Thursday, September 24, 2026
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Institute Case: 250 छात्रों की शिक्षा मामले में अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल…यह रहा सुप्रीम निर्देश

Institute Case: सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल करते हुए 250 छात्रों को उनके संस्थान के परिसर स्थानांतरण के कारण शिक्षा में आने वाली रुकावटों से बचाया है।

होटल मैनेजमेंट संस्थान के केस में चली सुनवाई

न्यायमूर्ति बी. आर. गवई और ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ मंगलुरु में स्थित एक संपत्ति से संबंधित मामले की सुनवाई कर रही थी, जहां से एक होटल मैनेजमेंट संस्थान संचालित हो रहा था। पीठ ने कहा, इस कठिनाई का सामना करते हुए कि एक ओर अपीलकर्ता को वर्तमान परिसर खाली करना है और दूसरी ओर जहां वह संस्थान को स्थानांतरित करना चाहता है, वह परिसर अभी तैयार नहीं है, ऐसे में उसे अस्थायी स्थान पर संस्थान को स्थानांतरित करना पड़ेगा।

संविधान का अनुच्छेद 142 पर चली चर्चा

फैसले में कहा गया, संविधान का अनुच्छेद 142 सर्वोच्च न्यायालय को यह शक्ति देता है कि वह किसी भी लंबित मामले में पूर्ण न्याय सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कोई भी आदेश या निर्णय पारित कर सके। हम मानते हैं कि यह ऐसा मामला है जिसमें इस न्यायालय को संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी असाधारण अधिकारिता का प्रयोग करना चाहिए ताकि न्याय सुनिश्चित किया जा सके। यदि हम यह शक्ति प्रयोग नहीं करते, तो लगभग 250 छात्रों का करियर खतरे में पड़ सकता है। संपत्ति मालिक और संस्थान के बीच हुए समझौते के अनुसार, संस्थान को 30 अप्रैल, 2025 तक संपत्ति खाली करनी थी।

संस्थान के वकील ने रखे तर्क

संस्थान के वकील ने कहा कि योजना संस्थान को एक नए स्थान पर स्थायी रूप से स्थानांतरित करने की थी, लेकिन नया परिसर अभी अधूरा है, इसलिए संस्थान को अस्थायी रूप से एक अन्य संपत्ति में स्थानांतरित करने की व्यवस्था की गई है। उन्होंने बताया कि अपीलकर्ता के पास सीधे नए स्थान पर जाने के लिए पर्याप्त समय नहीं था, जिससे अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) की आवश्यकताओं की पूर्ति हो सके। वकील ने कहा कि प्रस्तावित अस्थायी स्थान छात्रों को शैक्षणिक उत्कृष्टता के लिए आवश्यक सभी सुविधाएं प्रदान करेगा। इसलिए अपीलकर्ता ने न्यायालय से अनुरोध किया कि वह AICTE और मैंगलोर विश्वविद्यालय को उचित निर्देश दे ताकि उन्हें अस्थायी स्थान पर स्थानांतरित होने और वहां दो वर्षों से अधिक की अवधि के लिए कोर्स संचालित करने की अनुमति मिल सके।

नया स्थान दो वर्षों के भीतर पूरा करे और 30 अप्रैल, 2027 से पहले वहां स्थानांतरित हो जाए

पीठ ने कहा कि अपीलकर्ता वर्ष 2004 से संस्थान चला रहा है और शैक्षणिक वर्ष 2024-25 के लिए भी उसे AICTE से अनुमति प्राप्त हुई है। परिणामस्वरूप, पीठ ने AICTE और मैंगलोर विश्वविद्यालय को निर्देश दिया कि वे आज से दो वर्षों की अवधि तक अपीलकर्ता से यह अनिवार्यता न रखें कि संस्थान को ऐसी जगह स्थानांतरित किया जाए जो या तो उसकी स्वामित्व वाली हो या जहां का लीज़ 30 वर्षों से अधिक का हो। AICTE और विश्वविद्यालय दो वर्षों के लिए उस स्थान पर संस्थान को अनुमति या संबद्धता प्रदान करना जारी रखेंगे, जहां अपीलकर्ता अस्थायी रूप से स्थानांतरित होगा। हालांकि, पीठ ने स्पष्ट किया, वह स्थान अन्य आवश्यकताओं के अनुरूप होना चाहिए। कोर्ट ने संस्थान को आदेश दिया कि वह AICTE की आवश्यकताओं के अनुरूप नया स्थान दो वर्षों के भीतर पूरा करे और 30 अप्रैल, 2027 से पहले वहां स्थानांतरित हो जाए।

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