Monday, August 17, 2026
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Delhi Excise Policy: जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के हटने के बाद अब जस्टिस मनोज जैन करेंगे सुनवाई…हाईप्रोफाइल केस का सभी अपडेट यहां पढ़ें

Delhi Excise Policy: दिल्ली हाईकोर्ट में चल रहे दिल्ली आबकारी नीति घोटाला मामले की सुनवाई अब जस्टिस मनोज जैन करेंगे।

जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने खुद को केस से किया था अलग

यह दिल्ली आबकारी नीति घोटाला केस में एक बड़ा प्रशासनिक फेरबदल हुआ है। यह बदलाव जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा द्वारा खुद को इस मामले से अलग करने (Withdrawal) और केस को दूसरी पीठ को स्थानांतरित करने के निर्देश के बाद आया है। आम आदमी पार्टी के शीर्ष नेताओं पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल और पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया समेत कई अन्य आरोपियों से जुड़े इस हाई-प्रोफाइल मामले की सुनवाई अागे से हाईकोर्ट जस्टिस मनोज जैन (Justice Manoj Jain) करेंगे।

2021-22 की दिल्ली आबकारी नीति में कथित घोटाला

यह मामला 2021-22 की दिल्ली आबकारी नीति को तैयार करने और लागू करने में कथित कथित हेरफेर और भ्रष्टाचार से जुड़ा है। सीबीआई की विशेष अदालत द्वारा अरविंद केजरीवाल और 22 अन्य को बरी किए जाने के फैसले को सीबीआई ने हाई कोर्ट में चुनौती दी है, जिसकी सुनवाई अब नए जज करेंगे।

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जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने क्यों वापस लिए अपने हाथ?

जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने इस मामले को दूसरी पीठ को स्थानांतरित करने का निर्देश इसलिए दिया क्योंकि उन्होंने अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और अन्य आप नेताओं के खिलाफ अदालत की अवमानना (Contempt of Court) की कार्यवाही शुरू की है। ऐसी स्थिति में निष्पक्षता बनाए रखने के लिए मामले को जस्टिस मनोज जैन के पास भेजा गया है।

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केजरीवाल और अन्य आरोपियों ने क्यों की थी जज बदलने की मांग? (Recusal Plea)

  • इससे पहले अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, दुर्गेश पाठक, विजय नायर, अरुण पिल्लई और चनप्रीत सिंह रायत ने आवेदन दाखिल कर जस्टिस शर्मा से इस मामले की सुनवाई से हटने (Recusal) का अनुरोध किया था।
  • हितों का टकराव (Conflict of Interest): केजरीवाल ने दलील दी कि जस्टिस शर्मा के बेटे और बेटी केंद्र सरकार के पैनल वकील (Panel Counsel) हैं, जिससे इस मामले में हितों का टकराव पैदा होता है।
  • वैचारिक मतभेद का आरोप: उन्होंने आरोप लगाया कि न्यायाधीश ने एबीएपी (ABAP) द्वारा आयोजित सम्मेलनों में भाग लिया था, जो वैचारिक रूप से ‘आप’ के विरोधी हैं।
  • पूर्वाग्रह की आशंका (Apprehension of Bias): केजरीवाल ने सत्येंद्र जैन के एक पुराने मामले का हवाला दिया, जहां प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ऐसी ही आशंका पर जज ने खुद को अलग कर लिया था।
  • हालांकि, जस्टिस शर्मा ने 20 अप्रैल को इन दलीलों को खारिज कर दिया था और सुनवाई जारी रखने का फैसला किया था, जिसके बाद आप नेताओं ने उनकी अदालत की कार्यवाही का बहिष्कार (Boycott) करने का फैसला किया था। लेकिन अब अवमानना कार्यवाही के मद्देनजर उन्होंने खुद ही केस ट्रांसफर कर दिया है।

अब तक क्या हुआ इस मामले में? (Case Timeline)

  • 2022 में शुरुआत: सीबीआई ने एफआईआर दर्ज कर आरोप लगाया कि आबकारी नीति में जानबूझकर खामियां (Loopholes) छोड़ी गईं ताकि शराब व्यापार का एकाधिकार (Monopolisation) किया जा सके और इसके बदले आप नेताओं को रिश्वत (Kickbacks) मिली। बाद में ईडी ने भी मनी लॉन्ड्रिंग (PMLA) का केस दर्ज किया।
  • 27 फरवरी 2026 को बड़ी राहत: दिल्ली की एक ट्रायल कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल और 22 अन्य आरोपियों को इस मामले से पूरी तरह डिस्चार्ज (Discharge/बरी) कर दिया था।
  • 9 मार्च 2026 को सीबीआई की अपील: सीबीआई ने इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी। शुरुआती सुनवाई में जस्टिस शर्मा ने ट्रायल कोर्ट के आदेश को प्रथम दृष्टया त्रुटिपूर्ण (Erroneous) माना था और ईडी की कार्यवाही पर रोक लगाने के ट्रायल कोर्ट के निर्देश को टाल दिया था।

मामले का सारांश (Quick Highlights)

मुख्य विवरणवर्तमान कानूनी स्थिति
नए सुनवाई जजजस्टिस मनोज जैन (दिल्ली हाई कोर्ट)
मामलादिल्ली आबकारी नीति 2021-22 (CBI बनाम अरविंद केजरीवाल व अन्य)
हटने वाली जजजस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा (अवमानना कार्यवाही के कारण केस ट्रांसफर किया)
मुख्य विवादनिचली अदालत ने आरोपियों को बरी किया था, जिसके खिलाफ सीबीआई हाई कोर्ट पहुंची है।

आगे क्या होगा?

जस्टिस मनोज जैन के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती सीबीआई की उस याचिका पर सुनवाई करना होगा, जिसमें ट्रायल कोर्ट द्वारा केजरीवाल और अन्य को बरी किए जाने के आदेश को चुनौती दी गई है। चूंकि यह मामला राजनीतिक और कानूनी रूप से देश के सबसे चर्चित मामलों में से एक है, इसलिए अब नए जज की अदालत में होने वाली जिरह पर सबकी नजरें टिकी होंगी।

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