Thursday, October 1, 2026
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Instagram Feature: आप हेरफेर की अनुमति दे रहे हैं… यह बंदूक से भी बदतर है; इंस्टाग्राम के ‘Remix’ फीचर पर हाईकोर्ट की टिप्पणी; दृष्टि IAS के विकास दिव्यकीर्ति को राहत

अदालत की मुख्य तीखी टिप्पणियां

  1. इंस्टाग्राम के ‘रिमिक्स’ फीचर पर सवाल:जज भंभानी ने मेटा के वकील वरुण पाठक से सवाल किया कि कैसे प्लेटफॉर्म पर कोई भी व्यक्ति किसी दूसरे के वीडियो को उठाकर उसमें खुद को जोड़कर अपना वीडियो बना सकता है। कोर्ट ने कहा:“आप हेरफेर (Manipulation) की इजाजत दे रहे हैं। यह कॉपीराइट उल्लंघन का एक जरिया है। आपके पास यह एक खुराफाती/शरारती फीचर (Mischievous Feature) है… आप इतने शक्तिशाली उपकरण बना रहे हैं और फिर इन्हें किसी ‘अज्ञात व्यक्ति’ (Ghost) को सौंप रहे हैं। आज हमारे देश में अगर किसी को बंदूक रखनी हो, तो उसे पूरी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है… यह तो बंदूक से भी बदतर है।”
  2. ‘कॉपीराइट स्ट्राइक’ के दुरुपयोग पर चिंता:अदालत ने स्वीकार किया कि सोशल मीडिया पर फर्जी कॉपीराइट स्ट्राइक करने वाले को तुरंत सफलता मिल जाती है, जबकि जिस पर स्ट्राइक होती है (असली क्रिएटर), उसे अपना अकाउंट या कंटेंट बहाल कराने के लिए पूरी जटिल प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है।

डॉ. विकास दिव्यकीर्ति की ओर से क्या तर्क दिए गए?

  • व्यक्तित्व अधिकारों और नैतिकता का हनन: वरिष्ठ अधिवक्ता दिया कपूर ने तर्क दिया कि विकास दिव्यकीर्ति के लेक्चर्स का आधा-अधूरा और गलत संदर्भ में इस्तेमाल करके उन्हें “हिंदू-विरोधी” या “ब्राह्मण-विरोधी” दिखाने की कोशिश की जा रही है।
  • डीपफेक और सट्टेबाजी के विज्ञापन: कोर्ट को बताया गया कि दिव्यकीर्ति के चेहरे और आवाज का डीपफेक बनाकर सट्टेबाजी (Betting) के विज्ञापनों में उनका फर्जी प्रचार किया जा रहा है।
  • इंटरमीडिएटरी का रवैया: याचिकाकर्ता के पक्ष ने कहा कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म खुद को “भगवान समझ रहे हैं” (Playing God) और बिना जांचे-परखे किसी का भी अकाउंट सस्पेंड कर देते हैं, जिससे क्रिएटर्स के आजीविका और व्यापार के अधिकार प्रभावित होते हैं।

मेटा (Meta) की सफाई

मेटा के वकील ने कहा कि यह प्रक्रिया स्वचालित (Automated) है और प्लेटफॉर्म खुद “भगवान नहीं बन रहा”। उन्होंने तर्क दिया कि यदि हर शिकायत पर मानवीय निगरानी अनिवार्य कर दी जाएगी, तो भारत में चीन जैसा माहौल बन जाएगा जहां हर कंटेंट पर कड़ी नजर रखनी पड़ती है। उन्होंने कहा कि उपयोगकर्ता IT अधिनियम के तहत शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

नई दिल्ली: सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डीपफेक (Deepfake) वीडियो के जरिए विख्यात हस्तियों के व्यक्तित्व अधिकारों (Personality Rights) के हनन, भ्रामक विज्ञापनों और कॉपीराइट सामग्री की मनमानी रीमिक्सिंग पर दिल्ली उच्च न्यायालय ने अत्यंत सख्त और गंभीर रुख अपनाया है। उच्च न्यायालय ने इंस्टाग्राम (Instagram) के उस फीचर (संभवतः ‘Remix’ फीचर) पर कड़ा ऐतराज जताया है जिसके माध्यम से मूल क्रिएटर के वीडियो को बिना उसकी अनुमति के बदलकर री-अपलोड किया जा सकता है।

