Monday, August 17, 2026
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-HARYANA LAND: मालिकों से ली गई जमीन का प्रबंधन और नियंत्रण तो पंचायत के पास रहेगा, लेकिन स्वामित्व नहीं…

-HARYANA LAND: सुप्रीम कोर्ट ने अप्रैल 2022 में दिए ग्राम पंचायतों को गांव की आम जमीन (कॉमन लैंड) लौटाने के निर्देश वाले फैसले काे रद्द कर समीक्षा करने की मंजूरी दी।

7 अप्रैल 2022 काे सुप्रीम अदालत ने दिया था फैसला

सुप्रीम अदालत ने हरियाणा सरकार को बड़ा झटका देते हुए का अपना फैसला रद्द कर दिया है। 7 अप्रैल 2022 को दिए गए आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि मालिकों से उनकी अनुमेय सीमा (सीलिंग लिमिट) से काटकर ली गई जमीन का स्वामित्व नहीं, बल्कि प्रबंधन और नियंत्रण ही पंचायत के पास रहेगा। पंचायत इस जमीन को पट्टे पर दे सकती है और इसका उपयोग गैर-मालिकों, अनुसूचित जाति/जनजाति और गांव समुदाय के हित में किया जा सकता है।

हरियाणा राज्य की अपील में कोई दम नहीं है: सुप्रीम कोर्ट

मंगलवार को मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई, न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति के.वी. विश्वनाथन की पीठ ने इस फैसले की समीक्षा याचिका को मंजूरी देते हुए 2022 के आदेश को रद्द कर दिया। कोर्ट ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट की 2003 की फुल बेंच के उस फैसले को सही ठहराया, जिसमें कहा गया था कि एकीकरण (consolidation) के दौरान जो जमीन आम उद्देश्यों के लिए आरक्षित नहीं की गई, वह मालिकों के पास ही रहेगी, न कि पंचायत या राज्य के पास। सीजेआई ने कहा, “हमें हाईकोर्ट की फुल बेंच के फैसले में कोई गलती नजर नहीं आती। इस सिद्धांत (stare decisis) का पालन 100 से अधिक फैसलों में किया गया है। हरियाणा राज्य की अपील में कोई दम नहीं है, इसलिए इसे खारिज किया जाता है।”

ग्राम पंचायत या राज्य के पास नहीं जाएगी…

सीजेआई ने 51 पन्नों का फैसला लिखते हुए 2022 के आदेश का हवाला दिया, जिसमें पंजाब विलेज कॉमन लैंड्स (रेगुलेशन) एक्ट, 1961 में 1992 के संशोधन को वैध ठहराया गया था। उस समय कोर्ट ने कहा था कि प्रो-राटा कट से निकाली गई सारी जमीन ग्राम पंचायत के पास रहेगी और इसे केवल वर्तमान और भविष्य की सामुदायिक ज़रूरतों के लिए ही इस्तेमाल किया जाएगा। लेकिन अब सीजेआई की अगुवाई वाली बेंच ने इन निष्कर्षों को पलट दिया और साफ कहा – जो जमीन किसी खास उद्देश्य के लिए आरक्षित नहीं है, वह ग्राम पंचायत या राज्य के पास नहीं जाएगी। दरअसल, 2022 का फैसला पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट की फुल बेंच के खिलाफ दायर अपीलों पर आया था। अब सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि मालिकों से ली गई जमीन का प्रबंधन और नियंत्रण तो पंचायत के पास रहेगा, लेकिन स्वामित्व नहीं बदलेगा। इसे वापस मालिकों में बांटा नहीं जा सकता क्योंकि इसका उद्देश्य गांव की वर्तमान और भविष्य की जरूरतें पूरी करना है।

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