Thursday, November 5, 2026
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Women Representation : बार काउंसिल पुरुषों का क्लब बन चुकी हैं, इस एकाधिकार को खत्म करना होगा, महिला सदस्यों के मनोनयन पर आदेश

केस मैट्रिक्स एवं विधिक सारांश (Case Matrix Overview)

विधिक श्रेणियां / बिंदुसर्वोच्च न्यायालय का निर्णय (4 अगस्त 2026)
संबंधित अदालतभारत का सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court of India)
माननीय पीठCJI सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची, जस्टिस वी. मोहन
मुख्य विषयस्टेट बार कौंसिलों में महिलाओं के 30% प्रतिनिधित्व हेतु सह-योजन (Co-option) तंत्र
नामांकन प्राधिकारीसंबंधित राज्य के उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश (High Court CJ)
पात्रता मानदंडपूर्व महिला हाई कोर्ट जज या निष्पक्ष छवि वाली वरिष्ठ महिला अधिवक्ता
विशेष समितिपूर्व जस्टिस सुधांशु धूलिया समिति (मत हस्तांतरण नियम समीक्षा हेतु)

Women Council: देश भर की स्टेट बार कौंसिलों (State Bar Councils) में महिलाओं के लिए 30 प्रतिशत प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के अपने ऐतिहासिक अभियान को आगे बढ़ाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 4 अगस्त 2026 को एक तंत्र स्थापित किया है।

शीर्ष अदालत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहन की पीठ ने यह व्यवस्था दी। सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि बार काउंसिलें “पुरुषों के क्लब” बन गई हैं और उनके कामकाज पर बने इस एकाधिकार को पूरी तरह से समाप्त (Dismantle) किया जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि प्रत्येक राज्य की बार काउंसिल में सह-योजित (Co-opted) की जाने वाली दो महिला सदस्यों का नामांकन संबंधित हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice) द्वारा किया जाएगा।

मुख्य आदेश एवं नामांकन का तंत्र (Mechanism for Nomination)

  • सर्वोच्च न्यायालय ने खुली अदालत में विभिन्न स्टेट बार कौंसिलों के प्रतिनिधियों से चर्चा के बाद महिला सदस्यों के मनोनयन के लिए निम्नलिखित नियम तय किए हैं।
  • किसमें से होगा चयन: हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सह-योजन (Co-option) के लिए दो महिला सदस्यों का चयन संबंधित हाई कोर्ट की पूर्व महिला जज या राज्य की वरिष्ठ महिला अधिवक्ताओं (Senior Women Advocates) में से करेंगे।
  • वस्तुनिष्ठता और पारदर्शिता: CJI ने कहा, “हमारी सुविचारित राय में ऐसा तंत्र स्टेट बार कौंसिलों के कामकाज में वस्तुनिष्ठता (Objectivity), स्वतंत्रता और पारदर्शिता का समावेश करेगा।”
  • क्षेत्रीय और स्थानीय कारक: हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश नामांकन करते समय राज्य की परिस्थितियों और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व (Regional Representation) जैसे प्रासंगिक कारकों पर ध्यान दे सकते हैं।
  • चुनाव लड़ने वाली महिलाओं को छूट: कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि किसी महिला अधिवक्ता ने बार काउंसिल चुनाव में भाग लिया है या वह चुनाव हार गई है, तो भी वह सह-योजन (Co-option) के लिए अयोग्य नहीं ठहरेगी।

30% आरक्षण का ढांचा और ‘जस्टिस धूलिया कमेटी’ को निर्देश

  1. 30% आरक्षण का मॉडल: सुप्रीम कोर्ट की योजना के अनुसार स्टेट बार कौंसिलों में 30% महिला प्रतिनिधित्व में से 20% सीटें प्रत्यक्ष चुनाव से भरी जानी हैं और शेष 10% सीटें सह-योजन (Co-option) के जरिए पूरी की जाएंगी। (दिसंबर 2025 में कोर्ट ने 30% आरक्षण को ‘गैर-समझौतावादी’ करार दिया था)।
  2. एकल संक्रमणीय मत (Single Transferable Vote) प्रणाली: चुनाव में मतों के हस्तांतरण की कार्यप्रणाली पर विभिन्न पक्षों के अलग-अलग विचारों को देखते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे को पूर्व जस्टिस सुधांशु धूलिया की अध्यक्षता वाली उच्च-स्तरीय समिति को नए सिरे से विचार करने के लिए भेज दिया है।
  3. सुझाव देने की समय-सीमा: कोर्ट ने बार के इच्छुक सदस्यों को एक सप्ताह के भीतर जस्टिस धूलिया समिति के समक्ष अपने सुझाव और विचार प्रस्तुत करने की अनुमति दी है।

सर्वोच्च न्यायालय का अंतिम निर्देश (Court Directives)

  • त्वरित गठन की अपील: सुप्रीम कोर्ट ने सभी संबंधित हाई कोर्ट्स के मुख्य न्यायाधीशों से अनुरोध किया है कि वे जल्द से जल्द नामांकन प्रक्रिया पूरी करें ताकि स्टेट बार कौंसिलों और उनकी कार्यकारी समितियों (Executive Committees) का औपचारिक गठन बिना किसी देरी के हो सके।

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