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Supreme Court: ये कोई सामान्य कागज नहीं”…जिसे आप नहीं देख रहे: केरल में VCs की नियुक्ति

Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने केरल के राज्यपाल और कुलाधिपति राजेंद्र अर्लेकर द्वारा दो विश्वविद्यालयों में कुलपति नियुक्ति से जुड़ी धुलिया कमिटी रिपोर्ट पर ध्यान न देने पर कड़ी नाराज़गी जताई है।

कार्रवाई करना राज्यपाल की जिम्मेदारी

शीर्ष अदालत ने कहा, यह “साधारण कागज़” नहीं है, बल्कि इस पर कार्रवाई करना राज्यपाल की जिम्मेदारी है। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच ने राज्यपाल को निर्देश दिया कि वे एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट पर निर्णय लें और 5 दिसंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट को अवगत कराएं।

राज्य सरकार की शिकायत: रिपोर्ट भेजी, फैसला नहीं

सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता जयदीप गुप्ता (केरल सरकार की ओर से) ने बताया कि न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) सुधांशु धुलिया की समिति ने APJ अब्दुल कलाम टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी और यूनिवर्सिटी ऑफ डिजिटल साइंसेज, इनोवेशन एंड टेक्नोलॉजी के नए कुलपतियों के चयन पर रिपोर्ट तैयार की। मुख्यमंत्री ने कमिटी रिपोर्ट के आधार पर अपनी सिफारिशें राज्यपाल को भेज दीं, लेकिन राज्यपाल ने अब तक कोई निर्णय नहीं लिया।

सुप्रीम कोर्ट ने राज्यपाल से कहा: यह “कानून का दस्तावेज़” है, आपको निर्णय लेना ही होगा

बेंच ने कहा कि धुलिया कमिटी—जिसे सभी पक्षों की सहमति से नियुक्त किया गया था—की रिपोर्ट पर राज्यपाल का यह कहना कि रिकॉर्ड नहीं मिले, कोई उचित वजह नहीं है। जस्टिस पारदीवाला ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा, “हमें समझ नहीं आता कि रिकॉर्ड न मिलने से रिपोर्ट देखने में क्या बाधा है। यह कोई सामान्य कागज़ नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज ने इसे तैयार किया है। यह कानून देश का है। आपको इसे देखना ही होगा और उचित निर्णय लेना होगा।”

अदालत ने राज्यपाल के वकील को कोर्टरूम से बाहर भेजकर निर्देश लेने को कहा

अदालत ने राज्यपाल के वकील से कहा, “हम जानना चाहते हैं कि निर्णय कब तक लिया जाएगा। अब और दलीलें मत दीजिए।” राज्यपाल के वकील ने कहा कि कुछ मुद्दों पर विचार ज़रूरी है, लेकिन कोर्ट ने तत्काल जवाब देने पर जोर दिया। बेंच ने कहा कि सभी रिकॉर्ड राज्यपाल को भेजे जा चुके हैं, अब वे रिपोर्ट देखकर जल्द फैसला लें।

पृष्ठभूमि: राज्यपाल बनाम सरकार का विवाद

2 सितंबर को राज्यपाल ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर मुख्यमंत्री को चयन प्रक्रिया से बाहर रखने की मांग की थी। इसके बाद 18 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने गतिरोध खत्म करने के लिए जस्टिस धुलिया को कमिटी प्रमुख नियुक्त किया। हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ भी राज्यपाल ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जिसमें एक VC की नियुक्ति रद्द की गई थी।राज्य सरकार ने भी नियुक्ति नोटिफिकेशन को चुनौती दी थी, क्योंकि उसमें “आगे के आदेश तक” नियुक्ति लिखी गई थी, जबकि कानून के अनुसार यह अवधि 6 महीने से अधिक नहीं हो सकती। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि राज्यपाल को अब कमिटी रिपोर्ट के अनुसार निर्णय लेना ही होगा।

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