Friday, October 2, 2026
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DNA guidelines: सुप्रीम कोर्ट ने डीएनए सैंपल की हैंडलिंग को लेकर देशभर के लिए गाइडलाइन जारी की…पढ़ें मामला

DNA guidelines: सुप्रीम कोर्ट ने हत्या और दुष्कर्म के एक मामले में फांसी की सजा पाए आरोपी को बरी कर दिया।

फॉरेंसिक सबूतों में खामियों को उजागर किया

कोर्ट ने इस केस में फॉरेंसिक सबूतों में खामियों को उजागर करते हुए डीएनए सैंपल की हैंडलिंग को लेकर देशभर के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। जस्टिस विक्रम नाथ, संजय करोल और संदीप मेहता की बेंच ने कहा कि अब से ऐसे सभी मामलों में जहां फॉरेंसिक सबूत होते हैं, वहां डीएनए सैंपल की सावधानीपूर्वक और तय प्रक्रिया के तहत कलेक्शन, पैकेजिंग और डॉक्यूमेंटेशन जरूरी होगा।

स्वतंत्र गवाह को लाने की कोशिश हो

कोर्ट ने कहा कि डीएनए सैंपल लेने की प्रक्रिया को रिकॉर्ड करने वाले दस्तावेज पर मेडिकल प्रोफेशनल, जांच अधिकारी और स्वतंत्र गवाहों के हस्ताक्षर और पदनाम होने चाहिए। अगर स्वतंत्र गवाह मौजूद नहीं हो सके, तो उन्हें लाने की कोशिश और न ला पाने का कारण रिकॉर्ड किया जाना चाहिए।

48 घंटे में फॉरेंसिक लैब तक पहुंचें सैंपल

कोर्ट ने आदेश दिया कि जांच अधिकारी यह सुनिश्चित करें कि डीएनए सैंपल 48 घंटे के भीतर संबंधित फॉरेंसिक साइंस लैब तक पहुंच जाएं। अगर किसी वजह से देरी होती है, तो उसका कारण केस डायरी में दर्ज किया जाए।

बिना कोर्ट की मंजूरी के पैकेज नहीं खोला जाएगा

कोर्ट ने कहा कि जब तक ट्रायल या अपील चल रही हो, तब तक डीएनए सैंपल के पैकेज को बिना ट्रायल कोर्ट की मंजूरी के नहीं खोला, बदला या फिर से सील किया जा सकता। यह मंजूरी तभी दी जाएगी जब कोई योग्य मेडिकल प्रोफेशनल यह कहे कि इससे सबूत की विश्वसनीयता पर असर नहीं पड़ेगा।

चेन ऑफ कस्टडी रजिस्टर जरूरी

कोर्ट ने कहा कि डीएनए सबूत की पूरी प्रक्रिया के दौरान एक “चेन ऑफ कस्टडी” रजिस्टर में हर मूवमेंट को रिकॉर्ड किया जाए और हर स्तर पर उसका काउंटर साइन हो। यह रजिस्टर ट्रायल कोर्ट के रिकॉर्ड का हिस्सा होगा और किसी भी चूक के लिए जांच अधिकारी जिम्मेदार होगा।

हर राज्य के डीजीपी तैयार करें फॉर्मेट

कोर्ट ने सभी राज्यों के डीजीपी को निर्देश दिया कि वे इस रजिस्टर और अन्य जरूरी दस्तावेजों के सैंपल फॉर्म तैयार करें और उन्हें सभी जिलों में भेजें, साथ ही जरूरत हो तो जरूरी निर्देश भी दें।

मूल केस में सबूत साबित नहीं हुए

इस केस में आरोपी को 28 मई 2011 को गिरफ्तार किया गया था। मद्रास हाईकोर्ट ने मार्च 2019 में उसे मौत की सजा सुनाई थी। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि अभियोजन पक्ष द्वारा पेश की गई परिस्थितियां आरोपी के खिलाफ साबित नहीं हो सकीं। इसलिए कोर्ट ने उसकी सजा रद्द करते हुए तुरंत रिहा करने का आदेश दिया, बशर्ते वह किसी और केस में वांछित न हो।

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