केस एवं प्रशासनिक सारांश (Overview Matrix)
| प्रशासनिक/विधिक बिंदु | विवरण (August 2026) |
| प्रस्तावित संस्थान | नेशनल लीगल एकेडमी (National Legal Academy – NLA) |
| स्थान | IIULER कैंपस, धाराबन्दोड़ा (गोवा) |
| नियामक संस्था | बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) |
| सुप्रीम कोर्ट निर्देश आधार | 7 जुलाई 2026 का सुप्रीम कोर्ट आदेश (लेखक: न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा) |
| मुख्य उद्देश्य | 1. वकीलों के लिए 10 दिन से 2 सप्ताह का कंपलसरी ट्रेनिंग कोर्स। 2. वकीलों के विधिक नैतिकता, तकनीकी ज्ञान और निरंतर विधिक शिक्षा को बढ़ावा देना। |
| कैंपस निर्माण सीमा | 50 एकड़ से अधिक भूमि पर 2 वर्षों के भीतर निर्माण पूरा करने का लक्ष्य। |
Compulsory Training: बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा ने घोषणा की है कि गोवा स्थित इंडिया इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ लीगल एजुकेशन एंड रिसर्च (IIULER) परिसर में एक नेशनल लीगल एकेडमी (National Legal Academy – NLA) स्थापित की जाएगी, जहां देशभर के सभी वकीलों के लिए अनिवार्य कानूनी प्रशिक्षण (Compulsory Training) प्राप्त करना अनिवार्य होगा।
यह निर्णय सर्वोच्च न्यायालय के 7 जुलाई (2026) के उस निर्देश के बाद आया है, जिसमें बीसीआई को भोपाल स्थित ‘नेशनल ज्यूडिशियल एकेडमी’ (National Judicial Academy) की तर्ज पर वकीलों के सतत विधिक शिक्षण के लिए एक एकेडमी स्थापित करने को कहा गया था।
यह घोषणा BCI अध्यक्ष ने 9 अगस्त को IIULER के ‘दीक्षारंभ’ (उन्मुखीकरण कार्यक्रम – Batch of 2026) के दौरान की। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश और IIULER के चांसलर न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा (Justice P.S. Narasimha) थे, जिन्होंने सर्वोच्च न्यायालय का वह ऐतिहासिक आदेश लिखा था।
🏛️ कार्यक्रम एवं घोषणा के मुख्य बिंदु
- 10 दिन से 2 हफ्ते का अनिवार्य प्रशिक्षण पाठ्यक्रम: BCI अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा ने बताया कि इस एकेडमी में देशभर के युवा और नए पंजीकृत वकीलों को 10 दिनों से लेकर 2 सप्ताह का अनिवार्य कोर्स पूरा करना होगा। IIULER के छात्रों को भी यहां आने वाले वरिष्ठ वकीलों, न्यायाधीशों और कानून के दिग्गज प्रोफेसरों से बातचीत और सीखने का अवसर मिलेगा।
- सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन: न्यायमूर्ति नरसिम्हा द्वारा दिए गए फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि नामांकन के बाद (Post-Enrolment) वकीलों के लिए एक संरचित, आजीवन कानूनी शिक्षा प्रणाली होनी चाहिए, जिससे वकीलों में नैतिक मानकों (Ethical Standards) को मजबूत किया जा सके और उन्हें आधुनिक तकनीक (Technology) के अनुकूल बनाया जा सके।
- धाराबन्दोड़ा (Dharbandora) में 50 एकड़ का मुख्य परिसर: 8 अगस्त को गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत, एडवोकेट जनरल देवीडास पांगम और न्यायमूर्ति नरसिम्हा के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक हुई, जिसमें गोवा के धाराबन्दोड़ा में 50 एकड़ से अधिक में फैले IIULER के मुख्य परिसर का निर्माण 2 वर्षों के भीतर पूरा करने का निर्णय लिया गया।
छात्रों को न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा का संदेश
- बहुविषयक दृष्टिकोण (Multidisciplinary Approach): न्यायमूर्ति नरसिम्हा ने छात्रों को कानूनी शिक्षा के साथ-साथ अन्य विषयों को समझने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में विभिन्न विषयों के बीच की सीमाएं समाप्त हो जाएंगी, इसलिए वकीलों को व्यापक समझ रखनी होगी।
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का सोच-समझकर उपयोग: एआई (AI) तकनीकों के प्रयोग पर सतर्क करते हुए उन्होंने छात्रों को सलाह दी कि वे तकनीक अपनाते समय अपनी स्वयं की सोचने और विश्लेषण करने की क्षमता (Power to Think) को प्रभावित न होने दें।
भारत में विधिक पेशे (Legal Profession) को विनियमित करने और अधिवक्ताओं के व्यावसायिक मानकों को बनाए रखने के लिए एक स्पष्ट वैधानिक ढांचा मौजूद है।
1. एडवोकेट्स एक्ट, 1961 (Advocates Act, 1961)
- एकल वर्ग की स्थापना: इस अधिनियम ने देश भर में लीगल प्रैक्टिस के लिए ‘अधिवक्ता’ (Advocate) नामक एक एकल श्रेणी का गठन किया।
- संस्थागत ढांचा: इसके तहत राज्य बार परिषदों (State Bar Councils) और बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) का गठन किया गया।
- अनुशासनात्मक कार्रवाई: धारा 35 के तहत पेशेवर कदाचार (Professional Misconduct) के मामलों की जांच और दंडात्मक कार्रवाई के अधिकार दिए गए हैं।
2. बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के नियम
- एआईबीई (AIBE) परीक्षा: वकीलों को देश में वकालत जारी रखने के लिए ऑल इंडिया बार एग्जामिनेशन (AIBE) पास करना अनिवार्य है।
- आचार संहिता (Code of Conduct): BCI Rules (Part VI, Chapter II) के तहत वकीलों के न्यायालय, मुवक्किल, विरोधियों और समाज के प्रति कर्तव्यों व व्यावसायिक नैतिकता के नियम तय किए गए हैं।
- विज्ञापनों पर रोक: नियम 36 के अनुसार भारत में अधिवक्ता सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से अपने काम का विज्ञापन नहीं कर सकते।
3. सतत विधिक शिक्षा (Continuing Legal Education – CLE)
- कौशल विकास: कानून में लगातार हो रहे बदलावों, नए संशोधनों और साइबर/टेक्नोलॉजी लॉ जैसे विषयों से वकीलों को अपडेट रखने का ढांचा।
- वर्कशॉप और सेमिनार: BCI, नेशनल लॉ यूनिवर्सिटीज (NLUs) और बार एसोसिएशन नियमित रूप से ट्रेनिंग प्रोग्राम और रिफ्रेशर कोर्स आयोजित करते हैं।

