Friday, October 2, 2026
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CONSENT-AGE: 18 साल की सहमति की उम्र बच्चों को शोषण से बचाने के लिए है…यह रही केंद्र सरकार की दलील

CONSENT-AGE: केंद्र सरकार ने कहा, 18 साल की कानूनी सहमति की उम्र एक सोच-समझकर बनाई गई नीति है, जिसका मकसद नाबालिगों को यौन शोषण से बचाना है।

बच्चों की भावनात्मक निर्भरता या चुप्पी का फायदा उठाते हैं: केंद्र

सुप्रीम कोर्ट में सरकार ने कहा कि इस उम्र को कम करना या किशोर प्रेम के नाम पर कोई अपवाद जोड़ना न सिर्फ कानूनन गलत होगा, बल्कि यह बच्चों के लिए खतरनाक भी साबित हो सकता है। सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने लिखित जवाब में कहा कि अगर सहमति की उम्र में ढील दी गई, तो इससे ऐसे लोगों को भी बचाव का रास्ता मिल जाएगा, जो बच्चों की भावनात्मक निर्भरता या चुप्पी का फायदा उठाते हैं।

तर्क: मौजूदा कानून को सख्ती से लागू करेंगे

केंद्र ने कहा कि मौजूदा कानून को सख्ती से और समान रूप से लागू किया जाना चाहिए। इसमें किसी भी तरह की छूट देना, चाहे वह सुधार के नाम पर हो या किशोरों की आजादी के नाम पर, बच्चों की सुरक्षा के लिए बनाए गए कानूनों को कमजोर करेगा। इससे POCSO एक्ट और भारतीय न्याय संहिता जैसे कानूनों की प्रभावशीलता पर असर पड़ेगा।

कानून में अपवाद जोड़ना बच्चों की सुरक्षा को कमजोर करेगा

सरकार ने कहा कि अगर कानून में ‘क्लोज-इन-एज’ जैसा कोई अपवाद जोड़ा गया या सहमति की उम्र घटाई गई, तो इससे बच्चों की कमजोर स्थिति को लेकर जो कानूनी धारणा है, वह कमजोर हो जाएगी। इससे मानव तस्करी और अन्य तरह के शोषण के मामले बढ़ सकते हैं, क्योंकि लोग इसे सहमति का नाम देकर बचने की कोशिश करेंगे।

कानून बच्चों की असुरक्षा को ध्यान में रखकर बना है

सरकार ने कहा कि 18 साल की उम्र तय करना कोई मनमानी नहीं है, बल्कि यह सामाजिक असमानता और ताकत के असंतुलन को ध्यान में रखकर तय किया गया है। खासकर तब, जब अपराधी कोई करीबी रिश्तेदार या माता-पिता हो, तो बच्चे की चुप्पी को सहमति मानना उसे और ज्यादा नुकसान पहुंचाता है।

सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट भी 18 साल की उम्र को मानते आए हैं

सरकार ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट और देशभर के हाईकोर्ट्स ने हमेशा 18 साल की कानूनी सहमति की उम्र को सही ठहराया है। यह उम्र बच्चों की सुरक्षा के लिए बनाए गए कानूनों की मूल भावना को दर्शाती है।

जस्टिस इंदिरा जयसिंह ने दी थी उम्र घटाने की सलाह

इस मामले में कोर्ट की मदद कर रहीं वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह ने पहले 18 साल की उम्र को घटाकर 16 साल करने की सलाह दी थी। उनका कहना था कि मौजूदा कानून किशोरों के आपसी सहमति वाले रिश्तों को भी अपराध बना देता है, जिससे उनके संवैधानिक अधिकारों का हनन होता है।

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