Sunday, August 16, 2026
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NALSA Ceremony: CJI गवई बोले…न्याय कुछ लोगों की विशेष सुविधा नहीं, हर नागरिक का अधिकार

NALSA Ceremony: देश के प्रधान न्यायाधीश (CJI) बीआर गवई ने कहा, न्याय कुछ लोगों का विशेषाधिकार नहीं, बल्कि हर नागरिक का अधिकार है।

राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन

सुप्रीम कोर्ट परिसर में आयोजित राष्ट्रीय कानूनी सहायता तंत्र को मजबूत बनाने पर राष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए CJI गवई ने कहा कि कानूनी सेवाओं के अभियान की सच्ची उपलब्धि आँकड़ों या रिपोर्टों में नहीं, बल्कि उन नागरिकों की कृतज्ञता और विश्वास में है, जो कभी खुद को अदृश्य महसूस करते थे। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका और वकीलों का यह कर्तव्य है कि न्याय की रोशनी समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।

विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका का न्याय देने का दायित्व

गवई ने कहा, न्याय कुछ लोगों की सुविधा नहीं बल्कि हर नागरिक का अधिकार है। हमारा दायित्व है कि हम यह सुनिश्चित करें कि न्याय की किरण समाज के उस आखिरी व्यक्ति तक पहुंचे जो अब तक उपेक्षित रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति यह दर्शाती है कि विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका—तीनों का दायित्व है कि सभी के लिए न्याय तक पहुंच सुनिश्चित की जाए।

कागज तक कार्य सीमित नहीं होनी चाहिए

CJI ने कहा कि असली सफलता आंकड़ों में नहीं, बल्कि आम आदमी के विश्वास में है—इस भरोसे में कि कोई न कोई उसके साथ खड़ा है। उन्होंने कहा, हमारा कार्य केवल कागज तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि यह जीवन बदलने का माध्यम होना चाहिए। कभी एक दिन की उपस्थिति, किसी गाँव या जेल की यात्रा, या किसी परेशान व्यक्ति से बातचीत भी उसके जीवन में बड़ा बदलाव ला सकती है।

न्याय व्यवस्था उसकी अपनी है, यह सभी सोचें

CJI ने कहा कि एक न्यायपूर्ण समाज की ताकत इस बात में है कि वह अन्याय के उत्पन्न होने से पहले ही उसे पहचान ले और वहाँ पहुँच जाए। भारत के संविधान के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर गवई ने कहा कि कानूनी सहायता आंदोलन को संविधान की प्रस्तावना में निहित उस दृष्टि को आगे बढ़ाना होगा, जिसमें सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय का वादा किया गया है। उन्होंने कहा, “संविधान का वादा तभी पूरा होगा जब हर व्यक्ति—चाहे वह किसी भी जाति, लिंग, भाषा या परिस्थिति का हो—यह महसूस करे कि न्याय व्यवस्था उसकी अपनी है।”

NALSA की 30 वीं वर्षगांठ

NALSA (नेशनल लीगल सर्विसेज अथॉरिटी) की 30 वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में गवई ने कहा कि कानूनी सहायता को प्रतिक्रियात्मक नहीं, बल्कि जीवंत आंदोलन के रूप में देखा जाना चाहिए। सीजेआई ने कहा, “हमें तब तक इंतज़ार नहीं करना चाहिए जब तक कोई परेशानी हमारे दरवाजे पर न आए। हमें लगातार यह समझना होगा कि समाज किस दिशा में बदल रहा है, नई चुनौतियां और नए बहिष्कार किस रूप में उभर रहे हैं, और हम लोगों की जरूरतों को कैसे पूरा करें।”उल्लेखनीय है कि NALSA की स्थापना कानूनी सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 के तहत की गई थी, ताकि समाज के कमजोर वर्गों को निशुल्क कानूनी सहायता प्रदान की जा सके और लोक अदालतों के माध्यम से विवादों का सौहार्दपूर्ण समाधान किया जा सके। CJI इसके संरक्षक-प्रधान होते हैं, जबकि सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठतम न्यायाधीश कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में कार्य करते हैं।

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