Records Management: सुप्रीम कोर्ट ने प्रशासनिक रिकॉर्ड के प्रबंधन में एकरूपता की कमी को दूर करने के लिए ‘रिकॉर्ड रखने और नष्ट करने की गाइडलाइन 2025’ जारी की।
सभी रजिस्ट्री शाखाओं में जवाबदेही और कार्यकुशलता बढ़ेंगी
मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई ने कहा कि वर्षों से सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री में विभिन्न शाखाओं में प्रशासनिक रिकॉर्ड की मात्रा और विविधता काफी बढ़ गई है। उन्होंने बताया कि जहां न्यायिक रिकॉर्ड को सुप्रीम कोर्ट रूल्स 2013 के ऑर्डर एलवीआई और 2017 की हैंडबुक के अध्याय 21 के तहत स्पष्ट रूप से नियंत्रित किया गया है, वहीं प्रशासनिक रिकॉर्ड के प्रबंधन को लेकर अब तक कोई स्पष्ट व्यवस्था नहीं थी। इसका उद्देश्य सुप्रीम कोर्ट की सभी रजिस्ट्री शाखाओं में जवाबदेही और कार्यकुशलता बढ़ाना है।
संवाद को व्यवस्थित करना उद्देश्य
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि इस असमानता के कारण अलग-अलग शाखाओं में रिकॉर्ड रखने की प्रक्रिया अलग-अलग रही, जिससे संग्रहण और कार्यकुशलता प्रभावित हुई। नई गाइडलाइन का उद्देश्य प्रशासनिक रिकॉर्ड जैसे संस्थागत निर्णय, नीतियों का क्रियान्वयन, विभागों के बीच पत्राचार, ऑडिट और बाहरी एजेंसियों से संवाद को व्यवस्थित करना है।
रिकॉर्ड प्रबंधन से पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि रिकॉर्ड का सही प्रबंधन पारदर्शिता और जवाबदेही के लिए जरूरी है। गाइडलाइन से पुराने और अप्रासंगिक दस्तावेजों को हटाने की प्रक्रिया आसान होगी, जिससे स्टोरेज की समस्या कम होगी और रिकॉर्ड जल्दी खोजे जा सकेंगे। गाइडलाइन में यह भी कहा गया है कि रिकॉर्ड को रखने की अवधि वित्तीय, कानूनी और प्रशासनिक जरूरतों के आधार पर तय की गई है। यह राष्ट्रीय सार्वजनिक रिकॉर्ड प्रबंधन मानकों के अनुरूप है।
रजिस्ट्रार और अधिकारियों से विचार-विमर्श के बाद बनी गाइडलाइन
गाइडलाइन को तैयार करने से पहले सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री के रजिस्ट्रार और अधिकारियों से विस्तृत चर्चा की गई। इसके अनुसार, मुख्य न्यायाधीश और सुप्रीम कोर्ट के जजों के हस्ताक्षर वाले मूल दस्तावेज और पेपरबुक स्थायी रूप से सुरक्षित रखे जाएंगे। इसके अलावा, नीति से जुड़े फाइल, ऑफिस ऑर्डर और सर्कुलर फाइलें भी स्थायी रूप से संरक्षित की जाएंगी।
गोपनीय शाखा से जुड़े रिकॉर्ड पर विशेष निर्देश
यदि किसी शाखा का रिकॉर्ड किसी अन्य शाखा या गोपनीय शाखा से जुड़ा हो, तो जैसे ही संबंधित कोर्ट केस प्राप्त हो, उस शाखा को इसकी जानकारी देना अनिवार्य होगा।
रिकॉर्ड नष्ट करने से पहले रजिस्ट्रार की मंजूरी जरूरी
गाइडलाइन में यह भी स्पष्ट किया गया है कि किसी भी शाखा द्वारा रिकॉर्ड को नष्ट करने या संरक्षित रखने की प्रक्रिया संबंधित रजिस्ट्रार की अनुमति के बाद ही की जाएगी।

