Thursday, October 1, 2026
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Matrimonial discord:  पत्नी पर पति का ‘फाइनेंशियल दबदबा’ क्रूरता नहीं; आपसी रंजिश निकालने के लिए न करें कानून का इस्तेमाल

Matrimonial discord:  सुप्रीम कोर्ट ने वैवाहिक विवादों को लेकर एक बड़ा फैसला सुनाया है।

आपराधिक मुकदमों को निजी बदला लेने या हिसाब चुकता करने का जरिया नहीं बनाएं

अदालत ने कहा कि अगर किसी खराब वैवाहिक रिश्ते में पति अपनी पत्नी पर आर्थिक रूप से दबदबा (Financial Dominance) बनाए रखता है, तो उसे ‘क्रूरता’ (Cruelty) नहीं माना जा सकता। जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच ने स्पष्ट किया कि आपराधिक मुकदमों को निजी बदला लेने या हिसाब चुकता करने का जरिया नहीं बनाया जाना चाहिए।

‘पैसे का हिसाब मांगना क्रूरता नहीं’

सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना हाईकोर्ट के उस फैसले को पलट दिया, जिसमें पति के खिलाफ दर्ज FIR को रद्द करने से इनकार कर दिया गया था। जस्टिस नागरत्ना ने फैसला लिखते हुए कहा, “पति द्वारा भेजे गए पैसों का हिसाब मांगना क्रूरता की श्रेणी में नहीं आता। यह भारतीय समाज की एक वास्तविकता है जहां घर के पुरुष अक्सर महिलाओं के वित्त (Finances) पर नियंत्रण रखने की कोशिश करते हैं। लेकिन जब तक इससे कोई मानसिक या शारीरिक नुकसान न हो, इसे अपराध नहीं माना जा सकता।”

कोर्ट की 3 बड़ी बातें

  • रोजमर्रा के झगड़े अपराध नहीं: अदालत ने खर्चों को लेकर होने वाले विवाद को “शादी की दैनिक घिसावट” (Daily wear and tear of marriage) करार दिया। इसे IPC की धारा 498A के तहत क्रूरता नहीं कहा जा सकता।
  • सावधानी बरतें अदालतें: बेंच ने कहा कि वैवाहिक मामलों में शिकायतों की जांच बहुत सावधानी से की जानी चाहिए ताकि कानून के दुरुपयोग को रोका जा सके।
  • गलत इरादे से केस: कोर्ट ने पाया कि पति के खिलाफ क्रूरता और दहेज उत्पीड़न के आरोप ‘दुर्भावनापूर्ण’ और ‘अस्पष्ट’ थे, जो केवल परेशान करने के इरादे से लगाए गए थे।

क्या था मामला?

एक महिला ने अपने पति और ससुराल वालों पर दहेज उत्पीड़न और क्रूरता का आरोप लगाते हुए केस दर्ज कराया था। पति ने हाईकोर्ट में इसे रद्द करने की अपील की थी, जो खारिज हो गई। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। शीर्ष अदालत ने 19 दिसंबर के अपने आदेश में इस FIR को रद्द कर दिया। हालांकि, कोर्ट ने यह भी साफ किया कि इस फैसले का असर दोनों पक्षों के बीच चल रहे अन्य वैवाहिक मुकदमों पर नहीं पड़ेगा, वे अपनी मेरिट के आधार पर चलते रहेंगे।

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