केस मैट्रिक्स एवं विधिक सारांश (Case Matrix Overview)
| विधिक श्रेणियां / बिंदु | सर्वोच्च न्यायालय की कार्यवाही (अगस्त 2026) |
| संबंधित अदालत | भारत का सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court of India) |
| माननीय पीठ | जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा एवं जस्टिस आलोक अराधे |
| मुख्य विषय | NEET-PG 2025 में घटाई गई कट-ऑफ पर्सेंटाइल की वैधता व प्रणाली का ऑडिट |
| विशेषज्ञ समिति | DGHS डॉ. लवनीश जी. कृष्णा की अध्यक्षता में 12-सदस्यीय समिति |
| समिति को समय सीमा | सुझाव प्राप्त कर 8 सप्ताह में रिपोर्ट सौंपने का निर्देश |
| न्यायालय मित्र (Amicus Curiae) | वरिष्ठ अधिवक्ता मनिंदर सिंह |
NEET-PG: नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET-PG) 2025 परीक्षा के लिए क्वालिफाइंग कट-ऑफ पर्सेंटाइल घटाने के केंद्र सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई।
जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ के समक्ष अपर सॉलिसिटर जनरल (ASG) ऐश्वर्या भाटी ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (DGHS) द्वारा जारी कार्यालय आदेश पेश किया। केंद्र सरकार ने शीर्ष अदालत को सूचित किया कि कोर्ट के पिछले निर्देशों के अनुपालन में स्नातकोत्तर चिकित्सा प्रवेश परीक्षा प्रणाली की समीक्षा और संपूर्ण ऑडिट (Audit) के लिए एक 12-सदस्यीय विशेषज्ञ समिति (12-member Expert Committee) का गठन कर दिया गया है।
समिति की संरचना और कार्यक्षेत्र (Terms of Reference)
- अध्यक्षता: यह समिति स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक (DGHS) डॉ. लवनीश जी. कृष्णा की अध्यक्षता में काम करेगी। डॉ. प्रवीण कुमार दास (सहायक महानिदेशक – ME) इसके सदस्य सचिव होंगे।
- सदस्य: समिति में राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC), नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA), नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन (NBE) के प्रतिनिधि और स्वास्थ्य मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं।
- मुख्य उद्देश्य:
- मौजूदा NEET-PG प्रवेश प्रणाली के व्यापक ऑडिट के लिए एक तंत्र तैयार करना।
- प्रवेश प्रणाली में मौजूद कमियों और खामियों (Lacunae & Gaps) की पहचान करना।
- व्यावहारिक और लागू करने योग्य समाधान (Implementable Solutions) प्रस्तावित करना।
- रिपोर्ट प्रस्तुत करने की अवधि: सुप्रीम कोर्ट ने समिति को हितधारकों (Stakeholders) से सुझाव मांगने और 8 सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है। इसके बाद मामले की आगे सुनवाई की जाएगी।
विवाद का मूल कारण: कट-ऑफ पर्सेंटाइल में भारी कटौती
यह पूरा मामला राष्ट्रीय परीक्षा बोर्ड (NBEMS) द्वारा 13 जनवरी को जारी उस नोटिस के खिलाफ दायर याचिकाओं से जुड़ा है, जिसके तहत केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के निर्देशों पर NEET-PG 2025 की क्वालिफाइंग कट-ऑफ में अभूतपूर्व कटौती की गई थी।
- सामान्य श्रेणी (General Category): कट-ऑफ स्कोर 276 से घटाकर 103 कर दिया गया।
- आरक्षित श्रेणी (SC/ST/OBC Category): कट-ऑफ स्कोर 235 से घटाकर माइनस 40 (-40) कर दिया गया।
याचिकाकर्ताओं की दलीलें (Petitioners’ Arguments)
- योग्यता (Merit) का खात्मा: एडवोकेट सत्यम सिंह राजपूत के माध्यम से दायर याचिका में तर्क दिया गया है कि न्यूनतम अंकों को इतना नीचे गिराना चिकित्सा शिक्षा के शीर्ष स्तर पर योग्यता को पूरी तरह समाप्त कर देता है।
- संवैधानिक उल्लंघन: यह निर्णय मनमाना, असंवैधानिक और संविधान के अनुच्छेद 14 (समता का अधिकार) तथा अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार) का सीधा उल्लंघन है।
- जनस्वास्थ्य को खतरा: बिना किसी न्यूनतम योग्यता वाले उम्मीदवारों को पीजी मेडिकल कोर्स में प्रवेश की अनुमति देने से मरीजों की सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली पर गंभीर खतरा पैदा होगा।
पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने माना था कि कट-ऑफ घटाने का फैसला एक गंभीर मुद्दा है और इसमें अदालत के हस्तक्षेप की आवश्यकता है।

