Wednesday, November 4, 2026
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Maha local bodies polls: 50% से ज़्यादा आरक्षण पर रोक…जिन निकायों में सीमा टूटी, उनके नतीजे फैसले पर निर्भर रहेंगे

Maha local bodies polls: सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग (SEC) को स्थानीय निकाय चुनाव जल्द कराए जाने का निर्देश दिया।

OBC आरक्षण से जुड़े 27 मामलों की अंतिम सुनवाई जारी

शीर्ष कोर्ट ने साथ ही स्पष्ट किया कि जिन नगर परिषदों और नगर पंचायतों में आरक्षण की 50% सीमा का उल्लंघन हुआ है, उनके चुनाव परिणाम अदालत के अंतिम फैसले पर निर्भर करेंगे। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमल्या बागची की बेंच ने बताया कि OBC आरक्षण से जुड़े 27 मामलों की अंतिम सुनवाई तीन-न्यायाधीशों की बेंच द्वारा 21 जनवरी 2026 को की जाएगी।

चुनाव प्रक्रिया शुरू, लेकिन 50% सीमा टूटने वाले निकायों पर शर्त

SEC की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता बलबीर सिंह ने बताया कि 246 नगर परिषदों में से 40 में और 42 नगर पंचायतों में से 17 में आरक्षण 50% से ऊपर चला गया है। बेंच ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया जारी रखी जा सकती है, लेकिन इन 57 निकायों के नतीजे अंतिम निर्णय के अधीन रहेंगे। कोर्ट ने नोट किया कि 246 नगर परिषदों और 42 नगर पंचायतों में नामांकन दाखिल हो चुके हैं 2 दिसंबर को मतदान होना है।

नगर निगमों पर भी आदेश: चुनाव तुरंत घोषित हों

अदालत ने कहा कि महाराष्ट्र में 29 नगर निगम, 32 जिला परिषदें और 336 पंचायत समितियां हैं, जिनमें अभी चुनाव प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है। इनमें से सिर्फ दो नगर निगमों में 50% सीमा का उल्लंघन हुआ है इन निगमों के नतीजे भी अंतिम फैसले पर निर्भर रहेंगे।

जहां सीमा नहीं टूटी, वहां बिना देरी चुनाव कराएं

32 जिला परिषदों और 336 पंचायत समितियों में जहां आरक्षण 50% से नीचे है, वहां चुनाव पूर्व आदेशों के अनुसार कराए जाएं। सुप्रीम कोर्ट इससे पहले 2022 से रुके पड़े स्थानीय निकाय चुनावों में देरी पर SEC की खिंचाई कर चुका है और आदेश दिया था कि सभी चुनाव 31 जनवरी 2026 तक पूरे कर लिए जाएं। 19 नवंबर 2025 को अदालत ने राज्य सरकार को सुझाव दिया था कि OBC को 27% आरक्षण देने के मुद्दे के निपटारे तक नामांकन प्रक्रिया टालने पर विचार करे।

Banthia रिपोर्ट को लेकर भ्रम

वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने दलील दी कि 2022 में जस्टिस एएम खानविलकर की बेंच द्वारा बंथिया समिति की सिफारिशें मंजूर किए जाने के बाद भ्रम की स्थिति बनी।सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि राज्य ने अदालत के आदेशों की सही नीयत से व्याख्या की थी।

‘ट्रिपल टेस्ट’ की याद दिलाई

सुप्रीम कोर्ट ने दिसंबर 2021 में OBC आरक्षण पर रोक लगाई थी और कहा था कि आरक्षण तभी लागू होगा जब ट्रिपल टेस्ट पूरा हो: पिछड़ेपन के अध्ययन के लिए आयोग का गठन, आयोग के आंकड़ों के आधार पर आरक्षण का अनुपात तय करना, कुल आरक्षण (SC/ST/OBC) 50% से अधिक न हो। राज्य ने मार्च 2022 में जयंत कुमार बंथिया आयोग बनाया था, जिसकी रिपोर्ट जुलाई 2022 में आई। मई 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि चुनाव चार महीने में कराए जाएं और OBC आरक्षण उसी कानूनी ढांचे के आधार पर दिया जाए जो बंथिया रिपोर्ट से पहले लागू था। बाद में अदालत ने स्पष्ट किया कि 50% से अधिक आरक्षण की अनुमति नहीं है और ऐसा समझना आदेशों की गलत व्याख्या है।

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