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Eviction Row: किरायेदार की कानूनी पैंतराबाजी नहीं चली…और फिर किरायेदार पर सुप्रीम जुर्माना लगा, पूरा फैसला मकान मालिकों के लिए अहम

Eviction Row: सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से जुड़े एक किरायेदारी विवाद में कड़ा रुख अपनाते हुए याचिकाकर्ता (किरायेदार) पर 5 लाख रुपये का जुर्माना ठोक दिया है।

किराएदार घर खाली नहीं कर रहा था

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संजय करोल की बेंच ने किरायेदार की नई चुनौती को खारिज करते हुए इसे “कानून की प्रक्रिया का घोर दुरुपयोग” (Gross abuse of process of law) बताया। मामला सहारनपुर की एक आवासीय संपत्ति के खाली कराने (Eviction) से जुड़ा है। कोर्ट ने बार-बार कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग करने और पहले से तय हो चुके मामले को दोबारा खोलने की कोशिश को “अदालत की गरिमा का उल्लंघन” करार दिया।

मामला क्या था? (The Background)

  • शुरुआत: सितंबर 2022 में रेंट अथॉरिटी ने मकान मालिक-किरायेदार संबंधों की पुष्टि के बाद बेदखली का आदेश दिया था।
    -लंबी कानूनी लड़ाई: इस फैसले को इलाहाबाद हाई कोर्ट और खुद सुप्रीम कोर्ट ने भी बरकरार रखा था। कोर्ट ने किरायेदार को 31 मार्च, 2025 तक घर खाली करने का समय दिया था।
  • चतुराई: सभी कानूनी रास्ते बंद होने के बाद भी, किरायेदार ने रेंट अथॉरिटी के पास ‘रिस्टोरेशन’ (Restoration) आवेदन दायर कर दिया, जिसे मई 2025 में अथॉरिटी ने आश्चर्यजनक रूप से स्वीकार भी कर लिया।

सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी: अधिकार क्षेत्र से बाहर की कार्रवाई

  • कोर्ट ने रेंट अथॉरिटी (ADM, सहारनपुर) और किरायेदार दोनों के आचरण पर सवाल उठाए।
  • टाइटल विवाद: कोर्ट ने स्पष्ट किया कि रेंट अथॉरिटी का काम केवल किरायेदारी से जुड़े मुद्दों को देखना है। संपत्ति के मालिकाना हक (Title/Ownership) का फैसला करना सिविल कोर्ट का काम है, रेंट अथॉरिटी का नहीं।
  • न्यायिक अनुशासन: “एक बार जब सुप्रीम कोर्ट ने बेदखली का आदेश दे दिया, तो कोई भी अधीनस्थ (Subordinate) अथॉरिटी ऐसा आदेश पारित नहीं कर सकती जो उस फैसले को शून्य कर दे।”

ADM सहारनपुर को कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notice)

  • अदालत ने एडिशनल डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट (ADM) के खिलाफ भी सख्त रुख अपनाया था।
  • दोहरी भूमिका: ADM ने पहले खुद एक रिपोर्ट तैयार की जिसमें मकान मालिक के हक पर सवाल उठाए और फिर रेंट अथॉरिटी के रूप में उसी रिपोर्ट के आधार पर आदेश दे दिया।
  • माफीनामा: हालांकि, अधिकारी द्वारा “बिना शर्त माफी” मांगने के बाद, कोर्ट ने उनके खिलाफ अवमानना (Contempt) की कार्यवाही बंद कर दी।

कोर्ट का अंतिम आदेश (The Final Penalty)

  • जुर्माना: किरायेदार पर 5 लाख रुपये का हर्जाना लगाया गया है, जिसे ‘सुप्रीम कोर्ट मिडिल इनकम ग्रुप लीगल एड सोसाइटी’ में जमा करना होगा।
  • मुकदमेबाजी का अंत: कोर्ट ने सभी लंबित आवेदनों को बंद करते हुए इस लंबे समय से चल रहे विवाद पर पूर्ण विराम लगा दिया है।

यह रहा सुप्रीम निष्कर्ष: मुकदमेबाजी की एक सीमा है

यह फैसला उन लोगों के लिए एक बड़ी चेतावनी है जो अदालती आदेशों के बावजूद कानूनी पैंतरेबाजी (Legal Maneuvering) के जरिए न्याय में देरी करने की कोशिश करते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि ‘अंतिम फैसला’ होने के बाद उसे चुनौती देना भारी पड़ सकता है।

IN THE SUPREME COURT OF INDIA
J U D G M E N T
SANJAY KAROL J.
CIVIL APPELLATE JURISDICTION
CIVIL APPEAL NO. OF 2026
(@ Special Leave Petition (Civil) No.27184 of 2025)
RAJESH GOYAL VERSUS M/S LAXMI CONSTRUCTIONS & ORS.

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