Monday, August 17, 2026
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Karnataka Court: कर्नाटक की अदालत में पेश हुई 5 वर्ष पहले मर चुकी महिला, यह जानकर सब हो गए हैरान…पढ़िए रोचक मामला

Karnataka Court: कर्नाटक की अदालत के सामने एक रोचक मामला पेश हुआ, जिसमें वर्ष 2020 में पति द्वारा कथित तौर पर हत्या की जा चुकी महिला मालिगे का जीवित होने का रेकॉर्ड पेश हुआ।

लगभग डेढ साल से पति हत्या मामले में जेल में है

अदालत ने मृत महिला के जीवित पाए जाने को लेकर पुलिस पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। इसको लेकर सख्त रुख अपनाते हुए पुलिस अधीक्षक (SP) को निर्देश दिया है कि 17 अप्रैल से पहले इस मामले में एक विस्तृत रिपोर्ट पेश करें। वर्ष 2020 में महिला की हत्या को लेकर उसके पति सुरेश ने लगभग डेढ़ साल जेल में बिताए। अब वह जीवित मिली।

वर्ष 2020 में लापता हुई थी मालिगे

मामला 38 वर्षीय सुरेश से जुड़ा है, जिसने दिसंबर 2020 में कोडगु जिले के कुशलनगर से अपनी पत्नी मालिगे के लापता होने की शिकायत दर्ज कराई थी। बाद में पुलिस ने पेरियापटना तालुक के बेट्टदापुर गांव में एक महिला का कंकाल बरामद किया और कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किया कि वह कंकाल मालिगे का है और सुरेश ने उसकी हत्या की थी। इसके बाद सुरेश को जेल भेज दिया गया। लेकिन 1 अप्रैल को मालिगे मदिकेरी में सुरेश के एक दोस्त को एक अन्य व्यक्ति के साथ दिखाई दी। इसके बाद उसे कोर्ट में पेश किया गया।

17 अप्रैल तक एसपी से मांगी पुलिस की गंभीर चूक पर रिपोर्ट

अदालत ने पुलिस की गंभीर चूक को देखते हुए SP को निर्देश दिया कि वे मामले पर 17 अप्रैल तक एक संपूर्ण रिपोर्ट प्रस्तुत करें। सुरेश के वकील पांडु पूजारी ने पत्रकारों से बात करते हुए बताया, “सुरेश, जो कुशलनगर के एक गांव से है, ने 2020 में कुशलनगर ग्रामीण पुलिस थाने में अपनी पत्नी के लापता होने की शिकायत दी थी। उसी समय के आसपास बेट्टदापुर पुलिस स्टेशन सीमा में एक कंकाल मिला था। एक साल बाद, पुलिस ने सुरेश को गिरफ्तार कर लिया और उस पर अपनी पत्नी की हत्या करने का आरोप लगाया।

पुलिस ने कंकाल का डीएनए टेस्ट जांच के लिए भेजा था…

पुलिस ने उस कंकाल का डीएनए टेस्ट कराने के लिए मालिगे की मां के खून का नमूना भेजा था। लेकिन डीएनए रिपोर्ट आने से पहले ही पुलिस ने कोर्ट में अंतिम आरोप पत्र दाखिल कर दिया। बाद में, सुरेश को जमानत मिल गई और जब डीएनए रिपोर्ट आई, तो वह कंकाल मालिगे का नहीं निकला। जब डीएनए रिपोर्ट का हवाला देते हुए आरोपमुक्त करने की अर्जी दी गई, तो अदालत ने इसे अस्वीकार कर दिया और गवाहों की जांच की मांग की, जिसमें मालिगे की मां और गांव वाले भी शामिल थे।
वकील ने बताया कि सभी गवाहों ने कोर्ट में बयान दिया कि वह (मालिगे) जीवित है और किसी के साथ भाग गई थी। कोर्ट ने कुशलनगर और बेट्टदापुर पुलिस से आरोप पत्र में की गई चूकों पर सवाल किया, लेकिन उन्होंने अपनी जांच का बचाव करते हुए दावा किया कि कंकाल मालिगे का ही था और सुरेश ने उसकी हत्या की थी।

एक अप्रैल 2025 को महिला होटल में भोजन करते हुए पाई गई

इसी बीच, 1 अप्रैल को मालिगे मदिकेरी के एक होटल में एक व्यक्ति के साथ भोजन करती हुई पाई गई। उसे सुरेश के एक दोस्त ने देखा, जो आरोप पत्र में गवाह के रूप में नामित है। इसके बाद उसे मदिकेरी पुलिस स्टेशन ले जाया गया और फिर जिला न्यायालय में एक “तत्काल सुनवाई अर्जी” दाखिल की गई। कोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस को आदेश दिया कि महिला को तुरंत कोर्ट में पेश किया जाए। कोर्ट में पेश किए जाने पर मालिगे ने स्वीकार किया कि वह किसी अन्य व्यक्ति के साथ भाग गई थी और उससे शादी कर ली थी। उसने यह भी कहा कि उसे सुरेश के साथ क्या हुआ, इसकी कोई जानकारी नहीं थी। वह मदिकेरी से महज 25-30 किलोमीटर दूर स्थित शेट्टिहल्ली गांव में रह रही थी, लेकिन पुलिस ने उसे खोजने का कोई प्रयास नहीं किया।

वकील ने कोर्ट के सामने रखे दो अहम प्रश्न

इस मामले को गंभीर और दुर्लभ करार देते हुए वकील ने कहा कि कोर्ट के सामने अब दो महत्वपूर्ण प्रश्न हैं: वह ह कंकाल किसका था? पुलिस ने झूठा आरोप पत्र क्यों दाखिल किया? “कोर्ट ने SP और जांच अधिकारियों को तलब किया था, लेकिन उनके पास कोई जवाब नहीं था। अब कोर्ट ने निर्देश दिया है कि SP 17 अप्रैल से पहले सभी चूकों पर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करें, जिसके बाद सुरेश को निर्दोष घोषित करने पर फैसला होगा। वकील ने बताया कि वह अदालत के अंतिम आदेश की प्रतीक्षा कर रहे हैं और उसके बाद हाईकोर्ट में एक रिट याचिका दायर करेंगे ताकि सुरेश को झूठे केस में फंसाए जाने और उसके मानसिक आघात के लिए न्याय और मुआवज़ा मिल सके। मैं अपने मुवक्किल के लिए इंसाफ और हर्जाने की मांग करूंगा। हम मानवाधिकार आयोग और अनुसूचित जनजाति आयोग के पास भी जाएंगे क्योंकि सुरेश एक गरीब आदिवासी समुदाय से हैं। इसके साथ ही वकील ने यह भी मांग की कि कंकाल के मामले की दोबारा जांच हो और यह पता लगाया जाए कि क्या पुलिस ने जानबूझकर सुरेश को आरोपी बनाकर दोनों मामलों को बंद करने की साजिश रची थी।

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