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Rape Case: दुष्कर्म के आरोपी ने पीड़िता से कहा- क्या तुम मुझसे शादी करोगी?…फिर सुप्रीम फैसला यह रहा

Rape Case: सुप्रीम कोर्ट में शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने के मामले में दोषी ने हाथों में फूल लेकर पीड़िता से कहा- क्या तुम मुझसे शादी करोगी?

10 वर्ष की सजा पर शीर्ष कोर्ट ने लगाई रोक

सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ के सामने दोषी के शादी के दिए प्रस्ताव का युवती ने मुस्कुराकर हां में जवाब दिया और उसके हाथों से फूल ले लिए। युवती ने भी अपनी ओर से युवक काे फूल दिए। फिर दोनों ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि वे दोनों शादी करके जीवन की नई शुरुआत करना चाहते हैं। इसके बाद दोषी को अंतरिम जमानत देते हुए उसे सुनाई गई 10 साल जेल की सजा पर रोक लगा दी। पीठ ने निचली अदालत को निर्देश दिया कि वह उचित शर्तों पर जमानत दे, ताकि वह शादी कर सके। पीठ ने कहा कि शादी हो जाने के बाद दोनों इसकी जानकारी सुप्रीम कोर्ट को देंगे। सुप्रीम कोर्ट मामले में आगामी 25 जुलाई को फिर से सुनवाई की तारीख दी है।

दोषी ने विशेष अनुमति याचिका दायर किया

सुप्रीम कोर्ट में दोषी मंजीत ने विशेष अनुमति याचिका दायर की थी। दाेषी और उसकी मां ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि वह शिकायतकर्ता से शादी करने को तैयार है। युवती भी इसके लिए राजी थी। सुप्रीम कोर्ट ने दोषी के परिवारवालों और शिकायतकर्ता व उसके परिजनों को 15 मई को तलब किया था। जस्टिस बीवी नागरत्ना ने मामले की गंभीरता को देखते हुए चैंबर में सुनवाई करने का निर्णय लिया। चैंबर में हुई सुनवाई में शिकायतकर्ता युवती ने भी दोषी मंजीत से शादी करने की बात कही। जब दोनों पक्षों ने शादी करने की बात दोहराई, तब जस्टिस नागरत्ना ने याचिकाकर्ता मंजीत से कहा कि वह हाथ में फूल लेकर शिकायतकर्ता के समक्ष शादी का प्रस्ताव रखे।

वर्ष 2021 में मध्य प्रदेश की युवती ने की थी शिकायत

मध्य प्रदेश की पुलिस ने युवती की शिकायत पर 2021 में मंजीत के खिलाफ शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने का मामला दर्ज किया था। आरोपी की बहन उसकी सहेली थी। उसकी आरोपी से मुलाकात फेसबुक पर 2016 में हुई थी। दोनों में प्रेम हुआ अाैर फिर शारीरिक संबंध बने। आरोपी ने शादी का वायदा किया था। बाद में उसने शादी से इनकार कर दिया कि उसकी मां शादी नहीं चाहती है। निचली अदालत ने सितंबर 2024 में आईपीसी की धारा 376 (2) और 417 के तहत दोषी मानते हुए मंजीत काे 10 साल कैद की सजा सुनाई थी। इस फैसले को हाईकोर्ट ने भी बरकरार रखा था।

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