Wednesday, August 5, 2026
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Contract case: कर्मचारी को नौकरी छोड़ने के बाद दूसरी जगह काम करने से रोकना गलत…यह कहा दिल्ली हाईकोर्ट ने

Contract case: दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा, किसी कर्मचारी को नौकरी छोड़ने के बाद दूसरी जगह काम करने से रोकने वाली कॉन्ट्रैक्ट की शर्तें अमान्य हैं।

शर्त अनुबंध अधिनियम की धारा 27 के खिलाफ

जस्टिस तेजस करिया की बेंच ने कहा कि नौकरी खत्म होने के बाद नॉन-कम्पीट क्लॉज (प्रतिस्पर्धा न करने की शर्त) सिर्फ दो मामलों में लागू हो सकती है—पहला, जब कंपनी की गोपनीय या मालिकाना जानकारी की सुरक्षा जरूरी हो और दूसरा, जब कर्मचारी को कंपनी के क्लाइंट्स को लुभाने से रोकना हो। लेकिन किसी कर्मचारी को पूरी तरह से दूसरी जगह नौकरी करने से रोकना गलत है। बुधवार को एक अहम फैसले में कोर्ट ने कहा कि ऐसी शर्तें भारतीय अनुबंध अधिनियम की धारा 27 के खिलाफ हैं, जो व्यापार पर रोक लगाने वाले समझौतों को अवैध मानती है।

कोर्ट ने कहा- मजबूरी में कर्मचारी साइन करता है कॉन्ट्रैक्ट

कोर्ट ने कहा कि आमतौर पर नौकरी के समय कर्मचारी को स्टैंडर्ड फॉर्म कॉन्ट्रैक्ट साइन करना पड़ता है, जिसमें उसकी सहमति नहीं होती। ऐसे में नकारात्मक शर्तों को सख्ती से देखा जाना चाहिए। कोई भी कर्मचारी इस स्थिति में नहीं होना चाहिए कि या तो वह पुरानी कंपनी में ही काम करे या फिर बेरोजगार रहे। कोर्ट ने अपीलकर्ता के पक्ष में फैसला सुनाते हुए उसे डिजिटल इंडिया कॉरपोरेशन (डीआईसी) में नौकरी करने की अनुमति दे दी।

यह था मामला

इस केस में अपीलकर्ता एक सॉफ्टवेयर डेवलपर था, जो एक कंपनी में काम करता था। उसे डीआईसी के एक प्रोजेक्ट पर काम करने की जिम्मेदारी दी गई थी। बाद में उसने कंपनी से इस्तीफा दे दिया और नोटिस पीरियड पूरा करने के बाद डीआईसी में नौकरी स्वीकार कर ली। पुरानी कंपनी ने इसके खिलाफ नॉन-कम्पीट क्लॉज का हवाला देते हुए आपत्ति जताई।

यह था कंपनी का तर्क

कंपनी का तर्क था कि कर्मचारी ने प्रोजेक्ट से जुड़ी खास तकनीकी जानकारी हासिल की है, जो गोपनीय है। इसलिए उसे डीआईसी में काम करने से रोका जाए। कंपनी ने कहा कि यह रोक सिर्फ डीआईसी तक सीमित है और तीन साल के लिए है, बाकी कहीं भी नौकरी करने की छूट है।

कर्मचारी ने कहा- यह रोक व्यापार पर प्रतिबंध है

अपीलकर्ता ने तर्क दिया कि नौकरी खत्म होने के बाद किसी भी तरह की रोक धारा 27 के तहत अमान्य है। ट्रायल कोर्ट ने पहले कर्मचारी को डीआईसी में नौकरी करने से रोकने का अंतरिम आदेश दिया था। इसके खिलाफ कर्मचारी ने हाईकोर्ट में अपील की।

कोर्ट ने पुराने फैसले का हवाला दिया

हाईकोर्ट ने अमेरिकन एक्सप्रेस बैंक बनाम प्रिया मलिक (2006) केस का हवाला देते हुए कहा कि कर्मचारी को बेहतर नौकरी तलाशने से नहीं रोका जा सकता, भले ही उसके पास गोपनीय जानकारी हो। गोपनीयता के नाम पर किसी को जबरन नौकरी में नहीं रखा जा सकता।

डीआईसी के पास पहले से है सॉफ्टवेयर का अधिकार

कोर्ट ने यह भी कहा कि डीआईसी और पुरानी कंपनी के बीच हुआ समझौता बताता है कि सॉफ्टवेयर कोड और उससे जुड़ी जानकारी का अधिकार पहले से ही डीआईसी के पास है। ऐसे में पुरानी कंपनी की यह आशंका गलत है कि कर्मचारी डीआईसी के साथ गोपनीय जानकारी साझा करेगा।

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