Thursday, October 29, 2026
HomeLatest NewsAccident vs. Assault: एक ड्राइवर ने जज की कार को मार दी...

Accident vs. Assault: एक ड्राइवर ने जज की कार को मार दी टक्कर…बजाय कड़े तेवर के इस ड्राइवर पर क्यों हुआ काेर्ट नरम, पढ़ें फैसला

Accident vs. Assault: केरल हाई कोर्ट ने हाल ही में एक बस ड्राइवर के खिलाफ चल रही सभी आपराधिक कार्यवाहियों को रद्द कर दिया है।

हाईकोर्ट के जस्टिस श्याम कुमार वी.एम. ने बस ड्राइवर शाजीर की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि एफआईआर (FIR) में ऐसा कोई भी तथ्य नहीं है जिससे यह साबित हो कि ड्राइवर का इरादा किसी सरकारी कर्मचारी पर हमला करने या उसके काम में बाधा डालने का था। ड्राइवर पर एक न्यायिक अधिकारी (जज) की कार को टक्कर मारने का आरोप था। कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण कानूनी स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि यह घटना महज एक मोटर एक्सीडेंट (सड़क दुर्घटना) है, न कि कोई आपराधिक हमला।

मामला क्या था? (The Incident)

  • घटना: 4 अप्रैल, 2018 को सुबह करीब 9:30 बजे, ‘MACT’ जज की आधिकारिक कार इंदिरा जंक्शन के पास थी।
  • आरोप: आरोप था कि “तसाहिल” नामक निजी बस के ड्राइवर ने कार को दाईं ओर से ओवरटेक किया और टक्कर मार दी। टक्कर से कार का शीशा टूट गया और जज के ड्राइवर को चोटें आईं। कार की मरम्मत में ₹60,000 का खर्च आया।
  • पुलिस की कार्रवाई: पुलिस ने बस ड्राइवर पर सरकारी कर्मचारी पर हमला (IPC 353), खतरनाक हथियार से चोट पहुँचाना (IPC 324) और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने का मामला दर्ज किया था।

कोर्ट के मुख्य कानूनी तर्क (Key Legal Grounds)

    • A. जज की कार ‘पब्लिक ट्रांसपोर्ट’ नहीं है: कोर्ट ने ‘सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम, 1984’ की व्याख्या करते हुए कहा, यह कानून केवल कुछ विशेष श्रेणियों जैसे ‘पब्लिक ट्रांसपोर्ट’ (बस, ट्रेन आदि) पर लागू होता है। जज की आधिकारिक कार ‘सार्वजनिक संपत्ति’ तो हो सकती है, लेकिन वह ‘पब्लिक ट्रांसपोर्ट’ की श्रेणी में नहीं आती। इसलिए, इस कानून के तहत मामला नहीं बनता।
    • B. धारा 353 (सरकारी कर्मचारी पर हमला) का गलत इस्तेमाल: कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी को ‘ड्यूटी करने से रोकने’ के लिए केवल ‘बाधा’ (Obstruction) डालना काफी नहीं है। इसके लिए आपराधिक बल (Criminal Force) या शारीरिक ऊर्जा का उपयोग उस व्यक्ति के खिलाफ होना चाहिए।
      सड़क दुर्घटना में हुई टक्कर को सरकारी काम में बाधा डालने वाला ‘हमला’ नहीं माना जा सकता।
    • C. धारा 324 (खतरनाक साधन से चोट): जज के ड्राइवर को शीशा टूटने से चोटें आईं, लेकिन कोर्ट ने कहा कि ड्राइवर ने किसी ‘खतरनाक हथियार’ का इस्तेमाल जानबूझकर हमला करने के लिए नहीं किया था।

    ‘एकल घटना’ और आपराधिक मंशा (Criminal Intent)

    बेंच ने टिप्पणी की कि आपराधिक कानून को उन छिटपुट घटनाओं (Isolated incidents) पर लागू नहीं किया जाना चाहिए जिनमें कोई आपराधिक मंशा न हो। एक साधारण सड़क दुर्घटना को बढ़ा-चढ़ाकर आपराधिक हमला पेश करना कानून का गलत इस्तेमाल है।

    केस के मुख्य बिंदु (Key Highlights)

    बिंदुविवरण
    याचिकाकर्ताशाजीर (बस ड्राइवर)।
    हटाए गए आरोपIPC धारा 353, 324 और सार्वजनिक संपत्ति नुकसान अधिनियम।
    कोर्ट का निष्कर्षयह विशुद्ध रूप से एक मोटर दुर्घटना का मामला है।
    फैसलाड्राइवर के खिलाफ सभी आपराधिक कार्यवाहियाँ रद्द (Quashed)।

    कानून की सही व्याख्या

    केरल हाई कोर्ट का यह फैसला उन मामलों में एक बड़ी मिसाल है जहाँ सड़क दुर्घटनाओं को, विशेष रूप से जब इसमें किसी ‘VVIP’ की गाड़ी शामिल हो, जानबूझकर किए गए अपराध के रूप में दर्ज किया जाता है। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि बिना ‘आपराधिक मंशा’ (Mens Rea) के किसी को दंडित नहीं किया जा सकता।

    RELATED ARTICLES

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here

    Most Popular

    Patna
    light rain
    21.6 ° C
    21.6 °
    21.6 °
    88 %
    4.5kmh
    100 %
    Thu
    22 °
    Fri
    21 °
    Sat
    29 °
    Sun
    29 °
    Mon
    30 °

    Recent Comments