Friday, October 2, 2026
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National Highway expansion: कर्नाटक HC का बड़ा फैसला…हजारों जमीन मालिकों को राहत

National Highway expansion: कर्नाटक हाई कोर्ट ने जमीन अधिग्रहण से प्रभावित जमीन मालिकों को बड़ा राहत दी है।

सुप्रिया एस शेट्टी द्वारा दायर रिट याचिका मंजूर

हाईकोर्ट ने कहा, नेशनल हाईवे विस्तार के लिए दिए जाने वाले मुआवजे पर आयकर नहीं काटा जा सकता। अदालत ने सुप्रिया एस शेट्टी द्वारा दायर रिट याचिका को मंजूर किया, जिसमें मुआवजे पर TDS काटने को चुनौती दी गई थी। जस्टिस एस.आर. कृष्णकुमार ने यह मामला सुना। सुप्रिया शेट्टी की ओर से एडवोकेट के.वी. धनंजय पेश हुए।

20 साल में जुटाई जमीन, पर हाईवे अधिग्रहण से योजना पटरी से उतरी

याचिकाकर्ता और उनके पति, मंगलुरु के जाने-माने भूमि-उन्नायक परिवार से हैं। उन्होंने लगभग दो दशकों में तेंकुलिपडि गांव में 17.5 एकड़ जमीन एक वेलनेस रिसॉर्ट बनाने के लिए जुटाई थी। लेकिन 2020 में NHAI ने NH-169 के चौड़ीकरण के लिए उनकी 33.50 सेंट जमीन का अधिग्रहण कर लिया। हालांकि मुआवजा नेशनल हाईवेज़ एक्ट और RFCTLARR Act के तहत दिया गया था, लेकिन अधिकारियों ने 16 लाख रुपए से अधिक TDS काट लिया, जबकि RFCTLARR Act की धारा 96 के अनुसार ऐसा मुआवजा पूरी तरह टैक्स-फ्री है।

कर्नाटक में हजारों जमीन मालिक इसी समस्या से परेशान

कर्नाटक में अधिग्रहण के दौरान अधिकारियों द्वारा 10% TDS काटने और बाद में आयकर विभाग द्वारा मुआवजे के एक हिस्से को टैक्सेबल बताने की शिकायतें आम हैं। इससे कई परिवार अपनी जमीन के मूल्य का बड़ा हिस्सा खो देते हैं और दोबारा जमीन खरीदना या आजीविका बहाल करना मुश्किल हो जाता है।

‘संसद की मंशा के खिलाफ काम कर रहे हैं अधिकारी’ — याचिकाकर्ता की दलील

एडवोकेट धनंजय ने कहा कि NHAI और टैक्स अधिकारी संसद की स्पष्ट मंशा के विपरीत काम कर रहे हैं। उन्होंने दलील दी कि “सरकारी परियोजनाओं के लिए नागरिकों से जमीन लेनी हो तो उन्हें टैक्स के बोझ में नहीं डाला जा सकता। RFCTLARR Act एक कल्याणकारी कानून है—और इस पर टैक्स लगाना उसके उद्देश्य को खत्म करता है।”

2022 का हाई कोर्ट का फैसला बना आधार

जस्टिस कृष्णकुमार इससे पहले भी ऐसे मामलों पर फैसले दे चुके हैं। 2022 में उन्होंने माना था कि RFCTLARR के तहत तय मुआवजे पर KIADB अधिग्रहणों में TDS या आयकर नहीं लगाया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले पर स्टे देने से इनकार कर दिया था, जिससे यह नियम पूरे कर्नाटक में लागू हो गया। इसी पूर्व निर्णय पर भरोसा करते हुए कोर्ट ने सुप्रिया शेट्टी के पक्ष में निर्णय सुनाया।

NHAI, KIADB, रेलवेज और अन्य अधिग्रहण एजेंसियों पर दूरगामी असर

याचिका मंजूर होने के बाद यह फैसला कर्नाटक में राष्ट्रीय राजमार्गों, KIADB, रेलवेज और पाइपलाइन अधिग्रहणों में मुआवजा पाने वाले हजारों लोगों को राहत दिलाने वाला माना जा रहा है।

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