Sunday, August 30, 2026
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Justice Bindal Excerpts: AI जज का विकल्प नहीं हो सकता…अदालती फैसलों में मानवीय तर्क ही रहेगा सर्वोपरि; जस्टिस बिंदल का बड़ा बयान

Justice Bindal Excerpts: सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस राजेश बिंदल ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डिजिटल उपकरणों के उपयोग पर एक महत्वपूर्ण कानूनी और नैतिक रेखा खींची है।

ज्यूडिशियल प्रोसेस री-इंजीनियरिंग एंड डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन’ सम्मेलन के चौथे सत्र की अध्यक्षता करते हुए जस्टिस बिंदल ने जजों और कानूनी विशेषज्ञों को तकनीक के संतुलित उपयोग की सलाह दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि तकनीक न्यायपालिका का ‘सहारा’ तो हो सकती है, लेकिन ‘विकल्प’ नहीं।

सहायक यंत्र बनाम न्यायिक तर्क (Supportive vs. Decisive)

  • जस्टिस बिंदल ने तकनीक की भूमिका को स्पष्ट किया।
  • केवल एक ‘एड’ (Aid): AI और डिजिटल टूल्स का उपयोग केवल अदालती कार्यवाही को सुगम बनाने और जजों की सहायता के लिए किया जाना चाहिए।
  • रीजनिंग पर कोई समझौता नहीं: न्यायिक तर्क (Judicial Reasoning) और निर्णय लेने की प्रक्रिया में तकनीक को हावी होने की अनुमति नहीं दी जा सकती। फैसला हमेशा मानवीय संवेदना और कानूनी समझ पर आधारित होना चाहिए।

डेटा गोपनीयता और ओपन-सोर्स प्लेटफॉर्म पर चिंता

  • न्यायाधीश ने डिजिटल युग की एक बड़ी चुनौती की ओर भी इशारा किया।
  • गोपनीयता का जोखिम: उन्होंने ओपन-सोर्स (Open-source) प्लेटफॉर्म्स के उपयोग पर चिंता जताई।
  • डेटा सुरक्षा: न्यायिक डेटा और वादियों (Litigants) की जानकारी की गोपनीयता (Confidentiality) सुनिश्चित करना सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए, जिसमें तकनीकी सेंधमारी का खतरा बना रहता है।

डिजिटल परिवर्तन के पांच सत्र (The 2-Day Conference)

  • तकनीकी उन्नति: पांचवें सत्र में विभिन्न हाई कोर्ट्स द्वारा अपनाई गई नई तकनीकों का प्रदर्शन किया गया, जिसकी अध्यक्षता जस्टिस संदीप मेहता ने की।
  • भविष्य का रोडमैप: समापन सत्र में जस्टिस जे.के. माहेश्वरी ने न्यायिक सुधारों और न्याय वितरण प्रणाली में निरंतर तकनीकी प्रगति के महत्व पर जोर दिया।

सम्मेलन के मुख्य बिंदु (Key Highlights)

बिंदुविवरण
आयोजकसुप्रीम कोर्ट की ई-कमेटी और न्याय विभाग।
मुख्य संदेशतकनीक जजों का काम आसान कर सकती है, पर जज की जगह नहीं ले सकती।
भागीदारीसुप्रीम कोर्ट के जज, हाई कोर्ट्स के मुख्य न्यायाधीश और IT कमेटी के सदस्य।
महत्वपूर्ण चिंताAI द्वारा डेटा का उपयोग और उसकी गोपनीयता।

तकनीक और न्याय का संतुलन

जस्टिस बिंदल का यह बयान ऐसे समय में आया है जब दुनिया भर की कानूनी प्रणालियाँ AI को अपनाने की कोशिश कर रही हैं। उनका यह स्पष्टीकरण कि “AI न्यायिक तर्क को ओवरराइड नहीं कर सकता”, यह सुनिश्चित करता है कि भारतीय न्यायपालिका अपनी मानवीय गरिमा और ‘रूल ऑफ लॉ’ को तकनीक के हाथों में नहीं सौंपेगी। तकनीक केवल न्याय को तेज करने का एक जरिया है, न्याय करने का अधिकार नहीं।

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