Friday, October 2, 2026
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NI ACT: किसी आपराधिक शिकायत में बदलाव से आरोपी को कोई नुकसान नहीं होता…तो बदलाव संभव

NI ACT: सुप्रीम कोर्ट ने कहा, अगर किसी आपराधिक शिकायत में बदलाव से आरोपी को कोई नुकसान नहीं होता, तो कोर्ट ऐसे बदलाव की इजाजत दे सकता है।

नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 के तहत मामला

जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच ने यह फैसला एक केस में सुनाया, जिसमें नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 के तहत दर्ज शिकायत में बदलाव की इजाजत दी गई थी। कोर्ट ने कहा कि कानून की प्रक्रिया न्याय की सहायक है, उसकी मालिक नहीं। कोर्ट ने कहा कि अगर आरोप में बदलाव से आरोपी को कोई नुकसान नहीं होता, तो ट्रायल जारी रह सकता है। लेकिन अगर नुकसान की आशंका हो, तो कोर्ट नया ट्रायल शुरू करने या ट्रायल को आगे बढ़ाने का आदेश दे सकता है।

बदलाव की इजाजत CrPC में है

कोर्ट ने कहा कि शिकायत में बदलाव सीआरपीसी के तहत कोई नई बात नहीं है। सीआरपीसी की धारा 216 कोर्ट को आरोप बदलने की शक्ति देती है और इसमें आरोपी को नुकसान न पहुंचे, यह अहम बात होती है। कोर्ट ने कहा कि जब आरोप बदला जाता है, तो असल में कानूनी प्रावधान और उसके तथ्यों पर लागू होने का तरीका बदला जाता है, न कि खुद तथ्य।

यह था मामला

यह केस तीन चेक बाउंस होने से जुड़ा है, जिनकी कुल रकम 14 लाख रुपए थी। शिकायत में कहा गया था कि ये चेक देसी घी (दूध उत्पाद) की खरीद के लिए दिए गए थे। बाद में शिकायतकर्ता ने शिकायत में बदलाव की मांग की और कहा कि टाइपिंग की गलती से ‘देसी घी’ लिखा गया, जबकि असल में सामान ‘दूध’ था। ट्रायल कोर्ट ने सितंबर 2023 में यह बदलाव मंजूर कर लिया, क्योंकि उस समय तक क्रॉस एग्जामिनेशन शुरू नहीं हुआ था।

हाईकोर्ट ने बदलाव को खारिज किया था

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को पलट दिया। हाईकोर्ट ने कहा कि यह बदलाव शिकायत की प्रकृति बदल देता है और जीएसटी के तहत टैक्स से जुड़े असर भी हो सकते हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट का फैसला रद्द किया

सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट का फैसला रद्द करते हुए कहा कि यह बदलाव एक सुधार योग्य त्रुटि थी और इससे आरोपी को कोई नुकसान नहीं हुआ। इसलिए ट्रायल कोर्ट का फैसला सही था।

यह है अहम बातें:

  • सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रक्रिया न्याय की सहायक है, बाधा नहीं।
  • आरोपी को नुकसान न हो तो शिकायत में बदलाव की इजाजत दी जा सकती है।
  • सीआरपीसी की धारा 216 और 217 में बदलाव और गवाहों को फिर से बुलाने की व्यवस्था है।
  • 14 लाख के चेक बाउंस केस में दूध और देसी घी को लेकर शिकायत में बदलाव हुआ था।
  • सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट का फैसला रद्द कर ट्रायल कोर्ट का आदेश बहाल किया।
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