Saturday, September 19, 2026
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Criminal Contempt: पत्रकार सौरव दास और आप नेताओं अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, सौरभ भारद्वाज व गोपाल राय ने जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा पर टिप्पणी की, पढ़ें

केस मैट्रिक्स एवं विधिक सारांश (Case Matrix Overview)

विधिक/प्रशासनिक श्रेणियांदिल्ली उच्च न्यायालय की कार्यवाही (2026)
मामले का प्रकारआपराधिक अवमानना याचिका (Criminal Contempt Case & Suo Motu)
संबंधित अदालतदिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court)
माननीय न्यायाधीशजस्टिस नवीन चावला एवं जस्टिस रवींद्र डुडेजा
प्रमुख पक्षकार/उत्तरदाताअरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, सौरभ भारद्वाज, गोपाल राय, संजय सिंह और पत्रकार सौरव दास
मुख्य मुद्दाआबकारी नीति मामले की सुनवाई कर रहीं जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के खिलाफ सोशल मीडिया पर बयानबाजी
कोर्ट का अंतरिम आदेशरजिस्ट्री आरोपियों को अवमानना साक्ष्य उपलब्ध कराए; 4 सप्ताह में जवाब देने का निर्देश; अगली सुनवाई 21 सितंबर।

Criminal Contempt: दिल्ली उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा के खिलाफ कथित रूप से सोशल मीडिया पर समन्वित अभियान चलाने से जुड़े आपराधिक अवमानना (Criminal Contempt) मामले में दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई हुई।

जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रवींद्र डुडेजा की पीठ के समक्ष अवमानना याचिकाकर्ता अधिवक्ता अशोक चैतन्य ने यह जानकारी दी। उन्होंने कोर्ट से कहा कि यद्यपि पोस्ट हटा दी गई प्रतीत होती हैं, लेकिन उनके पास इसका पूरा डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित है, जिसे वे कोर्ट के समक्ष पेश करना चाहते हैं। पीठ ने उन्हें इलेक्ट्रोनिक साक्ष्य रिकॉर्ड पर लाने की अनुमति दे दी। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने कोर्ट को सूचित किया कि पत्रकार सौरव दास और आम आदमी पार्टी (AAP) के नेताओं—अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, सौरभ भारद्वाज और गोपाल राय ने जज के खिलाफ की गई आपत्तिजनक सोशल मीडिया पोस्ट हटा दी हैं।

सुनवाई के मुख्य बिंदु एवं कोर्ट के निर्देश

आरोपियों को अवमानना सामग्री सौंपने का आदेश

अरविंद केजरीवाल की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता विक्रम चौधरी तथा मनीष सिसोदिया, सौरभ भारद्वाज, संजय सिंह और दुर्गेश पाठक के वकीलों ने कोर्ट से कहा कि जिस सामग्री/सामग्री के आधार पर अवमानना कार्यवाही शुरू की गई है, उसकी प्रतियां अभी तक उन्हें नहीं सौंपी गई हैं।

  • कोर्ट का निर्देश: हाई कोर्ट की पीठ ने अपनी रजिस्ट्री को निर्देश दिया कि वह डिजिटल रूप में संकलित पूरी अवमानना सामग्री सभी उत्तरदाताओं (Respondents) को तुरंत प्रदान करे।
  • जवाब दाखिल करने का समय: अदालत ने सभी आरोपियों को 4 सप्ताह के भीतर अपना लिखित जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।

अगली सुनवाई की तिथि

अदालत ने इस अवमानना मामले की अगली सुनवाई 21 सितंबर 2026 को तय की है।

विवाद का मूल कारण क्या है? (Background)

  • यह पूरा विवाद दिल्ली आबकारी नीति (Excise Policy) मामले से जुड़ा हुआ है।
  • सीबीआई (CBI) की याचिका: राउज एवेन्यू कोर्ट द्वारा केजरीवाल, सिसोदिया व अन्य को आबकारी नीति मामले में डिस्चार्ज (बरी) किए जाने के आदेश के खिलाफ सीबीआई ने दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसकी सुनवाई जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा कर रही थीं।
  • पक्षपात और हितों के टकराव का आरोप: आप नेताओं और पत्रकार सौरव दास ने जज पर ‘हितों के टकराव’ (Conflict of Interest) का आरोप लगाते हुए सुनवाई में शामिल होने से इनकार कर दिया था। सौरव दास ने X (पूर्व में ट्विटर) पर आरोप लगाया था कि जज के बच्चे केंद्र सरकार के पैनल में वकील हैं। इस पोस्ट को केजरीवाल, सौरभ भारद्वाज और गोपाल राय ने री-ट्वीट/कोट कर सवाल उठाए थे।
  • स्वतः संज्ञान (Suo Motu): जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने 14 मई को अदालत की गरिमा को ठेस पहुंचाने और न्याय व्यवस्था को बदनाम करने का प्रयास मानते हुए स्वतः संज्ञान लिया और अवमानना का मामला आपराधिक अवमानना पीठ को भेज दिया था।

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