Thursday, October 1, 2026
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CJI SHOE HURL: सीजेआई पर जूता फेंकने की घटना दुखद… ऐसी घटनाएं दोबारा न हों

CJI SHOE HURL: दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) बी.आर. गवई पर जूता फेंकने की घटना की कड़ी निंदा की।

शर्मनाक घटनाएं रोकने के लिए ठोस उपाय हो

मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की पीठ ने कहा कि यह घटना सिर्फ बार के सदस्यों ही नहीं बल्कि पूरे समाज को चोट पहुंचाने वाली है। अदालत ने कहा, हम आपकी चिंता से सहमत हैं, बल्कि उससे ज्यादा गंभीरता से। यह केवल किसी एक व्यक्ति का मामला नहीं है। ऐसी घटनाओं की कड़ी भर्त्सना होनी चाहिए और इन्हें रोकने के लिए उचित कदम उठाने जरूरी हैं। भविष्य में ऐसी शर्मनाक घटनाएं रोकने के लिए ठोस उपाय जरूरी हैं।

सोशल मीडिया पर घटना का वीडियो हटाने की मांग

यह टिप्पणी हाईकोर्ट ने उस जनहित याचिका (PIL) की सुनवाई के दौरान की, जिसमें सोशल मीडिया पर घटना का वीडियो हटाने और भविष्य में ऐसी घटनाओं में दोषी की पहचान उजागर न करने की मांग की गई थी। याचिकाकर्ता तेजस्वी मोहन ने कहा कि घटना का वीडियो अभी भी सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहा है। उन्होंने आग्रह किया कि ऐसे मामलों में दोषियों को प्रचार न मिल सके, इसके लिए दिशा-निर्देश तय किए जाएं।

सुप्रीम कोर्ट में याचिका पहले से दायर

केंद्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने अदालत को बताया कि सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) ने इस घटना को लेकर पहले ही सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है, जिसमें जूता फेंकने वाले वकील के खिलाफ अवमानना कार्रवाई की मांग की गई है। शर्मा ने कहा कि चूंकि यह मामला शीर्ष अदालत में लंबित है, इसलिए याचिकाकर्ता को वहीं हस्तक्षेप करना चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि खबरों के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट इस पर ‘जॉन डो ऑर्डर’ (ऐसा आदेश जो अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ भी लागू हो) जारी करने पर विचार कर रहा है।

सुप्रीम अदालत के व्यापक निर्देश तक इंतजार करें

इस पर हाईकोर्ट ने कहा, “यदि सुप्रीम कोर्ट इस पर पहले से विचार कर रहा है, तो आप वहां हस्तक्षेप का अनुरोध करें। अन्यथा हम इस पर सुनवाई जारी रखेंगे।” अदालत ने फिलहाल याचिका लंबित रखी और कहा कि अगर सुप्रीम कोर्ट इस पर व्यापक दिशा-निर्देश तय करता है, तो वही पर्याप्त होगा। अगली सुनवाई के लिए मामला 4 दिसंबर को सूचीबद्ध किया गया है।

6 अक्टूबर 2025 को 71 वर्षीय अधिवक्ता राकेश किशोर का कारनामा

6 अक्टूबर 2025 को 71 वर्षीय अधिवक्ता राकेश किशोर ने सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही के दौरान सीजेआई गवई की ओर जूता फेंकने की कोशिश की थी। इस घटना के बाद बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने उनका लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया था। सीजेआई गवई ने उस समय पूरी शांति से प्रतिक्रिया देते हुए अदालत कर्मियों से कहा था कि वकील को केवल चेतावनी देकर छोड़ दिया जाए। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने भी अधिवक्ता के खिलाफ अवमानना कार्रवाई शुरू न करने का फैसला किया, लेकिन ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए दिशानिर्देश बनाने की बात कही थी।

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