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Advocate limit: जातिवादी गुंडे…वकील का काम कोर्ट में बहस करना है, न कि मंच से भीड़ को भड़काना

Advocate limit: पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने एक वकील की याचिका को खारिज कर दिया।

वकील अपने खिलाफ केस रद्द करने की मांग की थी

हाईकोर्ट में वकील ने अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर रद्द करने की मांग की थी। वकील रजत कालसन पर आरोप है कि उन्होंने एक जनसभा में कुछ लोगों को ”जातिवादी गुंडे” कहा था। कोर्ट ने कहा कि इस तरह की भाषा बोलने की आजादी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के दायरे में नहीं आती, क्योंकि यह पूरी जाति या समुदाय को अपराधी और नैतिक रूप से दोषी ठहराने जैसा है।

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मतलब समझाया

कोर्ट ने कहा कि सार्वजनिक रूप से ऐसे शब्द बोलना, खासकर भावनात्मक माहौल में खतरनाक है। इससे समाज में नफरत फैलने, शांति भंग होने और हिंसा भड़कने का जोखिम रहता है। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मतलब यह नहीं है कि कोई भी ऐसा कुछ कहे जिससे देश की एकता और अखंडता को खतरा हो।

यह है मामला

रजत कालसन पर जुलाई 2024 में हिसार में एक जनसभा के दौरान दिए गए भाषण को लेकर केस दर्ज हुआ था। आरोप है कि उन्होंने एक हत्या के मामले में कुछ ग्रामीणों को ”जातिवादी गुंडे” कहा, जिन्होंने कथित रूप से एक अनुसूचित जाति की महिला और अन्य लोगों को झूठे केस में फंसाया था।

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