्रस्ताव को पूर्ण वित्तीय व प्रशासनिक सहयोग देने का आश्वासन दिया था।
- सरकार ने मंगलुरु में पुराने डिप्टी कमिश्नर (DC) कार्यालय परिसर की पहचान भी कर ली थी, जहां अदालत के संचालन हेतु लगभग 50,000 वर्ग फुट जगह को पुनर्विकसित करने तथा न्यायाधीशों के लिए आवासीय क्वार्टरों की पहचान करने का खाका तैयार किया गया था।
2. एडवोकेट्स एसोसिएशन बेंगलुरु (AAB) का कड़ा विरोध
- सरकार के इस कदम के तुरंत बाद, 18 मई 2026 को एडवोकेट्स एसोसिएशन बेंगलुरु (AAB) ने मुख्य न्यायाधीश को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपकर मंगलुरु में नई पीठ स्थापित करने का कड़ा विरोध किया।
- एएबी की मुख्य आपत्तियां निम्नलिखित थीं:
- डेटा और अध्ययन का अभाव: बिना किसी सांख्यिकीय अध्ययन (Statistical/Empirical Study) और मुकदमों की वास्तविक पेंडेंसी की जांच के बेंच स्थापित करने का कोई भी फैसला “अपरिपक्व” (Premature) होगा।
- अखंडता का प्रश्न: हाईकोर्ट के अत्यधिक विखंडन से न्यायशास्त्र की एकरूपता प्रभावित हो सकती है।
- हितधारकों से अनदेखी: बेंगलुरु और अन्य संबंधित जिलों (मडिकेरी, हासन, कारवार आदि) के बार एसोसिएशनों की राय लिए बिना कोई एकतरफा कदम नहीं उठाया जाना चाहिए।
विधिक एवं संवैधानिक प्रक्रिया
- राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 की धारा 51(2) एवं 51(3)
- उच्च न्यायालय की मुख्य पीठ से इतर नई स्थायी या सर्किट पीठों की स्थापना राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 की धारा 51 के तहत शासित होती है।
- इसके तहत राज्य के राज्यपाल, संबंधित उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के औपचारिक परामर्श और सहमति से ही किसी अन्य स्थान पर सर्किट बेंच की स्थापना का आदेश दे सकते हैं।
- जसवंत सिंह आयोग की सिफारिशें:
- केंद्र सरकार द्वारा गठित ऐतिहासिक ‘जसवंत सिंह आयोग’ (1985) ने हाईकोर्ट की नई बेंचों की स्थापना के लिए कड़े मानदंड तय किए थे—जिसमें भौगोलिक दूरी, संचार साधन, क्षेत्र से उत्पन्न मुकदमों की संख्या, बुनियादी ढांचा और बार का व्यापक समर्थन शामिल है।
प्रशासनिक विवरण
- प्राधिकरण: कर्नाटक उच्च न्यायालय (मुख्य न्यायाधीश सचिवालय)
- अधिसूचना संदर्भ: मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति विभु बाखरू के निर्देशानुसार जारी अधिसूचना (दिनांक 29 सितंबर 2026)
- जारीकर्ता: रजिस्ट्रार जनरल एम. चंद्रशेखर रेड्डी
- समिति के सदस्य: न्यायमूर्ति अनु शिवरामन, न्यायमूर्ति एस.जी. पंडित और न्यायमूर्ति मोहम्मद नवाज
- प्रस्तावित जिले/क्षेत्र: मंगलुरु, उडुपी, शिवमोगा, चिकमगलूर, कोडगु-मडिकेरी, हासन, दावणगेरे और उत्तर कन्नड़ (कारवार)
- संबद्ध वैधानिक प्रावधान:
- राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 की धारा 51(2) एवं 51(3) (उच्च न्यायालय की नई पीठों की स्थापना की प्रक्रिया)
- भारत का संविधान – अनुच्छेद 21 एवं अनुच्छेद 39A (शीघ्र न्याय और समान अवसर के आधार पर न्याय तक सुलभ पहुंच)
- संबद्ध न्यायिक नजीरें:
- फेडरेशन ऑफ बार एसोसिएशंस इन कर्नाटक बनाम भारत संघ (2000, सुप्रीम कोर्ट) — ‘हाईकोर्ट की नई बेंच स्थापित करने का निर्णय कार्यपालिका या राजनीतिक दबाव से नहीं, बल्कि मुख्य न्यायाधीश के प्रभावी और सार्थक परामर्श से ही लिया जा सकता है।’
- वर्तमान स्थिति: तीन सदस्यीय न्यायिक समिति औपचारिक रूप से सक्रिय; समिति द्वारा जल्द ही जिला बार एसोसिएशनों से आंकड़े जुटाने और जनसुनवाई का कार्यक्रम तय किया जाना प्रतीक्षित।
Feasibility Of Benches:Key Indicators | मुख्य बिंदु
| संकेत बिंदु | विवरण |
| समिति के सदस्य | जस्टिस अनु शिवरामन, जस्टिस एस.जी. पंडित, जस्टिस मोहम्मद नवाज |
| अधिसूचना जारीकर्ता | रजिस्ट्रार जनरल एम. चंद्रशेखर रेड्डी (मुख्य न्यायाधीश विभु बाखरू के निर्देश पर) |
| प्रस्ताव का समर्थन | राज्य सरकार (पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने मंगलुरु में सर्किट बेंच का समर्थन किया था और बुनियादी ढांचा देने का आश्वासन दिया था)। |
| विरोध का रुख | एडवोकेट्स एसोसिएशन बेंगलुरु (AAB) ने बिना सांख्यिकीय अध्ययन और बार एसोसिएशनों से सलाह के इस प्रस्ताव का विरोध किया था। |
| प्रस्तावित इंफ्रास्ट्रक्चर | मंगलुरु में पुराने उपायुक्त (DC) कार्यालय की 50,000 वर्ग फुट जगह को कोर्ट परिसर के रूप में बदलने का प्रस्ताव। |