न्यायमूर्ति अनूप जयराम भंभानी की एकल पीठ ने ‘दृष्टि आईएएस’ (Drishti IAS) के संस्थापक एवं प्रख्यात शिक्षक डॉ. विकास दिव्यकीर्ति द्वारा दायर वाद पर सुनवाई करते हुए मेटा के अधिवक्ता से तीखे सवाल किए। अदालत ने टिप्पणी की कि तकनीक के नाम पर ऐसे खतरनाक उपकरण बनाकर एक अज्ञात और अदृश्य चेहरे (Ghost) को सौंप दिए गए हैं, जिनका इस्तेमाल लोगों की साख को बर्बाद करने और अवैध कॉपीराइट उल्लंघन के लिए हो रहा है।

अदालत ने डॉ. दिव्यकीर्ति को अंतरिम राहत (Interim Relief) प्रदान करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को उनके चेहरे व आवाज का उपयोग कर बनाए गए सट्टेबाजी (Betting) से जुड़े डीपफेक विज्ञापनों और अपमानजनक वीबलिंक्स को तुरंत हटाने (Takedown) तथा उल्लंघन करने वाले उपयोगकर्ताओं की बेसिक सब्सक्राइबर जानकारी (BSI) और आईपी लॉग्स (IP Logs) साझा करने के निर्देश दिए हैं।

इंस्टाग्राम फीचर पर उच्च न्यायालय के तीखे मौखिक अवलोकन

1. ‘आप हेरफेर की छूट दे रहे हैं; यह बंदूक से भी बदतर टूल है’ न्यायमूर्ति अनूप जयराम भंभानी ने मेटा के अधिवक्ता वरुण पाठक को संबोधित करते हुए इंस्टाग्राम के वीडियो मॉड्यूलेशन/रीमिक्स टूल पर गंभीर चिंता जताई:

“मिस्टर पाठक, मुझे बताइए, आपके इंस्टाग्राम पर ऐसा फीचर मौजूद है जहां कोई किसी दूसरे का वीडियो उठा सकता है, उसमें खुद को जोड़ सकता है और उसे अपना वीडियो बना सकता है। उदाहरण के लिए, कोई व्यक्ति कोई रेसिपी बना रहा है, दूसरा व्यक्ति उसका पूरा वीडियो ले सकता है, उसी रेसिपी के अनुसार खुद को जोड़ सकता है और उसे अपने हैंडल पर चला सकता है।

आप हेरफेर (Manipulation) की अनुमति दे रहे हैं। यह कॉपीराइट उल्लंघन का एक प्रत्यक्ष उपकरण (Tool for copyright violation) है। क्या आपका प्लेटफॉर्म इसकी अनुमति देता है? यह कॉपीराइट उल्लंघन का खुला प्रमाण है। आपने वहां एक बेहद शरारतपूर्ण फीचर (Mischievous Feature) तैयार कर रखा है।

आप ऐसे शक्तिशाली उपकरण बना रहे हैं और फिर इसे किसी भूत (Ghost) को सौंप देते हैं—आपको पता ही नहीं होता कि इन उपकरणों का इस्तेमाल कौन करने जा रहा है। आज हमारे देश में यदि किसी को बंदूक (Gun) रखनी हो, तो उसे एक पूरी आवेदन और अनुमोदन प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है… यह तो बंदूक से भी बदतर है (This is worse than a gun)।“

मेटा के वकील वरुण पाठक ने अदालत को आश्वस्त किया कि वे पीठ द्वारा उठाए गए तकनीकी व विधिक पहलुओं की पड़ताल करेंगे।

2. कॉपीराइट स्ट्राइक के दुरुपयोग पर अदालत की चिंता

  • सुनवाई के दौरान सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के मनमाने कॉपीराइट स्ट्राइक तंत्र पर भी चर्चा हुई।
  • न्यायाधीश ने स्वीकार किया कि कई बार सोशल मीडिया के स्वचालित स्ट्राइक सिस्टम के अन्यायपूर्ण परिणाम होते हैं:“जो व्यक्ति फर्जी कॉपीराइट स्ट्राइक (Fake Copyright Strike) करता है, वह तुरंत सफल हो जाता है; परंतु जिस व्यक्ति पर स्ट्राइक की जाती है, उसे अपनी सामग्री या खाता बहाल कराने के लिए एक लंबी और जटिल प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है।”

डॉ. विकास दिव्यकीर्ति की ओर से उठाए गए विधिक आधार

डॉ. दिव्यकीर्ति की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता दीया कपूर ने अदालत के समक्ष कई गंभीर उल्लंघन प्रस्तुत किए:

