Tuesday, August 25, 2026
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Supreme Court on Divorce: तलाक मांग रहे पति को दी नसीहत…शांति से बैठो, ₹15,000 देते रहो और खुश रहो

Supreme Court on Divorce: सुप्रीम कोर्ट ने वैवाहिक विवाद के एक मामले में 54 वर्षीय सरकारी कर्मचारी को बड़ी नसीहत देते हुए कहा है कि वह गुजारा भत्ता (Maintenance) देते रहें और खुश रहें।

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने उस व्यक्ति की याचिका पर सुनवाई की, जो पिछले 16 सालों से अपनी पत्नी से अलग रह रहा है और उसे हर महीने ₹15,000 का गुजारा भत्ता दे रहा है। अदालत ने पत्नी की ओर से क्रूरता के आधार पर तलाक मांग रहे व्यक्ति की याचिका पर सुनवाई करते हुए टिप्पणी की कि ₹15,000 की राशि आज के समय में बहुत कम है।

“₹15,000 आज के जमाने में कुछ भी नहीं”

  • जब पति के वकील ने दलील दी कि ₹65,000 की सैलरी में से ₹15,000 देना उसके लिए काफी भारी पड़ रहा है, तो कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी की।
  • महंगाई का हवाला: कोर्ट ने कहा कि आज के दौर में ₹15,000 की कीमत बहुत मामूली है।
  • अदालत की सलाह: “अगर आप स्थायी गुजारा भत्ता (Permanent Alimony) का कोई अच्छा प्रस्ताव देते, तो हम तलाक पर विचार कर सकते थे। वरना शांति से बैठिए, पैसे देते रहिए और खुश रहिए।”

‘क्रूरता’ का अजीब आधार (Ground of Cruelty)

  • पति ने तलाक के लिए ‘क्रूरता’ और ‘स्वभाव में अंतर’ (Temperamental Differences) का हवाला दिया था। जब कोर्ट ने पूछा कि क्रूरता क्या है, तो पता चला।
  • पत्नी की मांग: पति का आरोप था कि पत्नी उसके साथ हर उस जगह जाना चाहती थी जहाँ उसका ट्रांसफर (Posting) होता था।
  • कोर्ट का सवाल: बेंच ने हैरानी जताते हुए पूछा, “इसमें समस्या क्या है? पत्नी का अपने पति के साथ रहना क्रूरता कैसे हो सकता है?”

पत्नी का पक्ष: वापस साथ रहना चाहती हूँ

  • सुनवाई के दौरान पत्नी के वकील ने स्पष्ट किया।
  • साथ रहने की इच्छा: पत्नी स्थायी गुजारा भत्ता (एकमुश्त राशि) नहीं चाहती, बल्कि वह अपने पति के साथ वापस रहना चाहती है।
  • वर्तमान स्थिति: वह फिलहाल अपनी मां के साथ रह रही है और इस शादी से उनका कोई बच्चा नहीं है।

केस की वर्तमान स्थिति (Key Highlights)

विषयअदालत की टिप्पणी / निर्देश
पति की आय₹65,000 प्रति माह।
अलगाव की अवधिपिछले 16 साल से अलग रह रहे हैं।
स्थायी समाधानकोर्ट ने दोनों पक्षों को ‘Permanent Alimony’ की किसी राशि पर विचार करने का समय दिया है।
अगली सुनवाई27 अप्रैल, 2026

समाधान की तलाश

सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल याचिका को पूरी तरह खारिज नहीं किया है, बल्कि दोनों पक्षों को एक सम्मानजनक वित्तीय समझौते (Alimony) पर पहुंचने का मौका दिया है। कोर्ट का संदेश साफ था कि केवल छोटे-मोटे मतभेदों या पत्नी के साथ रहने की इच्छा को ‘क्रूरता’ बताकर 16 साल पुराने रिश्ते को बिना उचित मुआवजे के खत्म नहीं किया जा सकता।

IN THE SUPREME COURT OF INDIA
CORAM: J.K.MAHESHWARI…J, ATUL S. CHANDURKAR….J.
CIVIL APPELLATE JURISDICTION
CIVIL APPEAL NO. OF 2026
(@ SLP (C) NOS.19840-19841 OF 2021)
THE STATE OF UTTARAKHAND
VERSUS
SARITA SINGH AND ORS.

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