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SC News: चीफ जस्टिस बोले-13 मई को रिटायर हो रहा हूं…अब कोई निर्णय रिजर्व नहीं रखना चाहता

SC News: सुप्रीम कोर्ट ने दोषी ठहराए गए व्यक्तियों को राजनीतिक दल बनाने और उनमें पद संभालने से रोकने की याचिका पर अंतिम सुनवाई से इनकार कर दिया।

वकील अश्विनी उपाध्याय द्वारा दायर जनहित याचिका

मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति संजय कुमार की पीठ वकील अश्विनी उपाध्याय द्वारा दायर जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई कर रही थी। 13 मई को सेवानिवृत्त हो रहे मुख्य न्यायाधीश ने कहा, मैं अब कोई और निर्णय आरक्षित नहीं रखना चाहता। इसके बाद पीठ ने इस मामले की अंतिम सुनवाई 11 अगस्त को तय की और पक्षों को लिखित दलीलें दाखिल करने की अनुमति दी। याचिका में दावा किया गया कि 40 प्रतिशत विधायक या तो दोषी ठहराए जा चुके हैं या उनके खिलाफ मुकदमे चल रहे हैं। इसीलिए इसका विरोध हो रहा है। वे शुचिता नहीं चाहते।

चुनाव लड़ने से अयोग्य उम्मीदवार कैसे तय कर सकता है: पीठ

यह जनहित याचिका 2017 में दायर की गई थी, जिसमें दोषसिद्ध व्यक्तियों को उस अवधि के दौरान राजनीतिक दल बनाने और पदाधिकारी बनने से रोकने की मांग की गई थी जब वे अयोग्य ठहराए गए हों। इससे पहले पीठ ने यह सवाल उठाया था कि जो व्यक्ति चुनाव लड़ने से अयोग्य ठहराया गया है, वह कैसे चुनावों में उम्मीदवार तय कर सकता है और सार्वजनिक जीवन में शुचिता कैसे सुनिश्चित कर सकता है? पीठ ने कहा था, यहां एक व्यक्ति है जिसे दोषी ठहराया गया है और चुनाव लड़ने से अयोग्य ठहराया गया है। वह चुनाव के उम्मीदवार कैसे तय कर सकता है? लोकतंत्र की पवित्रता कैसे बनी रहेगी?”

शीर्ष अदालत ने संवैधानिक वैधता की जांच करने पर सहमति जताई

सुप्रीम कोर्ट ने 1 दिसंबर 2017 को केंद्र सरकार और चुनाव आयोग से इस याचिका पर जवाब मांगा था और जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 (RPA) की धारा 29A की संवैधानिक वैधता की जांच करने पर सहमति जताई थी। यह धारा राजनीतिक दलों के पंजीकरण से संबंधित है। इस याचिका में मांग की गई थी कि RPA की धारा 29A को संविधान के विरुद्ध, मनमानी और तर्कहीन घोषित किया जाए और चुनाव आयोग को राजनीतिक दलों का पंजीकरण और उनका पंजीकरण रद्द करने का अधिकार दिया जाए। याचिकाकर्ता ने चुनाव आयोग को यह निर्देश देने की भी मांग की थी कि वह निर्वाचन प्रणाली को आपराधिक प्रभाव से मुक्त करने और दलों के अंदर लोकतंत्र सुनिश्चित करने के लिए दिशानिर्देश बनाए, जैसा कि संविधान समीक्षा आयोग ने प्रस्तावित किया था।

याचिका में दावा: राजनीतिक शक्ति का उपयोग हो रहा

याचिका में कहा, कोई व्यक्ति जो हत्या, बलात्कार, तस्करी, मनी लॉन्ड्रिंग, डकैती, देशद्रोह जैसे जघन्य अपराधों में दोषी ठहराया गया हो, वह भी राजनीतिक दल बना सकता है और उसका अध्यक्ष या पदाधिकारी बन सकता है। कई प्रमुख नेताओं का नाम लिया गया है जिन पर आरोप तय हो चुके हैं या जिन्हें दोषी ठहराया गया है, फिर भी वे शीर्ष राजनीतिक पदों पर बने हुए हैं और राजनीतिक शक्ति का उपयोग कर रहे हैं। राजनीतिक दलों की बेतहाशा वृद्धि एक बड़ी चिंता का विषय बन गई है क्योंकि RPA की धारा 29A के तहत केवल एक साधारण घोषणा देकर कुछ लोग राजनीतिक दल बना सकते हैं। 2004 में चुनाव आयोग ने RPA की धारा 29A में संशोधन का प्रस्ताव दिया था ताकि उसे राजनीतिक दलों के पंजीकरण या रद्दीकरण को नियंत्रित करने वाले आदेश जारी करने का अधिकार मिल सके।

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