Tuesday, September 1, 2026
HomeJustice Yadav Retirement: मेरी बातों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया…विदाई भाषण...
Array

Justice Yadav Retirement: मेरी बातों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया…विदाई भाषण में भावुक हुए जस्टिस शेखर यादव, पढ़ें उनका संबोधन

Justice Yadav Retirement: इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस शेखर कुमार यादव अपनी सेवानिवृत्ति (रिटायरमेंट) के दिन एक बार फिर चर्चा में हैं।

बिना किसी गलती के निशाना बनाया: जस्टिस शेखर यादव

15 अप्रैल, 2026 को अपने विदाई समारोह (Full Court Reference) के दौरान उन्होंने उन विवादों पर सफाई दी, जिनके कारण दिसंबर 2024 में उनके खिलाफ राज्यसभा में महाभियोग (Impeachment) का नोटिस दिया गया था। जस्टिस शेखर कुमार यादव ने विदाई भाषण में उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने कभी भी जाति या धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं किया और उन्हें बिना किसी गलती के निशाना बनाया गया।

विवाद क्या था? (The Controversy)

  • VHP का कार्यक्रम: 8 दिसंबर, 2024 को विश्व हिंदू परिषद (VHP) के एक लीगल सेल कार्यक्रम में जस्टिस यादव ने कथित तौर पर धर्म, शासन और अल्पसंख्यक समुदायों को लेकर कुछ टिप्पणियां की थीं।
  • आरोप: सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के आधार पर विपक्षी नेताओं ने इसे “हेट स्पीच” करार दिया। आरोप था कि उन्होंने कहा था कि “कानून बहुसंख्यकों के अनुसार काम करता है।”
  • कार्रवाई: इसके बाद 13 दिसंबर, 2024 को राज्यसभा के 55 सांसदों (कपिल सिब्बल, मनोज झा, साकेत गोखले आदि) ने उनके खिलाफ महाभियोग का नोटिस दिया था।

विदाई भाषण की मुख्य बातें

  • जस्टिस यादव ने चीफ जस्टिस अरुण भंसाली की मौजूदगी में अपनी बात रखी।
  • निष्पक्षता का दावा: “यहां हर जाति के वकील मौजूद हैं; कोई यह नहीं कह सकता कि मैंने न्याय करते समय भेदभाव किया।”
  • बार का समर्थन: उन्होंने वकीलों का शुक्रिया अदा करते हुए कहा कि अगर उस कठिन दौर में बार एसोसिएशन का साथ न मिलता, तो वे “टूट चुके होते।”
  • निशाना बनाया गया: उन्होंने कहा कि उनके शब्दों को गलत तरीके से पेश किया गया और बिना किसी गलती के उनके खिलाफ जांच शुरू की गई।

भारत में जज को हटाने की प्रक्रिया (Impeachment Process)

भारत में हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट के जज को हटाना अत्यंत कठिन प्रक्रिया है। संविधान के अनुच्छेद 124(4) और न्यायाधीश जांच अधिनियम, 1968 के तहत इसे अंजाम दिया जाता है।

प्रक्रिया के चरण

  • नोटिस: लोकसभा के कम से कम 100 या राज्यसभा के 50 सांसदों के हस्ताक्षर वाला नोटिस सभापति/अध्यक्ष को दिया जाता है। (जस्टिस यादव के मामले में 55 सांसदों ने दिया था)।
  • जांच समिति: नोटिस स्वीकार होने पर 3 सदस्यों की समिति (SC जज, HC के मुख्य न्यायाधीश और एक प्रतिष्ठित न्यायविद) आरोपों की जांच करती है।
  • सदन में वोटिंग: यदि समिति दोषी पाती है, तो संसद के दोनों सदनों में विशेष बहुमत (कुल सदस्यता का बहुमत और उपस्थित व मतदान करने वालों का 2/3) से प्रस्ताव पारित होना अनिवार्य है।
  • राष्ट्रपति का आदेश: अंत में राष्ट्रपति जज को हटाने का आदेश जारी करते हैं।

जस्टिस शेखर यादव का करियर ग्राफ़

पड़ावतारीख
अतिरिक्त जज (Additional Judge)12 दिसंबर, 2019
स्थायी जज (Permanent Judge)26 मार्च, 2021
महाभियोग नोटिस (Impeachment Notice)13 दिसंबर, 2024
सेवानिवृत्ति (Retirement)15 अप्रैल, 2026

एक विवादित लेकिन प्रभावशाली कार्यकाल

जस्टिस शेखर यादव अपने उन फैसलों के लिए भी जाने जाते रहे हैं जिनमें उन्होंने ‘गाय’ को राष्ट्रीय पशु घोषित करने और भारतीय संस्कृति की रक्षा पर कड़ी टिप्पणियां की थीं। उनके रिटायरमेंट के साथ ही उनके खिलाफ चल रही महाभियोग की प्रक्रिया अब तकनीकी रूप से प्रभावहीन हो जाएगी, क्योंकि वे अब पद पर नहीं हैं।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Patna
light rain
30 ° C
30 °
30 °
84 %
4.1kmh
98 %
Tue
30 °
Wed
27 °
Thu
33 °
Fri
32 °
Sat
32 °

Recent Comments