Friday, July 3, 2026
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PMLA case: ईडी की गिरफ्तारी और संपत्ति जब्ती के अधिकार पर फिर होगी सुप्रीम सुनवाई

PMLA case: सुप्रीम कोर्ट ने कहा, वह पहले यह तय करेगा कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की शक्तियों को सही ठहराने वाले 2022 के फैसले के खिलाफ दायर समीक्षा याचिकाएं सुनवाई योग्य हैं या नहीं।

याचिकाकर्ताओं ने 13 सवाल कोर्ट के सामने रखे

न्यायमूर्ति सूर्यकांत, उज्जल भुयान और एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने बताया कि ईडी ने तीन प्राथमिक मुद्दे उठाए हैं, जो मुख्य रूप से समीक्षा याचिकाओं की स्वीकार्यता से जुड़े हैं। वहीं, याचिकाकर्ताओं ने 13 सवाल कोर्ट के सामने रखे हैं। कोर्ट ने कहा कि पहले इस मुद्दे पर बहस होगी, फिर याचिकाकर्ताओं द्वारा उठाए गए अन्य सवालों पर सुनवाई की जाएगी।

समीक्षा याचिकाओं की अपनी सीमाएं होती हैं

जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, “समीक्षा याचिकाओं की अपनी सीमाएं होती हैं। कभी-कभी अलग नजरिया हो सकता है, लेकिन हम मूल फैसले को बदल नहीं सकते। इसलिए पहले यह तय करना जरूरी है कि समीक्षा याचिकाएं सुनवाई योग्य हैं या नहीं।”अब इस मामले की अगली सुनवाई 6 अगस्त को होगी। इससे पहले 7 मई को कोर्ट ने सभी पक्षों से कहा था कि वे तय करें कि किन मुद्दों पर बहस होनी है।

यह है मामला

  • जुलाई 2022 में सुप्रीम कोर्ट ने ईडी को मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में गिरफ्तारी, संपत्ति जब्ती और तलाशी लेने के अधिकार को सही ठहराया था।
  • कोर्ट ने कहा था कि मनी लॉन्ड्रिंग कोई सामान्य अपराध नहीं है, यह वैश्विक वित्तीय व्यवस्था के लिए खतरा है।
  • कोर्ट ने यह भी कहा था कि ईडी अधिकारी पुलिस नहीं माने जाएंगे और ईसीआईआर (Enforcement Case Information Report) को एफआईआर के बराबर नहीं माना जा सकता।
  • ईसीआईआर की कॉपी आरोपी को देना जरूरी नहीं है, गिरफ्तारी के समय कारण बताना ही काफी है।
  • फैसले में PMLA की धारा 45 को भी सही ठहराया गया था, जिसमें अपराध को गैर-जमानती और संज्ञेय माना गया है।

यह रही सरकार की दलील

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि अगस्त 2022 में जब समीक्षा याचिकाएं दाखिल हुई थीं, तब कोर्ट ने सिर्फ दो मुद्दों पर नोटिस जारी किया था—ईसीआईआर की कॉपी देना और धारा 24 के तहत सबूत का भार आरोपी पर डालना। इसलिए सुनवाई इन्हीं दो बिंदुओं तक सीमित रहनी चाहिए।

राजनीतिक विवाद भी जुड़ा

PMLA कानून को लेकर विपक्ष का आरोप है कि सरकार इसका इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों को परेशान करने के लिए करती है। 2022 के फैसले के खिलाफ 200 से ज्यादा याचिकाएं दाखिल की गई थीं।

अब आगे क्या

अगर कोर्ट यह मानता है कि समीक्षा याचिकाएं सुनवाई योग्य हैं, तो फिर याचिकाकर्ताओं द्वारा उठाए गए सभी 13 सवालों पर बहस होगी। अन्यथा, मामला यहीं खत्म हो सकता है।

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