  1. व्यक्तित्व, कॉपीराइट और नैतिक अधिकारों का हनन:
    • डॉ. दिव्यकीर्ति के शैक्षणिक लेक्चर्स के अंशों को संदर्भ से काटकर (Selectively Clipped) दुर्भावनापूर्ण तरीके से प्रस्तुत किया जा रहा है, जिससे उन्हें ‘हिंदू-विरोधी’ या ‘ब्राह्मण-विरोधी’ के रूप में चित्रित कर उनकी सार्वजनिक छवि को नुकसान पहुंचाया जा सके।
  2. डीपफेक और फर्जी प्रचार (Deepfakes & Betting Ads):
    • वरिष्ठ अधिवक्ता ने दिखाया कि एआई और डीपफेक तकनीक के माध्यम से डॉ. दिव्यकीर्ति के चेहरे और आवाज की क्लोनिंग करके अवैध सट्टेबाजी (Online Betting) और अन्य वाणिज्यिक उत्पादों के फर्जी विज्ञापन प्रसारित किए जा रहे हैं।
  3. मध्यवर्तियों द्वारा ‘ईश्वर बनने’ (Playing God) का आरोप:
    • वरिष्ठ अधिवक्ता दीया कपूर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की एकतरफा कार्यप्रणाली पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा:“संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत सरकार भी किसी का वैध व्यवसाय मनमाने ढंग से बंद नहीं कर सकती, परंतु ये मध्यवर्ती प्लेटफॉर्म ‘ईश्वर बनने’ (Playing God) की भूमिका में हैं। वे बिना यह जांचे कि कॉपीराइट शिकायत असली है या फर्जी, मनमाने तरीके से तय करते हैं कि किसका खाता रहेगा और किसका निलंबित होगा। उन्हें खाते निलंबित करने की यह बेलगाम शक्ति कहां से मिलती है?”
  4. आईटी नियमों की अकुशलता:
    • मेटा के इस तर्क पर कि वादी को आईटी नियमों के तहत शिकायत दर्ज करनी चाहिए, वरिष्ठ अधिवक्ता ने प्रत्युत्तर दिया कि वह फोरम अत्यधिक बोझिल और निष्प्रभावी है। वादी सीधे अदालत में अपने संवैधानिक और संपत्ति अधिकारों (Proprietary Rights) के प्रवर्तन की मांग कर रहे हैं।

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मेटा (Meta) का बचाव

  • मेटा के अधिवक्ता वरुण पाठक ने इन आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि प्लेटफॉर्म पर दैनिक आधार पर अपलोड होने वाले करोड़ों वीडियो पर लगातार मानवीय निगरानी रखना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है।
  • उन्होंने कहा: “हम ईश्वर की भूमिका में नहीं हैं; यह प्रक्रिया पूरी तरह स्वचालित (Automated) है। यदि याचिकाकर्ता की हर बात को जस का तस लागू किया गया, तो पूरी प्रणाली ठप हो जाएगी। हम चीन की तरह हो जाएंगे, जहां सब कुछ लगातार ट्रैक और सेंसर किया जाता है।”

उच्च न्यायालय द्वारा जारी अंतरिम निर्देश

  1. डीपफेक व आपत्तिजनक सामग्री को हटाना (Takedown):
    • अदालत ने सोशल मीडिया मध्यवर्तियों को निर्देश दिया कि वे डॉ. विकास दिव्यकीर्ति से संबंधित विवादित डीपफेक वीडियो, सट्टेबाजी के भ्रामक विज्ञापनों और कॉपीराइट का उल्लंघन करने वाले विशिष्ट वेबलिंक्स को तुरंत प्रभाव से हटाएं या ब्लॉक करें।
  2. अपराधियों की पहचान व डिजिटल लॉग्स का प्रकटीकरण:
    • अदालत ने मध्यवर्तियों को निर्देश दिया कि वे उल्लंघनकारी सामग्री अपलोड करने वाले अज्ञात प्रोफाइलों की बेसिक सब्सक्राइबर जानकारी (BSI), ईमेल, मोबाइल नंबर और आईपी लॉग्स (IP Logs) अदालत/वादी को उपलब्ध कराएं ताकि उनके खिलाफ वास्तविक कानूनी कार्रवाई की जा सके।
  3. व्यक्तित्व अधिकारों के बैच से अलग रखना:
    • पीठ ने डॉ. दिव्यकीर्ति के वाद को विवेक ओबेरॉय, जान्हवी कपूर और आराध्या बच्चन द्वारा दायर उन तीन मुकदमों के समूह में शामिल करने से इनकार कर दिया, जिसमें अदालत व्यापक स्तर पर ‘पर्सनालिटी राइट्स’ की सीमाओं को तय करने जा रही है। अदालत ने माना कि यह मामला विशिष्ट डीपफेक और गंभीर कॉपीराइट हेरफेर से जुड़ा हुआ है।

