Friday, October 2, 2026
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NAN Scam: अगर ED के मौलिक अधिकार हैं, तो उसे लोगों के मौलिक अधिकारों के बारे में भी सोचना चाहिए…क्यूं की शीर्ष अदालत ने टिप्पणी

NAN Scam: सुप्रीम कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय से कहा है कि उसे भी लोगों के मौलिक अधिकारों के बारे में सोचना चाहिए।

एनएएन घोटाले को लेकर शीर्ष कोर्ट में हुई सुनवाई

न्यायमूर्ति अभय एस. ओका और उज्जल भुयान की पीठ ने नागरिक आपूर्ति निगम (NAN) घोटाले से संबंधित मामले को छत्तीसगढ़ से नई दिल्ली स्थानांतरित करने की याचिका पर सुनवाई के दौरान एजेंसी से सवाल किया कि उसने संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत रिट याचिका कैसे दायर की, जो कि व्यक्तिगत नागरिकों के लिए आरक्षित है।

शीर्ष कोर्ट से याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी

संविधान का अनुच्छेद 32 संवैधानिक उपचारों के अधिकार” की गारंटी देता है, जो व्यक्तियों को उनके मौलिक अधिकारों के उल्लंघन पर सुप्रीम कोर्ट से सीधे राहत की मांग करने की शक्ति प्रदान करता है। पीठ की टिप्पणियों के बाद, अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस. वी. राजू ने याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी और कहा, ED के भी मौलिक अधिकार होते हैं। इस पर कोर्ट ने हल्के-फुल्के अंदाज़ में कहा, अगर ED के मौलिक अधिकार हैं, तो उसे लोगों के मौलिक अधिकारों के बारे में भी सोचना चाहिए। इसके बाद कोर्ट ने राजू को याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी।

पूर्व आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा ने अग्रिम जमानत का किया दुरुपयोग

प्रवर्तन निदेशालय ने पिछले वर्ष दावा किया था कि पूर्व आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा ने छत्तीसगढ़ में इस मामले में मिली अग्रिम जमानत का दुरुपयोग किया। हाल ही में, जांच एजेंसी ने यह चौंकाने वाला दावा किया कि छत्तीसगढ़ के कुछ संवैधानिक पदाधिकारी मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कुछ आरोपियों को न्यायिक राहत दिलाने के लिए उच्च न्यायालय के एक न्यायाधीश के संपर्क में थे। यह मामला करोड़ों रुपये के कथित NAN घोटाले से जुड़ा है। छत्तीसगढ़ से PMLA (धनशोधन निवारण अधिनियम) के तहत दर्ज मामले को स्थानांतरित करने की मांग के साथ, ED ने कुछ हाई-प्रोफाइल आरोपियों को दी गई अग्रिम जमानत को रद्द करने की भी मांग की थी।

वर्ष 2019 में ED ने मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया था

वर्ष 2019 में ED ने छत्तीसगढ़ पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो द्वारा नागरिक आपूर्ति घोटाले में दर्ज FIR और चार्जशीट के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया था। यह कथित घोटाला तब सामने आया जब फरवरी 2015 में राज्य के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) को संचालित करने वाली नोडल एजेंसी NAN के कुछ कार्यालयों पर छापा मारा और कुल 3.64 करोड़ रुपये की बेहिसाब नकदी जब्त की। छापे के दौरान एकत्र किए गए चावल और नमक के कई नमूनों की गुणवत्ता की जांच की गई, जिनमें से कई को निम्न गुणवत्ता का और मानव उपभोग के लिए अनुपयुक्त पाया गया। जहां अनिल टुटेजा NAN के अध्यक्ष थे, वहीं शुक्ला इसके प्रबंध निदेशक थे।

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