मामला सारांश (At a Glance)
| पहलू | विवरण |
| माननीय पीठ | न्यायमूर्ति अनूप कुमार ढंड (Justice Anoop Kumar Dhand) |
| याचिकाकर्ता | हाई कोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन (High Court Advocates Association), जोधपुर |
| मृतक अधिवक्ता | स्व. जीवन राम चौधरी (Jeewan Ram Choudhary) |
| घटनास्थल | पुराना हाई कोर्ट परिसर / वर्तमान सत्र अदालत, जोधपुर |
| प्रमुख निर्देश | मेडिकल ऑफिसर, 2 नर्स, एंबुलेंस और सर्पोटिंग स्टाफ की तत्काल प्रभाव से नियुक्ति |
Advocate Heart Attack: सत्र अदालत परिसर (Sessions Court Complex), जोधपुर में प्राथमिक चिकित्सा के अभाव के कारण एक वकील की अचानक दिल का दौरा पड़ने से हुई दुखद मृत्यु के मामले पर राजस्थान हाईकोर्ट (Rajasthan High Court) ने कड़ा संज्ञान लिया है।
न्यायमूर्ति अनूप कुमार ढंड (Justice Anoop Kumar Dhand) की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा, यह स्थिति बेहद चिंताजनक है। एक कल्याणकारी राज्य होने के नाते, राज्य सरकार का यह कर्तव्य है कि वह प्रतिदिन सत्र अदालत परिसर में आने वाले वकीलों, न्यायिक अधिकारियों, याचिकाकर्ताओं और आम जनता को बुनियादी चिकित्सा सुविधा प्रदान करे। हाई कोर्ट ने राज्य सरकार की इस लापरवाही और परिसर में चिकित्सा सुविधाओं की कमी को “चिंताजनक” (Alarming) करार देते हुए राज्य सरकार को तत्काल कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।
राजस्थान हाई कोर्ट का अंतरिम आदेश (Immediate Orders)
हाई कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव (Principal Secretary, Department of Medical and Health) को तुरंत निम्नलिखित स्टाफ और व्यवस्थाएं तैनात करने का निर्देश दिया है।
- चिकित्सा स्टाफ की तत्काल तैनाती
- 1 मेडिकल ऑफिसर (Medical Officer)
- 2 ग्रेड-II नर्सिंग स्टाफ (Grade-II Nursing Staff)
- 1 फार्मासिस्ट (Pharmacist)
- 1 लैब टेक्नीशियन (Lab Technician)
- 2 वार्ड बॉय (Ward Boys)
- 1 सफाईकर्मी (Sweeper)
- एंबुलेंस व्यवस्था: किसी भी आकस्मिक चिकित्सा आपात स्थिति से निपटने के लिए परिसर में 24×7 एक एंबुलेंस (Ambulance) की स्थायी तैनाती का निर्देश दिया गया है।
- नियमित निगरानी: जोधपुर के जिला एवं सत्र न्यायाधीश (District and Sessions Judge) को निर्देश दिया गया है कि वे एक नियमित निगरानी प्रणाली (Regular Monitoring System) विकसित करें ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि आवश्यक बुनियादी सुविधाओं में कोई कमी न आए।
मामले की पृष्ठभूमि और घटनाक्रम (Case Background)
- पुरानी इमारत में स्थानांतरित अदालत: राजस्थान हाई कोर्ट के नए परिसर में जाने के बाद, जोधपुर की सत्र अदालत (Sessions Court) अब पुरानी हाई कोर्ट इमारत से संचालित हो रही है।
- जनता क्लिनिक में स्टाफ की कमी: याचिका के अनुसार, परिसर में स्थित ‘जनता क्लिनिक’ (Janta Clinic) में पर्याप्त स्टाफ नियुक्त नहीं था। स्वीकृत/आवश्यक 9 मेडिकल पदों के मुकाबले वहां केवल एक फैमिली हेल्थ वर्कर और एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी ही तैनात था।
- वकील की दुखद मृत्यु: याचिका में अधिवक्ता जीवन राम चौधरी (Jeewan Ram Choudhary) की दुखद घटना का उल्लेख किया गया, जिन्हें सत्र अदालत परिसर में अचानक दिल का दौरा पड़ा था। चिकित्सा कर्मचारियों और प्राथमिक उपचार की अनुपलब्धता के कारण समय पर इलाज न मिलने से उनका निधन हो गया।
- प्रस्तावों की अनदेखी: जिला एवं सत्र न्यायाधीश, जोधपुर द्वारा स्वास्थ्य विभाग को पर्याप्त चिकित्सा सुविधाएं प्रदान करने के लिए कई बार पत्र भेजे गए थे, लेकिन उन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद हाई कोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन (High Court Advocates Association) ने जनहित याचिका दायर की।
सुप्रीम कोर्ट के नजीर का हवाला (Legal Precedent)
याचिकाकर्ता एसोसिएशन ने सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले ‘प्रद्युम्न बिष्ट बनाम भारत संघ’ (Pradyuman Bisht v Union of India) का हवाला दिया, जिसमें शीर्ष अदालत ने सभी उच्च न्यायालयों और राज्य सरकारों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे कि देश के सभी अदालत परिसरों में आपातकालीन चिकित्सा सेवाएं, कार्यात्मक चिकित्सा केंद्र, एंबुलेंस और प्राथमिक उपचार (First-aid) प्रणाली अनिवार्य रूप से उपलब्ध हो।

