Monday, August 17, 2026
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Ramdev Case: हमदर्द का शरबत जिहाद…बाबा रामदेव के बयान पर बवाल, हाईकोर्ट में चली बड़ी बहस, जानें

Ramdev Case: योग गुरु रामदेव ने दिल्ली हाईकोर्ट को आश्वासन दिया कि वह हमदर्द के रूह अफजा पर अपनी कथित “शरबत जिहाद” टिप्पणी से संबंधित वीडियो व सोशल मीडिया पोस्ट तुरंत हटा देंगे।

दिल्ली हाईकोर्ट ने टिप्पणी को अनुचित ठहराया

यह आश्वासन दिल्ली हाईकोर्ट ने ‘हमदर्द’ के रूह अफजा को लेकर योग गुरु रामदेव की ‘शरबत जिहाद’ संबंधी टिप्पणी को अनुचित ठहराते हुए सख्त टिप्पणी पर दिया गया है। जस्टिस अमित बंसल ने रामदेव की ‘पतंजलि फूड्स लिमिटेड’ के खिलाफ ‘हमदर्द नेशनल फाउंडेशन इंडिया’ की याचिका पर सुनवाई की। कहा, ‘इस टिप्पणी ने हमारी अंतरआत्मा को झकझोर दिया। यह उचित नहीं। आप (रामदेव के वकील) अपने मुवक्किल से निर्देश लें, अन्यथा सख्त आदेश दिया जाएगा। इससे पहले ‘हमदर्द’ के वकील ने कोर्ट को बताया, रामदेव ने पतंजलि के गुलाब शरबत का प्रचार करते हुए दावा किया था कि ‘हमदर्द’ के रूह अफजा’ से अर्जित धन का उपयोग मदरसे और मस्जिद बनाने में होता है। रामदेव के वकील ने टिप्पणी का बचाव करते हुए कहा कि उन्होंने किसी ब्रांड या समुदाय का नाम नहीं लिया।

रामदेव ने वीडियो में कहा- मस्जिदों व मदरसों के निर्माण के लिए हमदर्द के मुनाफे का इस्तेमाल

विवाद तब पैदा हुआ जब रामदेव ने 3 अप्रैल को एक वीडियो में कथित तौर पर हमदर्द पर मस्जिदों और मदरसों के निर्माण के लिए अपने मुनाफे का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया, पेय को तथाकथित शरबत जिहाद का हिस्सा बताया। यह मामला सार्वजनिक प्रवचन में सांप्रदायिक बयानबाजी के इस्तेमाल और सामाजिक सद्भाव को नुकसान पहुंचाने की इसकी क्षमता पर बढ़ती चिंताओं को उजागर करता है। 3 अप्रैल को, बाबा रामदेव ने अपनी कंपनी के उत्पाद, गुलाब शरबत का प्रचार करते हुए विवाद खड़ा कर दिया। एक वीडियो में, उन्होंने कथित तौर पर हमदर्द के रूह अफ़ज़ा की आलोचना की, जिसमें आरोप लगाया गया कि कंपनी मस्जिदों और मदरसों के निर्माण के लिए अपने धन का इस्तेमाल कर रही है। रामदेव ने आगे इस पेय को “शरबत जिहाद” का हिस्सा बताया। इन टिप्पणियों की उनके सांप्रदायिक निहितार्थों के लिए व्यापक रूप से आलोचना की गई और हमदर्द ने इसे अपने उत्पाद का अपमान करते हुए सांप्रदायिक विभाजन पैदा करने का प्रयास माना।

बाबा रामदेव का भाषण नफरत फैलानेवाला: मुकुल

हमदर्द की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने कहा, ‘मामला अपमान से परे और सांप्रदायिक विभाजन पैदा करने का है। यह नफरत फैलाने वाला भाषण है। वे (रामदेव) शरबत जिहाद का जिक्र करते हैं। रोहतगी ने कहा, इससे पहले एलोपैथी को निशाना बनाने पर रामदेव को सुप्रीम कोर्ट से फटकार का सामना करना पड़ा था। इस मामले को खत्म करने के लिए सख्त कार्रवाई जरूरी है। हमदर्द की ओर से पेश संदीप सेठी ने कहा, रामदेव को कंपनी के संस्थापकों के धर्म को निशाना नहीं बनाना चाहिए। वहीं, पतंजलि और रामदेव की ओर से पेश वरिष्ठ वकील राजीव नायर ने कहा, कंपनी धर्म की संरक्षक नहीं है। सेठी ने जवाब दिया, “मैं मानवता का संरक्षक हूं।” इस पर नायर ने कहा, रामदेव को राजनीतिक विचार व्यक्त करने से नहीं रोका जा सकता, लेकिन जहां तक ​​प्रतिस्पर्धियों के उत्पादों के अपमान का सवाल है, हलफनामा दाखिल किया जाएगा।

कोर्ट: अपनी आंखों और कान पर मुझे भरोसा नहीं हुआ…

जस्टिस बंसल ने कहा, ‘जब मैंने ये (रामदेव के) वीडियो देखे तो आंखों और कानों पर भरोसा नहीं हुआ। इसके बाद नायर ने कहा, ‘इस बारे में जारी प्रिंट और वीडियो, सभी विज्ञापन हटा दिए जाएंगे। मैंने वीडियो हटाने की सलाह दी है। अदालत ने वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव नायर के बयान को रिकॉर्ड में लिया और रामदेव से पांच दिनों के भीतर हलफनामा दाखिल करने को कहा कि वह भविष्य में प्रतिस्पर्धियों के उत्पादों के संबंध में ऐसा कोई बयान, विज्ञापन या सोशल मीडिया पोस्ट जारी नहीं करेंगे। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 1 मई को तय की है। अदालत ने कहा, वह (रामदेव) इन विचारों को मन में रख सकते हैं, उन्हें व्यक्त करने की जरूरत नहीं है।” कोर्ट ने भविष्य में ऐसे बयान, विज्ञापन या सोशल मीडिया पोस्ट न जारी करने का हलफनामा दाखिल करने का भी निर्देश दिया है।

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