विधिक विवरण

  • केस संदर्भ: डॉ. विकास दिव्यकीर्ति बनाम मेटा प्लेटफॉर्म्स इंक व अन्य [सिविल वाद (वाणिज्यिक) – दिल्ली उच्च न्यायालय]
  • विधिक प्रतिनिधित्व:
    • वादी (डॉ. दिव्यकीर्ति) की ओर से: वरिष्ठ अधिवक्ता दीया कपूर
    • प्रतिवादी (मेटा प्लेटफॉर्म्स / इंस्टाग्राम) की ओर से: अधिवक्ता वरुण पाठक
  • प्रासंगिक कानून एवं विधिक धाराएं:
    • कॉपीराइट अधिनियम, 1957:
      • धारा 14 (कॉपीराइट के तहत अनन्य अधिकार)
      • धारा 51 (कॉपीराइट का उल्लंघन)
      • धारा 57 (रचनाकार के विशेष/नैतिक अधिकार – Moral Rights of the Author)
    • सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000:
      • धारा 79 (मध्यवर्तियों का दायित्व और सेफ हार्बर की शर्तें)
      • सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 का नियम 3(1)(b) एवं 3(2)(b) (डीपफेक, प्रतिरूपण और 24 घंटे के भीतर सामग्री हटाने का दायित्व)
    • भारत का संविधान – अनुच्छेद 19(1)(a), 19(1)(g) एवं अनुच्छेद 21 (अभिव्यक्ति, आजीविका और निजता व प्रतिष्ठा का अधिकार)
    • सामान्य विधि सिद्धांत — व्यक्तित्व अधिकार (Personality Rights) एवं प्रतिरूपण के विरुद्ध संरक्षण (Tort of Passing Off)
  • संबद्ध न्यायिक सिद्धांत व नजीरें:
    • अमिताभ बच्चन बनाम रजत नेगी व अन्य (2022, दिल्ली हाईकोर्ट) — ‘किसी विख्यात हस्ती के नाम, आवाज, तस्वीर या व्यक्तित्व के किसी भी पहलू का व्यावसायिक दोहन उनकी पूर्व सहमति के बिना नहीं किया जा सकता।’
    • अनिल कपूर बनाम सिंपली लाइफ इंडिया व अन्य (2023, दिल्ली हाईकोर्ट) — ‘एआई, डीपफेक टूल्स और जीआईएफ के जरिए सेलिब्रिटी के व्यक्तित्व लक्षणों का अनधिकृत व्यावसायिक उपयोग गैरकानूनी है।’
    • श्रेया सिंघल बनाम भारत संघ (2015, सुप्रीम कोर्ट) — ‘मध्यवर्तियों को अदालती आदेश या सरकारी निर्देश मिलने पर गैरकानूनी सामग्री को तुरंत ब्लॉक करना अनिवार्य है।’
  • पीठ: न्यायमूर्ति अनूप जयराम भंभानी (दिल्ली उच्च न्यायालय)
  • अंतिम निर्देश: डीपफेक वीडियो और अपमानजनक यूआरएल को तत्काल हटाने का अंतरिम आदेश; मेटा को उल्लंघनकर्ताओं के डिजिटल आईपी लॉग्स साझा करने और प्लेटफॉर्म के रीमिक्सिंग फीचर के दुरुपयोग पर जवाब दाखिल करने का निर्देश।

Instagram Feature: मामले का संक्षिप्त विवरण (At a Glance)

विवरणजानकारी
संबंधित अदालतदिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court)
पीठन्यायमूर्ति अनूप जयराम भंभानी
याचिकाकर्ताडॉ. विकास दिव्यकीर्ति (संस्थापक, दृष्टि IAS)
प्रतिवादीमेटा प्लेटफॉर्म्स (Meta Platforms Inc. – इंस्टाग्राम की पैरेंट कंपनी)
मुख्य मुद्दाइंस्टाग्राम के ‘Remix’ फीचर से कॉपीराइट उल्लंघन, व्यक्तित्व अधिकारों (Personality Rights) का हनन और डीपफेक/फर्जी विज्ञापन।
अदालत का अंतरिम आदेशआपत्तिजनक/डीपफेक वीडियो हटाने का निर्देश और उल्लंघन करने वालों का Basic Subscriber Information (BSI) व IP लॉग शेयर करने के आदेश।
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