Sunday, September 20, 2026
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JUDGE-FIR: जज के खिलाफ FIR की मांग खारिज; न्यायिक फैसलों पर जजों को मिला है कानूनी संरक्षण

JUDGE-FIR: मुंबई की एक विशेष अदालत ने ठाणे के एक मौजूदा जिला एवं सत्र न्यायाधीश (District Judge) के खिलाफ ‘जीरो एफआईआर’ दर्ज करने की याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है।

पूरा मामला क्या है?

ठाणे के एक निवासी ने आरोप लगाया था कि जज ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए और रिश्वत लेकर उनके खिलाफ एक कानूनी आदेश पारित किया। अदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि जज के खिलाफ लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोप “अस्पष्ट और कानूनी रूप से टिकने योग्य नहीं” हैं।

शिकायतकर्ता का दावा

जुलाई 2024 में उसकी एक क्रिमिनल रिवीजन अर्जी खारिज कर दी गई थी। शिकायतकर्ता का कहना है कि उसे “भरोसेमंद सूत्रों” से पता चला है कि इसके लिए जज ने करीब 1.54 लाख रुपये की रिश्वत ली थी। उसने भ्रष्टाचार निरोधक कानून (PC Act) के तहत मुंबई में ‘जीरो एफआईआर’ दर्ज करने की मांग की थी।

कोर्ट ने क्यों ठुकराई अर्जी?

विशेष न्यायाधीश शायना पाटिल ने याचिका खारिज करते हुए महत्वपूर्ण कानूनी दलीलें दीं:

  • अधिकार क्षेत्र का अभाव: मामला ठाणे जिले का है, इसलिए मुंबई की अदालत के पास इस पर सुनवाई का अधिकार नहीं है।
  • सुनी-सुनाई बातें (Hearsay): कोर्ट ने कहा कि आरोप “सुनी-सुनाई बातों” पर आधारित हैं। “मुझे ऐसा लगा” या “मुझे पता चला” कहना ठोस सबूत नहीं हो सकता। भ्रष्टाचार जैसे गंभीर आरोपों के लिए विशिष्ट विवरण होने चाहिए, जो गायब थे।
  • न्यायिक संरक्षण: कानून के मुताबिक, एक जज को अपने न्यायिक कार्यों के दौरान दिए गए किसी भी आदेश के लिए आपराधिक कार्यवाही से सुरक्षा प्राप्त है।
  • पूर्व मंजूरी अनिवार्य: किसी भी लोक सेवक (Public Servant) के खिलाफ आधिकारिक ड्यूटी के दौरान लिए गए फैसलों की जांच के लिए सक्षम प्राधिकारी से ‘पूर्व मंजूरी’ लेना अनिवार्य है।

“जज के खिलाफ लगाए गए आरोप बेहद गंभीर प्रकृति के हैं, लेकिन शिकायत में कोई ठोस आधार नहीं है। यह याचिका कानूनी रूप से विचार करने योग्य ही नहीं है।” — जस्टिस शायना पाटिल, विशेष न्यायाधीश

क्या होती है ‘जीरो FIR’?

जीरो एफआईआर का मतलब है कि कोई भी व्यक्ति किसी भी थाने में शिकायत दर्ज करा सकता है, चाहे वह अपराध उस थाने के अधिकार क्षेत्र में हुआ हो या नहीं। बाद में इसे संबंधित थाने में ट्रांसफर कर दिया जाता है। इस मामले में शिकायतकर्ता इसी का फायदा उठाकर मुंबई में मामला दर्ज कराना चाहता था।

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