Saturday, August 15, 2026
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Inheritance Law: बेटियों के अधिकार पर बड़ी बहस…पैतृक संपत्ति में समान, मगर स्व-अर्जित में चलेगी आपकी मर्जी, जवाब खबर को पढ़कर जानिए

Inheritance Law: भारत में वर्तमान कानूनी स्थिति के अनुसार बेटियां संपत्ति में बेटों के बराबर अधिकार रखती हैं। कानून अब बेटियों को केवल ‘मेहमान’ नहीं, बल्कि परिवार के मूल सदस्य के रूप में देखता है।कानूनी रूप से, अब बेटों और बेटियों के बीच कोई भेदभाव नहीं है। समानता केवल कागजों पर नहीं है, बल्कि अदालतों द्वारा सख्ती से लागू की जाती है।

महत्वपूर्ण कानूनी बिंदु जो आपको जानने चाहिए

स्थितिबेटी का अधिकार
संपत्ति का बंटवाराबेटी किसी भी समय पैतृक संपत्ति के बंटवारे की मांग कर सकती है।
रिहायशी घरपहले बेटियों को पैतृक घर में बंटवारा मांगने का अधिकार नहीं था, लेकिन अब वे घर के बंटवारे की मांग भी कर सकती हैं और वहाँ रह भी सकती हैं।
त्याग पत्र (Relinquishment Deed)यदि बेटी अपनी इच्छा से अपना हिस्सा भाइयों के पक्ष में छोड़ना चाहती है, तो वह कानूनी रूप से ऐसा कर सकती है, लेकिन इसके लिए उस पर दबाव नहीं बनाया जा सकता।

संपत्ति के प्रकार और उत्तराधिकार का आधार

पैतृक संपत्ति (Ancestral Property): जन्म से अधिकार

  • पैतृक संपत्ति वह होती है जो परिवार की चार या अधिक पीढ़ियों से चली आ रही हो। हिंदू उत्तराधिकार (संशोधन) अधिनियम, 2005 ने इस क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव किए।
  • समान अधिकार: अब बेटी जन्म से ही अपने पिता की पैतृक संपत्ति में ‘सह-दायिक’ (Coparcener) है। इसका अर्थ है कि उसका अधिकार बिल्कुल वैसा ही है जैसा उसके भाई का है।
  • शादी का प्रभाव: बेटी की शादी होने से उसका पैतृक संपत्ति पर अधिकार खत्म नहीं होता। वह विवाहित हो या अविवाहित, वह अपने हिस्से की हकदार बनी रहती है।
  • सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला (2020): विनीता शर्मा बनाम राकेश शर्मा मामले में कोर्ट ने स्पष्ट किया कि 2005 के संशोधन का लाभ पाने के लिए यह जरूरी नहीं है कि पिता उस समय जीवित हों। बेटी का अधिकार उसके जन्म से जुड़ा है, न कि पिता की मृत्यु की तारीख से।

स्व-अर्जित संपत्ति (Self-Acquired Property): वसीयत का महत्व

  • यह वह संपत्ति है जिसे माता-पिता ने अपनी कमाई से खरीदा है। यहाँ नियम थोड़े अलग हैं।
  • वसीयत (Will) होने पर: यदि माता-पिता ने वसीयत लिखी है, तो संपत्ति उसी को मिलेगी जिसका नाम वसीयत में है। यहाँ माता-पिता स्वतंत्र हैं कि वे अपनी संपत्ति किसे देना चाहते हैं। वे चाहें तो पूरी संपत्ति बेटों को दे सकते हैं या केवल बेटियों को।
  • बिना वसीयत के (Intestate): यदि माता-पिता की मृत्यु बिना वसीयत छोड़े हो जाती है, तो कानून स्वतः ही इसे बेटों और बेटियों के बीच समान रूप से बांट देता है। उत्तराधिकार कानून में बेटियों को ‘क्लास-1 वारिस’ (Class-I Heir) माना गया है, जो बेटों और पति/पत्नी के बराबर खड़ी होती हैं।

सामाजिक वास्तविकता बनाम कानूनी अधिकार

  • कानून स्पष्ट होने के बावजूद, आज भी कई महिलाएं पारिवारिक विवाद से बचने के लिए अपना हिस्सा नहीं मांगतीं। अक्सर यह मान लिया जाता है कि शादी में दिया गया ‘स्त्रीधन’ (गहने, उपहार) ही उनका हिस्सा है।
  • कानूनी तथ्य: शादी में मिले उपहार या गहने बेटी के ‘स्त्रीधन’ का हिस्सा हैं, लेकिन वे उसे पैतृक संपत्ति में मिलने वाले उसके कानूनी हक से वंचित नहीं करते।
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