Justice for Assam’s Abhi-Neel: असम के कार्बी आंगलोंग (Karbi Anglong) में 8 जून, 2018 को हुए दो युवकों अभिजीत नाथ और नीलोत्पल दास की नृशंस हत्या (Lynching) के मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है।
करीब आठ साल के लंबे इंतजार के बाद, सत्र न्यायालय ने माना कि यह मामला केवल ‘साधारण हत्या’ नहीं था, बल्कि एक ऐसी भीड़ द्वारा अंजाम दिया गया कृत्य था जिसने सामूहिक रूप से कानून को अपने हाथ में लिया था। नगांव (Nagaon) की एक सत्र अदालत ने इस मामले में 20 लोगों को हत्या और दंगा भड़काने का दोषी करार दिया है, जबकि 25 अन्य को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया।
2018 की वो काली रात: क्या हुआ था?
- पीड़ित: गुवाहाटी के व्यवसायी अभिजीत नाथ (30) और संगीतकार नीलोत्पल दास (29)।
- घटना: दोनों दोस्त कार्बी आंगलोंग के पहाड़ी इलाकों में घूमने गए थे। जब वे पंजुरी कछारी गांव से गुजर रहे थे, तो स्थानीय निवासियों ने उन्हें ‘सोपाधरा’ (बच्चा चोर) समझ लिया।
- क्रूरता: भीड़ ने उन्हें बेरहमी से पीटा। सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में नीलोत्पल को अपनी जान की भीख मांगते और अपने माता-पिता का नाम बताते हुए सुना गया था, लेकिन भीड़ ने एक नहीं सुनी।
कोर्ट का कड़ा अवलोकन: पूरे इलाके की संलिप्तता
- जज ने अपने फैसले में सबूतों के आधार पर कुछ बहुत महत्वपूर्ण बातें कहीं।
- सामूहिक भागीदारी: “यह साधारण हत्या नहीं है; रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्यों से पूरी लोकैलिटी की संलिप्तता स्थापित होती है।”
- असहयोग: अदालत ने नोट किया कि घटना के बाद आसपास के गांवों के पुरुष सदस्य फरार हो गए और उन्होंने जांच अधिकारियों के साथ बिल्कुल सहयोग नहीं किया।
- भीड़ का आकार: गवाहों के अनुसार, घटनास्थल पर 150 से 200 लोग जमा थे, जिनमें से 50 से 60 लोग हथियारों के साथ दोनों लड़कों पर हमला कर रहे थे।
सजा और बरी होने का आधार
- दोषी (20 लोग): अदालत ने 20 लोगों को हत्या (Murder), गैर-कानूनी रूप से इकट्ठा होने (Unlawful Assembly) और दंगा करने (Rioting) का दोषी पाया। इनमें से 19 की पहचान चश्मदीदों ने की, जबकि 20वें आरोपी (ओन्डा मेच) की संलिप्तता उसके ‘न्यायेतर इकबालिया बयान’ (Extra-judicial confession) से साबित हुई।
- बरी (25 लोग): अभियोजन पक्ष (Prosecution) इन 25 लोगों के खिलाफ ठोस सबूत पेश करने में विफल रहा, जिसके कारण उन्हें रिहा करने का आदेश दिया गया।
केस के मुख्य बिंदु (Key Highlights)
| बिंदु | विवरण |
| कुल आरोपी | शुरुआत में 48 (3 नाबालिग पाए गए, 45 पर मुकदमा चला)। |
| दोषी ठहराए गए | 20 लोग (मुख्य धाराओं: IPC 302, 147, 148, 149 के तहत)। |
| मुख्य गवाह | 71 गवाहों का परीक्षण किया गया, जिनमें से 5 मुख्य चश्मदीद थे। |
| अफवाह का असर | ‘बच्चा चोर’ की सोशल मीडिया अफवाहों ने इस हिंसा को भड़काया था। |
समाज के लिए संदेश
अदालत ने इस बात पर चिंता जताई कि कैसे मोबाइल की फ्लैशलाइट और मोटरसाइकिल की हेडलाइट की रोशनी में भीड़ ने पहचान करके उन लड़कों को निशाना बनाया। यह फैसला उन लोगों के लिए एक कड़ा संदेश है जो ‘भीड़ न्याय’ (Mob Justice) पर भरोसा करते हैं और अफवाहों के आधार पर निर्दोषों की जान लेते हैं।
अधूरा पर जरूरी इंसाफ
अभिजीत और नीलोत्पल के माता-पिता और पूरे असम के लिए यह एक भावनात्मक क्षण है। हालांकि 25 लोग बरी हो गए हैं, लेकिन 20 लोगों को सजा मिलना यह साबित करता है कि कानून की नजर से सामूहिक हिंसा के अपराधी भी बच नहीं सकते।

