Saturday, September 26, 2026
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Missing Adults:वयस्कों के लापता होने पर भी तत्काल FIR अनिवार्य’; सुप्रीम कोर्ट ने आदेश स्पष्ट करते हुए राज्यों को अवमानना की चेतावनी दी

केस एवं प्रक्रियात्मक सारांश (Overview Matrix)

विधिक/प्रशासनिक बिंदुविवरण (August 2026)
माननीय पीठन्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह एवं न्यायमूर्ति आर. महादेवन
मामले का शीर्षकG. Ganesh v. State of Tamil Nadu & Ors.
मुख्य कानूनी सिद्धांत1. ‘लापता व्यक्ति’ की परिभाषा में हर नागरिक (वयस्क, बच्चे, पुरुष, महिला) शामिल है।
2. सूचना मिलते ही तत्काल FIR दर्ज करना अनिवार्य है।
मुख्य प्रशासनिक आदेश1. रिपोर्ट न देने वाले राज्यों के मुख्य सचिवों और डीजीपी को अवमानना नोटिस।
2. 6 सप्ताह में देश भर के मिसिंग पर्सन पोर्टल्स का एकीकरण करने के निर्देश।
अगली सुनवाई की तिथि5 अक्टूबर 2026

Missing Adults: सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि किसी व्यक्ति के लापता होने की सूचना मिलने पर तुरंत प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज करने का उसका निर्देश केवल बच्चों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आयु या लिंग के भेदभाव के बिना वयस्कों (Adults) पर भी समान रूप से लागू होता है।

न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की पीठ ने 5 अगस्त (2026) के अपने आदेश में इस बात पर गहरा आश्चर्य और रोष व्यक्त किया कि कुछ राज्य सरकारों ने उसके पिछले आदेश में प्रयुक्त “व्यक्ति” (Person) शब्द का अर्थ केवल ‘बच्चे’ से लगाया था।

पीठ ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा: “हम इसे ऐसे राज्यों द्वारा खड़ा किया गया एक जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण (Mala fide) भ्रम पाते हैं। हमारे पिछले आदेश की भाषा स्पष्ट और असंदिग्ध है। ‘व्यक्ति’ (Person) शब्द का अर्थ हर व्यक्ति है, चाहे उसकी उम्र या लिंग कुछ भी हो।”

सुप्रीम कोर्ट की मुख्य चेतावनियां और निर्देश

  1. मुख्य सचिवों और DGPs को मानहानि/अवमानना नोटिस (Contempt Notice):
    • पीठ ने चेतावनी दी कि यदि किसी भी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश ने 22 मई के उसके निर्देशों का अक्षरशः पालन नहीं किया है, तो संबंधित मुख्य सचिव (Chief Secretary) और पुलिस महानिदेशक (DGP) को अवमानना नोटिस जारी कर व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया जाएगा।
    • स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने में विफल रहे राज्यों के शीर्ष अधिकारियों के खिलाफ अदालत ने अवमानना का कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं।
  2. लद्दाख प्रशासन पर सख्त रुख:
    • अदालत ने पाया कि केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख ने कोई जवाब दाखिल नहीं किया है। कोर्ट ने लद्दाख के मुख्य सचिव और डीजीपी को व्यक्तिगत रूप से शपथ पत्र दाखिल कर अनुपालन न करने का स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया।
  3. लापता व्यक्तियों के पोर्टल को एकीकृत (Integrate) करने की समय-सीमा:
    • शीर्ष अदालत ने देश भर में लापता व्यक्तियों से जुड़े सभी संबंधित सरकारी पोर्टलों को एकीकृत करने की प्रक्रिया को 6 सप्ताह के भीतर पूरा करने का निर्देश दिया।

मामले की पृष्ठभूमि (Case Background)

  1. मूल याचिका (2011 का मामला)
    • यह मामला जी. गणेश नामक व्यक्ति द्वारा दायर याचिका से शुरू हुआ था, जिनकी नाबालिग बेटी 2011 में चेन्नई से लापता हो गई थी। विभिन्न एजेंसियों की जांच के बावजूद जब बच्ची का पता नहीं चला, तो पुलिस ने मामले को ‘अज्ञात/अट्रेस’ बताकर बंद कर दिया था। मद्रास हाई कोर्ट द्वारा हस्तक्षेप से इनकार के बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।
  2. सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्वतः संज्ञान (Suo Motu Expansion)
    • मामले में सामने आई व्यवस्थागत कमियों को देखते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे का स्वतः संज्ञान लेते हुए देश भर में बच्चों के लापता होने और मानव तस्करी (Child Trafficking) के व्यापक मुद्दे पर सुनवाई शुरू की।
  3. 22 मई 2026 का ऐतिहासिक आदेश
    • 22 मई को सुप्रीम कोर्ट ने पूरे देश के लिए निर्देश जारी किए थे कि किसी भी लापता व्यक्ति की शिकायत मिलने पर तुरंत एफआईआर (FIR) दर्ज की जाए। हालांकि, कुछ राज्यों ने इसे केवल नाबालिगों तक सीमित मानकर लागू किया, जिस पर अब कोर्ट ने अपनी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है।
  4. मामले में सहायता हेतु समिति
    • कोर्ट की सहायता के लिए वरिष्ठ अधिवक्ता मुक्ता गुप्ता की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया है। अपर सॉलिसिटर जनरल (ASG) अर्चना पाठक दवे को भी केंद्र सरकार का प्रतिनिधित्व करने के लिए इस समिति में शामिल किया गया है।

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