Wednesday, June 10, 2026
HomeLatest NewsMedical Negligence: क्या डॉक्टर को सफलता की गारंटी देनी चाहिए?…नेशनल कंज्यूमर कमीशन...

Medical Negligence: क्या डॉक्टर को सफलता की गारंटी देनी चाहिए?…नेशनल कंज्यूमर कमीशन की इस टिप्पणी ने छेड़ी नई बहस

Medical Negligence: राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) के AVM जे. राजेंद्र और जस्टिस अनूप कुमार मेंदिरत्ता की बेंच मेडिकल नेग्लिगेंस (चिकित्सा लापरवाही) से जुड़े एक दशक पुराने मामले में बड़ा फैसला सुनाया है।

यह मामला एक वकील द्वारा 2013 में कराए गए PRP (Platelet-Rich Plasma) थेरेपी से जुड़ा है, जिसमें बाल न उगने पर उन्होंने डॉक्टरों और निजी फर्म पर धोखाधड़ी का आरोप लगाया था। आयोग ने मुंबई के एक वकील को दिए गए 6 लाख रुपये के मुआवजे के आदेश को रद्द करते हुए स्पष्ट किया कि इलाज के सफल न होने का मतलब हमेशा ‘लापरवाही’ नहीं होता।

मामला क्या था? (The Hair Regrowth Dispute)

  • शिकायत: वकील ने 2013 में तीन सेशन लिए थे। उनका दावा था कि उन्हें 100% परिणाम का वादा किया गया था, लेकिन दर्दनाक प्रक्रिया के बावजूद कोई सुधार नहीं हुआ।
  • निचली अदालतों का रुख: जिला और राज्य उपभोक्ता आयोगों ने डॉक्टरों और ‘लाइफसेल’ फर्म को ‘अनुचित व्यापार व्यवहार’ (Unfair Trade Practice) का दोषी माना था और 6 लाख रुपये का हर्जाना भरने को कहा था।

NCDRC का तर्क: डॉक्टर भगवान नहीं हैं

  • राष्ट्रीय आयोग ने निचली अदालतों के फैसलों को पलटते हुए महत्वपूर्ण कानूनी सिद्धांत स्पष्ट किए।
  • परिणाम बनाम लापरवाही: आयोग ने कहा, केवल इसलिए कि इलाज से वांछित परिणाम नहीं मिले, डॉक्टर को लापरवाह नहीं माना जा सकता। हर व्यक्ति पर इलाज का असर अलग-अलग होता है।
  • विवेक का अधिकार: यदि डॉक्टर दो उपलब्ध विकल्पों में से एक को चुनता है और वह सफल नहीं होता, तो उसे ‘निर्णय की त्रुटि’ (Error of Judgment) माना जा सकता है, लापरवाही नहीं।
  • विशेषज्ञ साक्ष्य की कमी: शिकायतकर्ता यह साबित करने के लिए कोई ‘विशेषज्ञ राय’ (Expert Evidence) पेश नहीं कर सका कि डॉक्टरों ने स्थापित चिकित्सा मानकों का उल्लंघन किया है।

PRP बनाम स्टेम सेल थेरेपी (A Technical Distinction)

  • अदालत ने पाया कि निचली अदालतों ने तकनीकी रूप से गलती की थी।
  • गलत व्याख्या: राज्य आयोग ने PRP थेरेपी और स्टेम सेल थेरेपी को एक ही समझ लिया था, जबकि ये दोनों अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं।
  • लाइसेंसिंग: लाइफसेल कंपनी के पास PRP किट की आपूर्ति के लिए CDSCO से उचित पंजीकरण था, इसलिए इसे ‘बिना लाइसेंस’ वाला अवैध मेडिकल अभ्यास नहीं कहा जा सकता।

केस के मुख्य बिंदु (Key Highlights)

बिंदुविवरण
अदालतनेशनल कंज्यूमर कमीशन (NCDRC)।
थेरेपीPRP (Platelet-Rich Plasma) थेरेपी।
विवाद का केंद्रबाल दोबारा न उगने पर मुआवजे की मांग।
फैसलाराज्य आयोग का 6 लाख का मुआवजा आदेश रद्द।
कानूनी संदेशडॉक्टर परिणामों (Results) का बीमाकर्ता (Insurer) नहीं है।

डॉक्टरों के लिए ‘सेफ हार्बर’ (Safe Harbour for Medics)

  • आयोग ने ‘बोलाम टेस्ट’ (Bolam Test) जैसे वैश्विक सिद्धांतों की याद दिलाया।
  • गलत निदान (Wrong Diagnosis) हमेशा ‘लापरवाह निदान’ (Negligent Diagnosis) नहीं होता।
  • डॉक्टरों को केवल इसलिए उत्तरदायी नहीं ठहराया जा सकता क्योंकि “कुछ गलत हो गया”।
  • चिकित्सा प्रक्रियाओं में निहित जोखिम (Mischance or Misadventure) के लिए डॉक्टर जिम्मेदार नहीं हैं।

स्वास्थ्य सेवाओं की कानूनी सीमाएं

यह फैसला चिकित्सा जगत के लिए एक बड़ी राहत है, विशेष रूप से सौंदर्य और कॉस्मेटिक प्रक्रियाओं (Cosmetic Procedures) के क्षेत्र में जहाँ परिणाम व्यक्ति-दर-व्यक्ति बदलते रहते हैं। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि उपभोक्ता अदालतों को चिकित्सा विज्ञान की जटिलताओं और विफलता की संभावनाओं को समझना चाहिए।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Patna
broken clouds
31 ° C
31 °
31 °
65 %
4.8kmh
81 %
Wed
45 °
Thu
42 °
Fri
40 °
Sat
42 °
Sun
39 °

Recent Comments