Friday, October 2, 2026
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Father’s ancestral property: अवैध विवाह से जन्मे बच्चों को भी पिता की पैतृक संपत्ति में हिस्सा मिलेगा, जानें पूरा फैसला

Father’s ancestral property: ओडिशा हाईकोर्ट ने कहा, हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 16 के तहत वैध और अवैध विवाह से जन्मे सभी बच्चे के अपने पिता की संपत्ति में उत्तराधिकार का अधिकार रखते हैं।

मामला क्या था

यह मामला स्वर्गीय कैलाश चंद्र मोहंती की संपत्ति को लेकर दो पत्नियों के बीच विवाद से जुड़ा था। अनुसया मोहंती (पहली पत्नी) ने पारिवारिक अदालत, भुवनेश्वर में याचिका दायर कर खुद को वैध पत्नी और कानूनी वारिस घोषित करने की मांग की थी। उन्होंने कहा कि 5 जून 1966 को उनका विवाह हिंदू रीति-रिवाज से हुआ और उनके दो बेटे हैं। संध्या रानी साहू (दूसरी पत्नी) ने दावा किया कि वह भी मृतक की पत्नी हैं और उनके भी बच्चे हैं। फैमिली कोर्ट ने 2021 में पहली पत्नी अनुसया के पक्ष में फैसला दिया और उन्हें वैध पत्नी और वारिस घोषित किया। इस पर दूसरी पत्नी संध्या ने अपील दायर की, जो अंततः ओडिशा हाईकोर्ट के सामने पहुंची।

हाईकोर्ट ने क्या कहा

ओडिशा हाईकोर्ट ने कहा कि फैमिली कोर्ट ने संध्या (दूसरी पत्नी) के बच्चों के अधिकारों पर स्पष्ट आदेश नहीं दिया, इसलिए फैसले में संशोधन जरूरी है। कोर्ट ने कहा कि, “संध्या रानी साहू और कैलाश चंद्र मोहंती से जन्मे बच्चे, उनके स्वयं अर्जित (self-acquired) संपत्ति के वारिस होंगे। इसके अलावा, वे पिता की पैतृक संपत्ति में भी उतने हिस्से के हकदार होंगे जितना हिस्सा पिता को एक नोटional partition में मिला होता।” अदालत ने यह भी कहा कि यह व्याख्या हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 की धारा 6(3) के अनुरूप है, जिसके तहत मृत्यु से पहले कल्पित विभाजन मानकर पिता का हिस्सा तय किया जाता है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर भरोसा

हाईकोर्ट ने रेवनासिड्डप्पा बनाम मल्लिकार्जुन में सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि “धारा 16(3) यह स्पष्ट करती है कि वैध या अवैध विवाह से जन्मे बच्चे केवल अपने माता-पिता की संपत्ति में अधिकार रखेंगे, किसी अन्य रिश्तेदार की संपत्ति में नहीं।”लेकिन यह हिस्सा उतना ही होगा जितना कल्पित विभाजन में पिता को मिलता। दोनों पत्नियों के बच्चों को पिता की संपत्ति में हिस्सा मिलेगा —पर केवल पिता के हिस्से तक सीमित, पूरे संयुक्त परिवार की संपत्ति पर नहीं।

विशेषज्ञों की राय

विधि विशेषज्ञाें ने कहा कि यह निर्णय इस सिद्धांत पर आधारित है कि कल्पित विभाजन के जरिये पिता के हिस्से का निर्धारण कर बच्चों का हक तय किया जाएगा। यह फैसला नया सिद्धांत नहीं लाता बल्कि सुप्रीम कोर्ट के 2023 के निर्णय की पुनर्पुष्टि करता है। इससे सुनिश्चित होता है कि अवैध विवाह से जन्मे निर्दोष बच्चों को उनके माता-पिता की संपत्ति में वैधानिक हिस्सा मिले।

कानूनी व्याख्या बॉक्स

क्या कहती है धारा 16 (हिंदू विवाह अधिनियम) और धारा 6(3) (हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम)?

  • धारा 16 – वैधता और उत्तराधिकार: यदि कोई विवाह शून्य (void) या विलोपनीय (voidable) हो, तो भी उस विवाह से जन्मे बच्चे वैध (legitimate) माने जाएंगे। उन्हें अपने माता-पिता की संपत्ति में अधिकार होगा।
  • धारा 16(3) कहती है — यह अधिकार माता-पिता तक सीमित रहेगा, अन्य रिश्तेदारों की संपत्ति में नहीं।
  • धारा 6(3) – नोटional Partition का सिद्धांत: यदि पिता हिंदू मिताक्षरा संयुक्त परिवार का सदस्य है, तो उसकी मृत्यु से पहले एक कल्पित विभाजन (Notional Partition) मान लिया जाता है। इस कल्पित विभाजन में पिता का जो हिस्सा निकलता है, वही हिस्सा उसकी संपत्ति बनता है, जिससे आगे उत्तराधिकार चलता है।
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