Thursday, September 24, 2026
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TALAQ case: तलाक-ए-बिद्दत प्रतिबंधित, मगर तलाक-ए-अहसन नहीं…यह कहा बॉम्बे हाईकोर्ट ने

TALAQ case: बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा, केवल तात्कालिक तीन तलाक (तलाक-ए-बिद्दत) को प्रतिबंधित किया गया है, पारंपरिक विधि से दिया गया तलाक जिसे तलाक-ए-अहसन कहा जाता है, वह प्रतिबंधित नहीं है।

मुस्लिम विवाह अधिनियम के तहत दर्ज मामला किया रद्द

हाईकोर्ट की औरंगाबाद बेंच के न्यायमूर्ति विभा कंकनवाड़ी और संजय देशमुख ने कहा, मुस्लिम महिला (विवाह के अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम के तहत तलाक की परिभाषा में केवल वही रूप शामिल हैं जिनका तत्काल और अपरिवर्तनीय प्रभाव होता है। कोर्ट ने 2024 में जलगांव में महिला की शिकायत पर पति और उसके माता-पिता के खिलाफ मुस्लिम महिला (विवाह के अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम की धारा 4 के तहत दर्ज मामला रद्द कर दिया। इस धारा के अनुसार, कोई भी मुस्लिम पुरुष जो अपनी पत्नी को तीन बार तात्कालिक रूप से तलाक (तलाक-ए-बिद्दत) देता है, उसे तीन साल तक की सजा हो सकती है।

व्यक्ति ने अपनी पत्नी को तलाक-ए-अहसन दिया

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा, “इस अधिनियम के तहत तलाक की जो परिभाषा दी गई है, वह तात्कालिक और अपरिवर्तनीय तलाक को लेकर है। तलाक का अर्थ है तलाक-ए-बिद्दत या कोई अन्य ऐसा प्रकार, जिसका तात्कालिक या अपरिवर्तनीय प्रभाव हो। अन्य सभी प्रकार के तलाक प्रतिबंधित नहीं हैं। मौजूदा मामले में, व्यक्ति ने अपनी पत्नी को तलाक-ए-अहसन दिया था, जो कि एक पारंपरिक प्रक्रिया है। अदालत ने कहा, तलाकनामा अंतिम रूप से तीन महीने बाद दिया गया। तलाक-ए-अहसन का कानूनी प्रभाव केवल 90 दिनों के बाद आता है, जिसमें दंपति ने सहवास पुनः प्रारंभ नहीं किया। जबकि अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार केवल तात्कालिक तीन तलाक प्रतिबंधित है, न कि तलाक-ए-अहसन, ऐसे में पति और उसके माता-पिता पर मुकदमा चलाना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा।

दंपति का विवाह 2021 में हुआ और 2023 में वे अलग हो गए

दंपति का विवाह 2021 में हुआ था और वे 2023 में अलग हो गए। दिसंबर 2023 में व्यक्ति ने गवाहों की मौजूदगी में तलाक-ए-अहसन दिया। व्यक्ति ने अपनी याचिका में दावा किया कि अधिनियम के प्रावधानों के तहत यह तरीका दंडनीय नहीं है। बेंच ने अपने आदेश में कहा कि प्राथमिकी (FIR) भारतीय दंड संहिता के तहत किसी प्रकार की प्रताड़ना के लिए दर्ज नहीं की गई है। चूंकि प्राथमिकी तलाक के मुद्दे से संबंधित है, यह केवल पति के खिलाफ सीमित है और ससुराल वालों को इसमें शामिल नहीं किया जा सकता। यदि इस मामले को उनके खिलाफ जारी रखा जाता है, तो यह कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा।

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